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सालों से चल रही गड़बड़ी:एसईसीएल के कोयले में गिट्टी मिलाने का खेल, सप्लाई में सामने आई गड़बड़ी

बिलासपुरएक महीने पहले
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  • महाप्रबंधक की शिकायत पर मस्तूरी थाने में दो के खिलाफ जुर्म दर्ज

साउथ इस्टर्न कोल फिल्ड लिमिटेड(एसईसीएल) कोरबा से सप्लाई हुए कोयले में डस्ट और गिट्टी मिलाने की शिकायत हुई। यह शिकायत जयराम कोल डिपो के महाप्रबंधक ने मस्तूरी थाने में की। प्रकरण में दो के खिलाफ एफआईआर हुई है। एक आरोपी फरार चल रहा है। पुलिस ने तहसीलदार से उसकी संपत्ति के सबंध में जानकारी मांगी है।

यह शिकायत पावर सिटी प्राइवेट लिमिटेड कोरबा के शाखा भनेसर जयराम नगर कोल डिपो के जीएम ने की है। उन्होंने बताया कि स्तरहीन कोयला सप्लाई करने का मामला तब समझ में जब वे इसे महाराष्ट्र की एक निजी कंपनी को सप्लाई करने वाले थे। यह कोयला एसईसीएल कोरबा के कुसमुंडा खदान से खरीदा गया था। जिसे परिवहन के दौरान वाहन क्रमांक सीजी-15 एसी 4251 और सीजी-10 एपी 0395 में ड्राइवर द्वारा ट्रांसपोर्टर और वाहन स्वामी की सांठगांठ से आर्थिक लाभ कमाने की मकसद से कोयले की जगह जीरो गिट्‌टी और कोयला डस्ट मिलाकर कोयले को खाली करने डिपो लाया गया।

शिकायत के बाद थाना मस्तूरी में विवेचना में लिया गया। विवेचना में यह बात सामने आई कि ट्रक चालक मुरित राम साहू और अब्दुल शाहीद खान के खिलाफ यह अपराध घटित करना पाया गया। जो कि घटना के बाद से फरार चल रहे हैं। कुछ दिन पुलिस ने जब आरोपियों की तलाश की तो मुरित राम साहू पकड़ा गया। और उन्होंने यह गड़बड़ी करना स्वीकार किया। जबकि अब्दुल शहीद अभी तक फरार चल रहा है। वह सिरगिट्टी क्षेत्र का रहने वाला है। इसलिए मस्तूरी पुलिस ने तहसीलदार से उसकी संपत्ति के बारे में जानकारी लेने की प्रक्रिया बढ़ा दी है। तहसीलदार ने सिरगिट्टी पटवारी को इस चिट्ठी को बढ़ा दिया है, लेकिन अभी तक पटवारी की ओर से उक्त मामले में जानकारी नहीं भेजी गई है।

सालों से चल रही गड़बड़ी, एसईसीएल कर्मचारी भी शामिल
एसईसीएल की करीब हर खदान के पास कई अवैध कोल डिपो हैं। यहां रोज हजारों टन कोयला डंप होता है, छोटे उद्योगों, ईंट भट्ठों आदि में इसका उपयोग किया जाता है। खदानों से निकलने वाले ट्रकों के ड्राइवर, लिंकेज में कोयला खरीदने वाले उद्योगों के प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर डिपो संचालक चोरी का कोयला खरीदते हैं, इसकी जगह कोयले का चूरा, पत्थर, पानी मिला दिया जाता है। यही वजह है कि लिंकेज में कोयला खरीदने वाले उद्योगों तक स्तरीय कोयला नहीं पहुंच पाता। जबकि एसईसीएल की साइडिंग में खरीदी करने वाले उद्योगों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कोयले की सैंपलिंग कर जांच की जाती है। एसईसीएल के अधिकारी जानबूझकर मामले में कुछ कहने से परहेज करते हैं।

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