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मनमानी:बच्चे की मौत तालाब में लगाए करंट से हुई थी पर पुलिस ने इसे डूबने का केस बना दिया

बिलासपुर2 महीने पहले
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मछली मारने के लिए तालाब में लगाए गए करंट से बच्चे की हुई मौत के मामले को पुलिस ने डूबकर मरने का केस बना दिया। शव का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया। माना जा रहा है दोषी व्यक्ति को बचाने के लिए ऐसा किया गया है। घटना 19 नवंबर को सीपत थाना क्षेत्र में हुई थी। ग्राम बरेली निवासी किशन यादव पिता देवचरण यादव 15वर्ष ग्राम झलमला में अपने नाना दिलीप यादव 50वर्ष के घर में रहता था। गुरुवार की दोपहर वह गांव के ही टिकैतिन तालाब में नहाने गया था। इसके बाद लौटकर नहीं आया। दोपहर 3.30 बजे कुछ लोगों ने घाट के पास पानी में उसका शव उतराते देखा और परिजनों को सूचना दी। परिजन शव को बाहर निकालकर घर ले गए। इस बीच जानकारी मिली कि किसी ने साइकिल के रिंग में बिजली का करंट प्रवाहित कर मछली मारने के लिए उसे तालाब में डाल दिया था और किशन की मौत उसी की चपेट में आने से हुई थी। पुलिस पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीपत भेजा। यहां डॉक्टरों ने बिना पोस्टमार्टम किए ही देर रात को शव को बच्चे के परिजनों को सौंप दिया।

सीपत के कबाड़ संचालक की भूमिका संदिग्ध
इस मामले में सीपत के एक कबाड़ संचालक की भूमिका संदिग्ध है। जिस व्यक्ति ने तालाब में मछली मारने के लिए करंट लगाया था वह घटना की जानकारी मिलते ही उसी कबाड़ संचालक के पास गया। कबाड़ संचालक ने पुलिस से उसकी सेटिंग कराई।

बालक चश्मदीद, दहशत में है,खाना पीना नहीं खा रहा : घटना के बारे में गांव के एक बच्चे को पूरी जानकारी है। वह खेत से लौटकर तालाब में हाथ-मुंह धोने आया था। किशन को करंट से तड़पते हुए देखा था। वह डर गया और भागकर घर आया। उस दिन से वह दहशत में। खाना पीना तक छोड़ दिया है।

हां रात में केस आया था, बाद में बताऊंगा-डॉक्टर
सीपत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. राजेंद्र मरावी ने कहा कि रात को उनके पास एक केस आया था पर जैसे ही उनसे पोस्टमार्टम के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने यह कह दिया कि वे अभी बाहर हैं। इस संबंध में दूसरे दिन बात करेंगे।

मौत कैसे हुई उन्हें नहीं पता-विवेचना अधिकारी
पुलिस के विवेचना अधिकारी हेड कांस्टेबल मोहनलाल सोनी के अनुसार शव का पंचनामा उन्होंने बच्चे के घर में ही किया। बच्चे की मौत किससे हुई उन्हें नहीं पता। उनका कहना है कि जब वे गांव पहुंचे तो शव को तालाब से निकाला जा चुका था और परिजन उसे अपने घर ले गए थे। पूछताछ में घरवालों ने पानी से डूबने से मौत की जानकारी दी तो उन्होंने जांच नहीं की। पंचनामा के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीपत भेज दिया था। वहां क्या हुआ उन्हें नहीं पता।

आरोपी को बचाने घरवालों को दिया मुआवजे का लालच
जानकारी के अनुसार जिस व्यक्ति ने करंट लगाया था, उसे बचाने के लिए ही पुलिस ने पूरी कहानी गढ़ी। बच्चे के परिजनों को यह कहकर चुप करा दिया गया कि यदि करंट से मौत की बात सामने आएगी तो उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाली मुआवजा की रकम नहीं मिलेगी। गौरतलब है कि पानी में डूबने से होने वाली मौतों में मृतक के परिजनों को करीब 4 लाख रुपए सरकार की ओर से देने का प्रावधान है।

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