ट्रेन कोचों में लगे फायर सिस्टम ही खराब:कई LHB कोचों में बंद मिले, कई की वेलिडिटी हो चुकी थी खत्म; बिलासपुर में पकड़ी गई गड़बड़ी

बिलासपुर2 महीने पहले
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हेतमपुर रेलवे स्टेशन में उधमपुर-दुर्ग एक्सप्रेस की घटना के बाद बिलासपुर के रेल अफसर भी सकते में हैं। हालात का जायजा लेने के लिए मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल विभाग के अधिकारी सोमवार को कोचिंग डिपो में पहुंचे। एचएलबी कोचों की जांच के दौरान बड़ी खामियां सामने आई हैं। कोच में आग बुझाने के लिए रखे अग्नि शमन यंत्र खराब और बंद मिले। तो वहीं कुछ की वेलिडिटी ही खत्म हो गई थी। जांच के दौरान रेल कर्मियों को आग से बचने के तात्कालिक उपाय बताए गए।

दुर्ग से उधमपुर के बीच जो ट्रेन चलती है, वह रायपुर रेल मंडल की है। ऐसे में ट्रेन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन की होने के कारण यहां भी हड़कंप मचा हुआ है। उच्चाधिकारियों के साथ-साथ रेलवे बोर्ड स्तर के अधिकारियों की कभी भी यहां जांच हो सकती है।

बताया जा रहा है कि आग की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट है। इसी से निकली चिंगारी ने दो कोच को जलाकर खाक कर दिया। यही वजह है कि शुक्रवार की रात से ही कोचिंग डिपो में मैकेनिकल और इलेक्ट्रिक विभाग के अफसरों की मौजूदगी बढ़ गई है।

रेलकर्मियों को आग बुझाने की जानकारी देते विशेषज्ञ
रेलकर्मियों को आग बुझाने की जानकारी देते विशेषज्ञ

दोनों विभाग के अफसर कोचिंग डिपो में खड़ी एलएचबी कोच वाली रैक का ही जायजा ले रहे हैं। जांच के प्रमुख बिंदु बिजली तार समेत अन्य इलेक्ट्रिक उपकरण की स्थिति और अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता है। यंत्र की वैधता की बारीकी से जांच की जा रही है।

बिलासपुर रेल मंडल के पास 155 से अधिक एलएचबी कोच है, जिनसे रैक बनाकर अलग-अलग ट्रेनों का परिचालन किया जाता है। शॉर्ट सर्किट की घटनाएं अभी सबसे ज्यादा एलएचबी कोच में ही हो रही है। जांच के दौरान वह यह देख रहे हैं कि सभी कोचों में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता है या नहीं। यदि है तो कही वैधता समाप्त तो नहीं हो गई है।

लगातार चलेगा अभियान
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू किया गया है। ट्रेन में उपलब्ध अग्निशमन उपकरण का प्रयोग सभी कर्मचारी कर सकें, यह सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सुरक्षा मानकों का भी कठोरता से पालन करने का निर्देश दिया गया है। इसमें आरपीएफ, टीटीई, रेलवे गार्ड और अन्य रेल कर्मचारी जो रेलवे के फ्रंट लाइन स्टाफ को शामिल किया गया है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षकों ने कर्मचारियों को क्लास लेकर और डेमो के माध्यम से जानकारियां दीं। इस दौरान उन्हें बताया गया कि यदि किसी गैस सिलेंडर या अन्य माध्यमों से आग लग जाती है, तब उस स्थिति में आग को कैसे नियंत्रित करना है। बारी–बारी से प्रत्येक कर्मचारियों से इस डेमो से अभ्यास कराया गया। ट्रेन, स्टेशन और कार्यालयों में अग्निशमन यंत्र रखा होता है। घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारी ही यंत्र के जरिए आग पर काबू कर लें। इसीलिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

खामियां छिपाने की कोशिश
बताया जा रहा है कि हेमतपुर में हुई घटना के दौरान एक बड़ी खामी भी सामने आई है। ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों बताया कि कोच में उपलब्ध आग बुझाने वाला यंत्र काम ही नहीं कर रहा था। कुछ की वैधता तक समाप्त हो चुकी थी। हालांकि रेलवे के अफसर इससे इंकार कर रहे हैं, लेकिन यात्रियों के द्वारा दी गई इस जानकारी को छिपाने के लिए ही एचएलबी कोच की जांच की जा रही है।

दरअसल, आगजनी की इस घटना के बाद जांच दल कोचिंग डिपो भी आ सकता है। यही वजह है कि उनके आने के पहले ही अग्निशमन यंत्रों को दुरुस्त किया जा रहा है।

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