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43वां रावत नाच महोत्सव:पहला बड़ा सामूहिक उत्सव रावत नाच 5 दिसंबर को होगा

बिलासपुर2 महीने पहले
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  • समिति के सदस्य और महापौर कलेक्टर से मिले, बनी सहमति, गाइड लाइन के मुताबिक होगा कार्यक्रम

लॉकडाउन के बाद से शहर में कोई भी बड़ा कार्यक्रम नहीं हुआ। पर्व और त्योहार कोरोना की भेंट चढ़ गए। हनुमान जयंती, जगन्नाथ रथयात्रा, जन्माष्टमी, गणेश पूजा, नवरात्रि, शरद पूर्णिमा, दीवाली के साथ छठ पूजा पर भी कोरोना का असर दिखा। शहर में रावत नाच महोत्सव पहला बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। ये महोत्सव पांच दिसंबर लाल बहादुर स्कूल परिसर में होगा। देवउठनी एकादशी के बाद अंचल में रावत नाच का दौर शुरू हो जाता है और एक से बढ़कर एक दोहों के साथ यदुवंशी नाच का प्रदर्शन करते हैं। इस साल कोरोना के कारण शहर में होने वाले राज्य स्तरीय रावत नाच महोत्सव पर भी संशय था। महापौर रामशरण यादव, रावत नाच महोत्सव आयोजन समिति के संयोजक कालीचरण यादव, आरजी यादव, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव (राजू) और सदस्यों ने सोमवार को कलेक्टर सारांश मित्तर से मिलकर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी समाज के इस रावत नाच महोत्सव के आयोजन को लेकर चर्चा की। कलेक्टर ने कहा कि शासन-प्रशासन की गाइड-लाइन को ध्यान रखते हुए महोत्सव का आयोजन कर सकते हैं। पुलिस प्रशासन भी महोत्सव के दौरान समिति का साथ देगी। महापौर यादव ने बताया कि 43वां रावत नाच महोत्सव को लेकर जिला प्रशासन से सहमति मिल गई है। देवउठनी के बाद 5 दिसंबर शनिवार को लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में महोत्सव होगा। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग सहित शासन की अन्य गाइड-लाइन का पालन किया जाएगा। समिति के धन्नू यादव, सतीश यादव, जशवंत यादव, चंद्रिका यादव आदि मौजूद रहे।

1978 में हुआ था पहला आयोजन
महापौर यादव ने बताया कि 1978 में राउत नाच महोत्सव की नींव पूर्व स्व. मंत्री बीआर यादव ने रखी। इसका मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित करना था। इसमें छोटी-छोटी मंडलियां शामिल हुईं। समय के साथ छोटी-छोटी मंडलियों ने संगठित होकर बड़े दल का रूप लिया। वहीं महोत्सव के रूप में इसे भव्यता वर्ष 1985 से शास्त्री स्कूल मैदान में आयोजन कराने से मिली।

एकादशी से होती है शुरुआत: परंपरानुसार राउत नाच की शुरुआत देवउठनी एकादशी से होती है। भव्य महोत्सव एकादशी के बाद पड़ने वाले दूसरे शनिवार को होता है। इस वजह से बुधवार को पड़ने वाली देवउठनी एकादशी के बाद पहले शनिवार को छोड़कर दूसरे शनिवार 5 दिसंबर को रावत नाच महोत्सव होगा।

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