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इनोवेशन:प्राध्यापकों ने बनाया ऐसा डिवाइस, जो डस्टबीन में कचरे के साथ और क्या-क्या है बता देगा

बिलासपुर4 दिन पहले
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  • मॉडल साइंस कॉलेज के प्राध्यापक तरुणधर व शंकराचार्य कॉलेज भिलाई के डॉ. राजेश ने बनाया

शहर के हर एरिया, गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में कचरा फेंकने के लिए डस्टबीन रखा हुआ है। कई बार ऐसी स्थिति आती है कि डस्टबीन भर जाता है और उसके बाहर कचरा फैलने लगता है, लेकिन जानकारी के अभाव में उसे समय से उठाया नहीं जा पाता है। वहीं कचरे में पॉलीथिन, लोह सहित अन्य सामाग्री रहती है, जिससे गाय खाती हैं। कई बार इससे गायों की मौत हो जाती है। ऐसी स्थिति को देखते हुए साइंस कॉलेज के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष तरुणधर दीवान ने श्री शंकराचार्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्राध्यापक डॉ. राजेश तिवारी के साथ मिलकर एक मॉडल तैयार किया है। यह ऐसा मॉडल है, जो डस्टबीन में लगाया जाएगा। जैसे ही डस्टबीन में कचरा डलना शुरू होगा, डिवाइस बताएगा कि किस डस्टबीन में कितना कचरा है और उसमें कितनी मात्र में पॉलीथिन, कितनी मात्रा में लोह सहित अन्य सामाग्री है। साथ ही डस्टबीन के भरने की सूचना भी डिवाइस के माध्यम से मिलेगी। जिससे समय रहते उसे उठाया जा सकेगा। इससे डस्टबीन के बाहर कचरा नहीं फैलेगा और गायें भी सुरक्षित रहेंगी। साइंस कॉलेज के प्राध्यापक प्रो. दीवान ने बताया कि इस मॉडल का नाम आईओटी बेस्ड स्मार्ट गार्बेज मॉनिटरिंग एंड मैथर्ड एंड देयर ऑफ है। उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में हजारों लोगों की मौत कचरे से निकलने वाली गंदगी, दूषित जल एवं रासायनिक क्रिया, जो गंदगी द्वारा होती है, इससे हजारों लोगों व जानवरों की मौत हो जाती है। इस रिसर्च मॉडल से कचरा प्रबंधन एवं गंदगी से होने वाली बीमारी से निजाद मिलेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अच्छा है, क्योंकि बैक्टीरियल और वायरल जनित रोगों की रोकथाम होगी। साथ ही ऑटोमेटिक कचरा इकट्ठा होने की सूचना मिलेगी। वातावरण जो गंदगी से दूषित होता है, इस मॉडल से उसकी रोकथाम होगी। री-साइक्लिंग में भी मदद मिलेगी, जैसे खाद्य पदार्थ से ऑर्गेनिक खाद बनाने में, प्लास्टिक, पॉलीथिन और पेपर को भी री-साइक्लिंग किया जा सकता है। कचरे में मिलने वाले बैटरी, लोहे अन्य वस्तुओं को भी री-साइक्लिंग कर उपयोग में लाया जा सकता है। स्वच्छ भारत अभियान में मदद मिलेगी। स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा। कचरे से होने वाली रासायनिक दुर्घटना नहीं होगी। सफाई कर्मियों के लिए भी यह रिसर्च मॉडल बहुत ही सुविधाजनक और लाभप्रद होगा। इसका प्रेजेंटेशन भी भारत सरकार के समाने दिया गया था, जिसके आधार पर इस डिवाइस को पेटेंट मिला है।

इनके मॉडल को भारत सरकार से मिला पेटेंट
प्रो. दीवान ने बताया कि भारत सरकार के कंट्रोलर जनरल आफ पेटेंट्स, डिजाइन एंड ट्रेडमार्क, डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री रिसर्च ने मॉडल आईओटी बेस्ड स्मार्ट गार्बेज मॉनिटरिंग एंड मैथर्ड एंड देयर ऑफ को पेटेंट दिया है।

कम लागत में तैयार हो रही डिवाइस
प्राध्यापकों ने बताया कि बहुत कम लागत में मॉडल को तैयार किया जा रहा है। मॉडल का उपयोग स्मार्ट सिटी कांसेप्ट में सुनियोजित ढंग से कचरा प्रबंधन के लिए किया जा सकता है। मॉडल को तैयार करने में अल्ट्रासोनिक सेंसर, लेवल इंडिकेटर, वेब एप्लीकेशन, जीएसएम माड्यूल, कंट्रोल यूनिट इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग का उपयोग किया गया है।

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