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दीवाली पर कोरोना असर:सीजन में जो तीन लाख दीये बनाता था, उसने 50 हजार में ही समेट लिया कारोबार

बिलासपुर5 दिन पहले
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  • दीपावली की तैयारी शुरू पर इसका असर कुम्हार पर, पर्व पर हर साल की अपेक्षा एक तिहाई ही बना रहे दीये

नवरात्रि शुरू हो गई है। कोरोना का कहर नवरात्रि और दशहरा पर दिख रहा है। समितियाें द्वारा पंडाल नहीं सजाया गया। दशहरा में रावण दहन कम होगा। अब इस कोरोना का कहर अभी से आने वाली दीवाली पर भी दिखने लगा है। 26 अक्टूबर को दशहरा पर्व है व 14 नवंबर को सबसे बडा पर्व दीपावली है। इस मौके लोगो के बीच में मिट्टी का दीया व मां लक्ष्मी की मूर्तियों की मांग बनी रहती है, जिसे देखते हुए कुम्हार पूर्व से ही मिट्टी के दीये और मूर्तियां इत्यादि बनाने का कार्य उत्साह के साथ शुरू कर देते थे, पर इस बार वेे भी डरे हुए हैं। गणेश चतुर्थी में इन्हें नुकसान हुआ है। उसे देखते हुए कुम्हार इस बार मां लक्ष्मी की मूर्तियां और दीये तो बनाना शुरू कर दिए हैं, पर बहुत ही कम मात्रा में। कुम्हार पारा में मूर्ति और दीये बनाने वाले कुम्हारों का कहना है कि वह हर साल दीपावली के लिए 3 से 4 लाख दीये तैयार करते थे। लेकिन संक्रमण के चलते इस बार वे मात्र 50 हजार दीये तैयार कर रहे हैं। साथ ही कुम्हारों का कहना है कि हर साल जो दीया 100 रुपया सैकड़ा बेचते थे, उसकी भी कीमत इस बार कम कर दिए हैं। वहीं शहर में बाहर से भी कारीगर दीये और मूर्तियां लेकर आते थे, पर वे भी इस बार नहीं पहुंचे हैं।

100 की जगह 80 रुपए सैकड़ा में बेच रहे दीये
कुम्हार कृष्णा प्रजापति ने बताया कि हर साल गांव से कारीगरों को बुलाकर कम से कम 3 से 4 लाख दीया तैयार करवाते थे। मां की छोटी मूर्तियां भी बनती थी। इस बार संक्रमण के चलते कारीगर नहीं आ रहे हैं। घर के लोग ही मूर्ति और दीये बना रहे हैं। गणेश चतुर्थी के समय मूर्तियां बनाई गई थीं, पर कम रेट में भी पूरी नहीं बिक पाईं। इस बार दिवाली के लिए मात्र 50 हजार दीये घर के लोग मिलकर तैयार कर रहे हैं। हर साल इसे 100 रुपए सैकड़ा में बेचते थे, पर इसे इस बार 80 रुपए में ही बचे रहे हैं।

नहीं मिले हैं ऑर्डर
अशोक प्रजापति ने बताया कि हर साल बाहर से दीपावली के एक महीने पहले ही लाखों दीये के ऑर्डर मिल जाते थे। गणेश चतुर्थी के समय से ही ऑर्डर के अनुसार माल तैयार करना शुरू कर देते थे, पर इस बार अभी तक ऑर्डर नहीं मिला है। बस जो बनाएंगे, उसका दुकान लगाकर बेचेंगे। ताकि जो लागत लगाए हैं, वो निकल जाए।

मिट्‌टी और भूसा की कीमत भी बढ़ी
कृष्णा प्रजापति ने बताया कि एक तरफ दीये और मूर्तियां संक्रमण के चलते कम रेट में भी नहीं बिक रही हैं, तो दूसरी तरफ मिट्‌टी, लकड़ी, भूसा की कीमत बढ़ गई है। पिछले साल 1000 रुपए ट्राली मिलती थी। इस साल एक टाली मिट्टी का रेट 2000 रुपए हो गया है। इसी तरह लकड़ी 6 रुपए किलो थी, इस बार 10 रुपए हो गई है। भूसा जो 1 से 2 रुपए किलो में खरीदते थे, उसका रेट 5 रुपए किलो हो गया है। 500 रुपए क्विंटल हो गया है।

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