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प्रॉपर्टी टैक्स:इस बार अस्पताल और नर्सिंग होम से मिला दोगुना टैक्स, अब तक 7.40 करोड़ वसूले

बिलासपुरएक महीने पहले
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सम्पत्ति का नाप जोख करता निगम का अमला। - Dainik Bhaskar
सम्पत्ति का नाप जोख करता निगम का अमला।
  • हेल्थ सेक्टर से 18.5 लाख और उद्योग सेक्टर से केवल 7.2 लाख वसूले जा सके
  • कोविड इफेक्ट: पिछले साल से 52% टैक्स कम मिला

हर साल प्रॉपर्टी टैक्स देने में अस्पताल और नर्सिंग होम पीछे रहते थे, इस बार टैक्स जमा करने में आगे हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार दो गुना टैक्स दिया है। दुर्ग निगम ने अभी तक 7.40 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली की है। हालांकि कोरोना काल में उद्योग बंद होने की वजह से टैक्स देने में दिक्कतें आई हैं।

निगम को पिछले साल की तुलना में 52 प्रतिशत कम टैक्स कम मिला है। मार्च 2020 से लेकर जून 2021 तक दुर्ग निगम को 7.40 करोड़ प्रापर्टी टैक्स मिला है। इंड्रस्ट्रियल सेक्टर से कम टैक्स मिला है। हेल्थ सेक्टर से कोरोना काल के मुकाबले 45 प्रतिशत ज्यादा टैक्स जमा किए गए। वहीं इंड्रस्ट्रियल सेक्टर ने 48 प्रतिशत टैक्स दे पाया। कई बड़े उद्योगों ने टैक्स की रकम भी जमा नहीं की।

दुर्ग निगम के अंतर्गत 55 अस्पताल, नर्सिंग होम व क्लिनिक संचालित हैं। कोरोना काल में इन हेल्थ सेक्टरों से सबसे ज्यादा टैक्स निगम को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल के 14 महीने में 18.5 लाख रुपए रुपए का टैक्स हेल्थ सेक्टरों ने निगम में पटाया है। इसके पहले यानी फरवरी 2020 तक हेल्थ सेक्टरों का टैक्स 9.4 लाख रुपए था।

इस तरह 9.1 लाख रुपए हेल्थ सेक्टर ने ज्यादा जमा किए। वहीं दुर्ग निगम क्षेत्र में 66 उद्योग-धंधे चल रहे हैं। जो हर साल निगम को प्रापर्टी टैक्स देते हैं। कोरोना की मार ऐसी पड़ी कि उद्योग-धंधे बंद रहे और उसकी वजह से टैक्स भुगतान पर असर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 12 लाख 35हजार रुपए डिमांड थी लेकिन उसमें केवल 7.2 लाख रुपए का ही टैक्स निगम को मिल पाया। इस तरह 5.15 लाख रुपए का टैक्स कम जमा हुआ।

हर साल 12 करोड़ टैक्स के रूप में वसूलने का लक्ष्य रखा

दुर्ग निगम ने प्रापर्टी टैक्स वसूली को दुगुना कर दिया है। निगम ने सर्वे करवाया है जिसमें पिछले दो साल से 1528 नए मकान और भवन बने हैं। इन लोगों से 32 लाख 35 हजार रुपए टैक्स लिया गया है। जून 2021 में ही 107 नए मकान मालिकों से 1 लाख 50 हजार रुपए टैक्स मिले हैं। तब कहीं जाकर निगम टैक्स वसूली बेहतर कर पाया है। निगम का सालाना टैक्स 6.50 करोड़ रुपए है जिसे बढ़ाकर 12 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

उद्योगपतियों ने चार साल से 44.91 लाख रु. का टैक्स नहीं जमा किया

चार साल से कुछ उद्योगपतियों ने निगम को प्रापर्टी टैक्स देना ही बंद कर दिया है। इनमें टॉप 10 लोगों का 44.91 लाख रुपए का टैक्स बाकी है। बलदेव सिंह का 11.76 लाख, बसंत कुमार कटारिया 5.88 लाख, सुनीता सिंह 5.07 लाख, बसंत कुमार 4.83, संजय धावले 2.65 लाख, राजनारायण 3.06लाख , तिलक सिंह 2.53 लाख, गोविद दीक्षित 2.85 लाख और रतनलाल 1.92 लाख रुपए टैक्स नहीं दिया।

ज्यादा टैक्स देने वाले टॉप टेन प्रमुख अस्पताल यह हैं शामिल

कोरोनाकाल में अस्पतालों ने अधिक टैक्स दिया है। इसके टॉप टेन में राजकुमार नर्सिंग होम 63,342, ओम हॉस्पिटल 24,538, सूरज हॉस्पिटल 49,555,सिद्दीकी हॉस्पिटल 32,928, जेजे नर्सिंग होम 48,943, आरआर हॉस्पिटल 68,597, शुभम क्लीनिक 19,755, वर्धमान हॉस्पिटल 83,174, एसके क्लीनिक 12,360 और एसके क्लीनिक 13,159 रुपए शामिल हैं।

प्रापटी टैक्स के स्व विवरणी फार्म में कई गड़बड़ियां हैं

कोरोनाकाल में ऑनलाइन संपत्ति कर जमा करवाया गया। इसके लिए लोगों से स्व विवरणी भरकर अपने संपत्ति का ब्योरा देकर तय राशि के हिसाब से प्रापर्टी टैक्स जमा करना था। इसमें लोगों ने टैक्स बचाने की भी जुगत लगाई और गलत विवरण भर दिया है।

ऐसे लोगों की जांच निगम ने शुरू करवा दी है। उनके घर जाकर जमीन की नाप-जोख की जा रही है। निगम ऐसे लोगों पर पांच गुना ज्यादा अधिभार लेकर भरपाई करने की तैयारी में है। इसके लिए घरों का नाप जोक किया जा रहा है।

प्रापटी टैक्स का नए सिरे से करेंगे मूल्यांकन

कोरोनाकाल में संपत्ति कर हेल्थ सेक्टर से बेहतर हुआ है लेकिन इंड्रस्ट्रीज बंद होने की वजह से असर पड़ा। पिछले दो साल में नए मकान व भवन बने हैं लेकिन वह टैक्स नहीं दे रहे हैं। उनका सर्वे कर टैक्स अधिरोपित कर रहे हैं। स्व विवरणी गलत भरने वालों का मौके पर जाकर फिर से आंकलन कर नए सिरे से टैक्स निर्धारित कर रहे हैं। -हरेश मंडावी, निगम आयुक्त

अभी तक शहर के 1100 लोगों ने नहीं दिया है समेकित कर

दुर्ग निगम का पिछले साल वर्ष 2020 में 19 करोड़ 17 लाख रुपए का टैक्स वसूली का टार्ग्रेट रहा, लेकिन कोरोना काल की वजह से कई लोगों ने टैक्स जमा नहीं किए हैं। यह टैक्स पेयजल व अन्य के हैं। निगम में 18 करोड़ 63 लाख रुपए लोगों ने टैक्स दिया है। इस तरह कोरोना काल में मार्च 2020 से लेकर मार्च 2021 तक 54 लाख रुपए की वसूली कम हो पाई। इसमें 1100 लोगों ने पिछले वित्तीय वर्ष में टैक्स नहीं दिया है।

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