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CG में 4 साल में कम हो गए 23 टाइगर:बाघों को बचाने की याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, गाइड लाइन का पालन नहीं

बिलासपुर3 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चल रही है टाइगर बचाने की याचिका पर सुनवाई - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चल रही है टाइगर बचाने की याचिका पर सुनवाई

छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या लगातार घट रही है। पिछले 4 साल में बाघों की संख्या 46 से घटकर 19 हो गई है। इसके बाद भी वन विभाग को इसकी चिंता नहीं है। 12 साल में आज तक राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। इस मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, राज्य शासन के वन विभाग के सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सहित अन्य को नोटिस जारी कर 8 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। रायपुर के वन्यप्राणी प्रेमी व समाज सेवी नितिन सिंघवी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने बताया है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने वर्ष 2013 में गाइडलाइंस जारी की थी। जिसके तहत रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया जाना था। तब सभी वनमंडलों को बजट जारी कर विशेष बंदूक, दवाइयां वगैरह खरीदने के आदेश दिए गए थे। इसके तहत सामग्रियों की खरीदी भी गई थी। लेकिन, अचानकमार टाइगर रिजर्व और उदंती सीतानाडी टाइगर रिजर्व में रैपिड रिस्पांस टीम अस्तित्व में ही नहीं है।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में इसका गठन 2020 में किया गया है। उन्होंने याचिका में बताया है कि बाघों को संरक्षण देने के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम में 2006 में नए प्रावधान जोड़े गए हैं। जिसके तहत अलग-अलग स्तर पर तीन प्रकार की वैधानिक समितियां गठित कर बाघों और अन्य वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करना है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में इन समितियों का गठन तो किया गया है। लेकिन 12 साल में एक भी बैठक नहीं हुई है। याचिकाकर्ता सिंघवी ने कोर्ट को बताया गया कि छत्तीसगढ़ में लगातार बाघों की संख्या कम हो रही है और शिकार हो रहा है। वर्ष 2014 में 46 बाघ थे जो 2018 में घटकर 19 हो गए गए हैं। इसके बाद भी इनके संरक्षण की दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है।
संचालन समिति की नहीं हुई मीटिंग
याचिकाकर्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली 14 सदस्यीय इस समिति के गठन की अधिसूचना मई 2008 में जारी की गई्। इस समिति का कार्य बाघ संरक्षण के साथ ही परभक्षी व शिकार किए जाने वाले वन्यजीवों के लिए समन्वय, मॉनिटरिंग, संरक्षणको सुनिश्चित करना है। लेकिन आज तक इस समिति की कोई भी बैठक वन विभाग ने नहीं कराई है।
बाघ संरक्षण फाउंडेशन व गवर्निंग बॉडी की भी नहीं हुई बैठक
छत्तीसगढ़ में पब्लिक ट्रस्ट के रूप में उदंती सीतानदी बाघ संरक्षण फाउंडेशन और अचानकमार बाघ संरक्षण फाउंडेशन की अधिसूचना वर्ष 2010 में जारी की गई। इंद्रावती बाघ संरक्षण फाउंडेशन की अधिसूचना 2012 में जारी की गई थी। इस समिति का कार्य नीतिगत मार्गदर्शन और निर्देश देना है। 10 सदस्यीय गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष वन मंत्री होते हैं। तीनों टाइगर रिजर्व के फाउंडेशन के लिए आज तक कोई बैठक नहीं हुई है।
एक बार हुई है दैनिक प्रबंधन एवं प्रशासन समिति की बैठक
तीनों टाइगर रिजर्व के लिए पब्लिक ट्रस्ट के तहत यह समितियां 2010 में उदंती सीता नदी तथा अचानकमार टाइगर रिजर्व के लिए तथा 2012 में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के लिए गठित की गई। उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व में आज तक के इस समिति की कोई बैठक नहीं हुई है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 2016 व अचानकमार में 2019 में पहली और अंतिम बैठक हुई थी। 5 सदस्य इस समिति के अध्यक्ष फील्ड डायरेक्टर टाइगर रिजर्व होते हैं। फिर भी कोई बैठक तक नहीं बुलाई जा सकी।
रैपिड रिस्पांस टीम का नहीं है अस्तित्व
साल 2013 में जारी गाइडलाइंस के अनुसार रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया जाना था। तब सभी वनमंडलों को बजट जारी कर निश्चेतना बंदूक दवाइयां इत्यादि खरीदने के लिए आदेश दिए गए थे और ख़रीदी भी की गई। लेकिन अचानकमार टाइगर रिजर्व और उदंती सीतानाडी टाइगर रिजर्व में रैपिड रिस्पांस टीम अस्तित्व में ही नहीं है। वहीं इंद्रावती टाइगर रिजर्व में इसका गठन 2020 में किया गया है।