पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

ऐसे थे जोगी :मेरी शर्ट उतरवाने वालों से अकेले भिड़ गए थे, वे जीवन में कभी किसी से नहीं डरे

बिलासपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • छत्तीसगढ़ के स्वप्नदृष्टा ही नहीं उसे साकार करने वाले प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के जीवन की कहानियां
Advertisement
Advertisement

सूर्यकान्त चतुर्वेदी | 29 अप्रैल 1946 को पेण्ड्रारोड तहसील के ग्राम सारबहरा के जोगी डोंगरी में काशी प्रसाद जोगी और कांता जोगी के परिवार में जन्मे अजीत प्रमोद कुमार जोगी ने बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की पहचान पूरे देश में कराई।  ‘दैनिक भास्कर’ ने विलक्षण प्रतिभा के धनी जोगी के जीवन की दो दिलचस्प कहानियां उनके बड़े भाई और बालसखा से मिलकर जानी, पेश हैं।

बड़े भाई ने बताई इंजीनियर से आईएएस और नेता बनने की कहानी
अजीत प्रमोद कुमार मुझसे 10 साल छोटे थे। हम चार भाइयों में मैं सबसे बडा़ हूं। एमएसीटी कॉलेज भोपाल से इंजीनियरिंग पास करने के बाद मैं उन्हें यह कहकर रायपुर ले आया कि चलो मैं तुम्हारी आईएएस की तैयारी कराऊंगा। तब अजीत ने मुझसे कहा कि आईएएस वही बनते हैं, जो ईश्वर की तरफ से सबसे अलग सबसे अच्छी बुद्धि, क्षमता के होते हैं। उन्होंने कहा कि मेमोरी शार्प होना चाहिए। तब मैंने उसे उत्साहित करते कहा कि मैं उन लोगों को जानता हूं जो आईएएस के लिए सलेक्ट हुए हैं। साइंस कालेज रायपुर में नियुक्ति के पहले मैं इविंग क्रिश्चियन कालेज इलाहाबाद में आईएएस के स्टूडेंट की तैयारी कराता था। उन दिनों सर्वाधिक आईएएस इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश से निकलते थे। अजित में तर्कशक्ति इतनी अच्छी थी कि पिताजी के पास  ट्यूशन के लिए आने वालों को वह गणित उनसे ही पढ़वाते थे। अजीत के जिस मास्टर ब्रेन ने उसे लाखों लोगों का चहेता बनाया, उसे ऊंचाइयों पर पहुंचाया, वही ब्रेन आज कमजोर हो गया और उसने उसे जीने नहीं दिया। हमारे परिवार का डायमंड खो गया। पारिवारिक पृष्ठभूमि शिक्षा जगत से जुड़ी रही। मैं कभी नहीं चाहता था कि वह राजनीति में आए। 1986 की वह अजीब सी घटना थी कि मैं कार्यालयीन कार्य से इंदौर से बिलासपुर लौटा और अजीत कलेक्टरी से इस्तीफा देकर दिल्ली चले गए और राज्यसभा के सदस्य चुन लिए गए।
(प्रोफेसर एसआर जोगी ने जैसा भास्कर को बताया)

बचपन के दोस्त ने कहा- साइकिल के डंडे पर बिठाकर ले जाता था लाइब्रेरी

मल्टीपरपज हाईस्कूल पेंड्रा में नवीं से ग्यारहवीं तक जोगी के साथ पढ़े नरेंद्र राय रायपुर में उन्हें अपनी साइकिल के डंडे पर बिठाकर रोज शारदा टाकीज होते हुए मिशन की गॉस मेमोरियल लाइब्रेरी लेकर जाते थे। जोगी ने अपनी बायोग्राफी के पेज 18 में इसका जिक्र किया है। बात 1967-68 की है। नरेंद्र राय ने बताया कि स्कूल लाइफ में मुझे उनमें कोई विलक्षण बात नजर नहीं आई। लाइब्रेरी में वह शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक किताबों में लीन हो जाते। इसी किताबी ज्ञान ने उनकी जिंदगी बदल दी। भोपाल से क्या लेकर लौटे कि एक के बाद एक जो हाथ में पकड़ा उसमें सफल होते चले गए। 1968 में यूपीएससी में उनका आईपीएस में चयन हुआ। फिर एलएलएबी में गोल्ड मेडलिस्ट रहे। रायपुर में आईएएस की तैयारियों के दौरान लाइब्रेरी से लौटते ब्राह्णणपारा के पास लूटपाट का डर रहता था। एक बार कुछ लोगों ने रोक कर मेरी शर्ट उतरवा ली, तो जोगी उनसे भिड़ गए। अकेले होने पर भी वह डरने, पीछे हटने वालों से नहीं थे, राजनीति में यह गुण जीवन पर्यंत उनके साथ रहा।

Advertisement
0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव - आज का दिन पारिवारिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से शुभ फलदायी है। व्यक्तिगत कार्यों में सफलता मिलने से मानसिक शांति का अनुभव करेंगे। कठिन से कठिन कार्य को आप अपने दृढ़ निश्चय से पूरा करने की क्षमत...

और पढ़ें

Advertisement