लापरवाही पूर्ण रवैया रहने से हुआ हादसा:ग्रामीणों के विरोध के बाद भी बनाया गया था पुल, आखिर फूट गया सेंदरी का बांध

बिलासपुर2 महीने पहले
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सेंदरी में बांध का पानी अभी भी घरों से नहीं निकला है। दूसरे दिन भी जद्दोजहद करते रहे ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
सेंदरी में बांध का पानी अभी भी घरों से नहीं निकला है। दूसरे दिन भी जद्दोजहद करते रहे ग्रामीण।
  • 7 मकान टूटे, 18 परिवारों को नुकसान, दूसरे दिन भी पानी निकालते रहे ग्रामीण

सेंदरी के बधिया बांध से लगकर बन रहे हाइवे के उस पुल का ग्रामीणों ने निर्माण के दौरान ही विरोध किया था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की इस ओर लापरवाही पूर्ण रवैया रहने से यह हादसा हुआ। यहां पिछले साल भी इसी तरह की स्थिति निर्मित होने वाली थी, लेकिन लोगों के सचेत रहने से तब यह हादसा टल गया। इस बार मछली मारने की वजह से यह हादसा होना भी बताया जा रहा है। राजस्व विभाग का सर्वे शनिवार को पूरा हो गया।

इस घटना में 18 परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इनमें 7 के मकान धराशायी हो गए हैं। जब दैनिक भास्कर की टीम गांव पहुंची तो लोगों ने अपने साथ हुए हादसे और जान बचाने की जद्दोजहद की जानकारी दी। बहाव बंद होने के बाद दूसरे दिन लोग घर से पानी निकालते, टूटे हुए मकान से लकड़ी और निर्माण में उपयोगी खपड़ा व दूसरी चीजें निकालते दिखे। कुछ लोग खराब हो रहे अनाजों को धूप में सुखाते मिले। सेंदरी में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एक हाइवे अडानी कंपनी से निर्माण करवा रहा है। निर्माण कंपनी ने हाइवे में डालने के लिए बधिया बांध से मिट्टी की खुदाई गहराई से की।

बेतरतीब खुदाई का परिणाम यह हुआ कि बांध का जो क्षेत्र पहले ढलान में था वह ऊपर हो गया और जो क्षेत्र ऊंचाई में था वह गहरा हो गया। इस तरह कंपनी ने बांध से लगा कर पुल बना दी। इसके निर्माण के दौरान जब ग्रामीणों ने विरोध किया तो एनएचएआई के अफसरों ने कहा कि यह पुल दिल्ली से पास डिजाइन में है। इसलिए इसे बनाना पड़ेगा, लेकिन यह टेंपरेरी होगा इसे हम बंद करवा देंगे। गत वर्ष अगस्त में बांध में जब पानी भरा तो इस पुल पर खतरा मंडराने लगा, ग्रामीणों की जागरुकता काम आई और वे गांव को बचा लिए। लेकिन इस बार यह हादसा नहीं रोका जा सका। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि यहां पर घटना वाली रात कुछ लोग मछली मार रहे थे।

इनके मकान धराशायी हुए
1. जेठूराम पिता समारू, 2. अशोक यादव पिता मनराखन यादव, 3. गोदिया बाई पति मनराखन यादव, 4. बल्लू राम यादव पिता मनराखन यादव, 5. परमेश्वर साहू पिता जेठूराम साहू, 6. गुड़िया भारद्वाज पति पुष्पेंद्र भारद्वाज, 7. अशोक सूर्यवंशी पिता हरदेवलाल सूर्यवंशी।

इनको आर्थिक नुकसान हुआ
1. परस राम प्रजापति, 2. रामू प्रजापति, 3. रामेश्वर राठौर, 4. मनोज प्रजापति, 5. जगदीश प्रजापति, 6. जेठूराम साहू, 7. संतोषी बाई, 8. नरेश पटेल, 9. अरुण बंदे, 10. छतराम, 11. पुना लाल भारद्वाज

नाला पर कब्जा हुआ
संजय भारद्वाज ने बताया कि सेंदरी में लोगों की अपनी जमीन है, कुछ के पास पट्टा है और कुछ अभी भी कब्जे में हैं। यहां कब्जा करने वाले एक पुराने नाले पर भी कब्जा कर लिए हैैं। आबादी बढ़ने के साथ जिनकी अपनी जमीन है वे दुकान और मकान बना लिए।

पढ़ाई की फीस भरने बनाई गणेश की मूर्तियां भी डूबी
रामू प्रजापति पॉलिटेक्निक में पढ़ाई कर रहा है। उसने बताया कि सेमेस्टर फीस जमा करने के लिए गणेश जी की मूर्तियां बनाया था। रात में आई बाढ़ से घर और दुकान में पानी भरने से मूर्तियां भी पानी डूब कर गल गई।

बंद हो सकता है पुल
गांव में हर तरफ बांध टूटने वाली घटना की चर्चा है। हर कोई सड़क निर्माण कर रही कंपनी और विभाग को दोषी ठहरा रहे है। शनिवार को निर्माण कंपनी के लोकेश व अन्य पुल देखने पहुंचे। उन्होंने पुल का फोटो लिया। चर्चा में बताया कि पुल को बंद कर सकते हैं। निर्णय विभाग को लेना है।

बारिश में कहां रहें: अशोक सूर्यवंशी और उसके परिवार के लोग अपने टूटे हुए घर से लकड़ी, बल्ली हटाते दिखे। उन्होंने बताया कि मजदूरी करके उनका परिवार लौटा था। खाना खाकर सोए और फिर अचानक रात में पानी घर में घुस गया। जान तो बच गई, लेकिन अब इस बरसात में घर टूट गया है। बारिश के मौसम में कहां रहें।

सीधी बात; विमल शर्मा, इंजीनियर, एनएचएआई

हाइवे निर्माण के लिए अधिकृत इंजीनियर आप हैं यहां पुल की क्या आवश्यकता थी?
- हाइवे की डिजाइन दिल्ली से हुई है। सर्वे के आधार पर हुई है। कार्यालय में ही इसका जवाब मिलेगा।

काम तो आप करवा रहे हैं, बांध निर्माण की वजह से टूटा पुल की जरूरत क्यों हैं यह तो आप बताएंगे?
- मुझे कुछ नहीं पता, मैं सिर्फ काम करवा रहा हूं। यह डिजाइन में है, इसलिए डिजाइन वाले बताएंगे की क्यों बनवाया।

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