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रेलवे की कार्रवाई:सीनियर डीईएन कोआर्डिनेशन का तबादला, फिलहाल नई पोस्टिंग नहीं, तबादले पर दिन भर चर्चा चलती रही

बिलासपुर2 महीने पहले
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  • हालांकि अफसर इसे सामान्य विभागीय तबादला बता रहे

सीनियर डीईएन को ऑर्डिनेशन बिलासपुर एम के सुबुद्धि का तबादला जोनल मुख्यालय में कर दिया गया है। अचानक से हुए तबादले को वेंकट नगर रेल हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है। मंगलवार को पूरे दिन इसकी चर्चा रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग व मुख्यालय में चलती रही।

वेंकटनगर व निगोरा के बीच अलान नदी पर मालगाड़ी दुर्घटना के मामले में रेलवे प्रशासन ने अब तक दो लोगों पर कार्रवाई की है। सबसे पहले 10 जुलाई को की-मैन यश कुमार को सस्पेंड किया था। इसके दो दिन बाद सीनियर सेक्शन इंजीनियर के स्थान पर तीन महीने पहले नियुक्त किए गए नई भर्ती वाले जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड किया गया था। मंगलवार को सीनियर डीईएन को-आर्डिनेशन को हटाकर उन्हें मुख्यालय स्थानांतरित किया गया है। फिलहाल उनके स्थान पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई है। आनन-फानन में यह कार्रवाई की गई है। हालांकि अफसर इस बात से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सामान्य तबादला है। अधिकारी स्तर पर कार्रवाई जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि अभी मामले की जांच चल रही है। अचानक से हुई कार्रवाई की चर्चा पूरे दिन मंडल कार्यालय में चलती रही। उनके स्थान पर किसी और अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने की भी चर्चा कर्मचारियों में चलती रही।

ओवरलोडिंग भी हादसे की वजह हो सकती है
पटरियों के कमजोर होने और टूटने की एक वजह ओवरलोड को भी माना जा रहा है। अक्सर मालगाड़ियां ओवरलोड चलाए जाने की जानकारी मिली हैं। वेंकट नगर व निगोरा रेलवे स्टेशन के बीच अलान नदी पर हुए रेल हादसे में ओवरलोडिंग के मामले की भी जांच चल रही है। सीआरएस मित्रा ने लोडिंग से संबंधित समस्त दस्तावेजों की जांच की है। कुछ दस्तावेज साथ भी ले गए हैं। स्थानीय स्तर पर अफसर भी ओवरलोडिंग की जांच करा रहे हैं। जो मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई वह बीसीएन वैगन वाली थी जिसका वजन 20.32 टन प्रति एक्सल के हिसाब से होता है।

लोड वैगन का वजन अधिकतम 68 टन होना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि साइडिंग से वे-मेंट होकर ही मालगाड़ी निकलती है इसलिए ओवरलोडिंग होती ही नहीं है। जिस भी वैगन में ओवरलोड होता है उसे साइडिंग में ही खाली करा दिया जाता है। ऐसी साइडिंग जहां पर वे-ब्रिज नहीं है वहां से जब मालगाड़ी माल भरकर आगे बढ़ती है तो सबसे पहले पड़ने वाले वे-ब्रिज स्टेशन पर उसका वे-मेंट कराया जाता है। इस दरमियान मालगाड़ी कॉसन आर्डर पर 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलवाई जाती है।

मामले में रिटायर्ड सीनियर सेक्शन इंजीनियर पीएन राय का कहना है कि ओवरलोड मालगाड़ी से भी पटरियों को नुकसान पहुंचता है। पटरियां टूटने का ये भी एक कारण है। वे-मेंट के बाद भी मालगाड़िया ओवरलोड चलाए जाने की कुछ शिकायतें भी हुई हैं। ओवरलोड मालगाड़ी पटरी पर चलती हैं इस बात से अफसरों का इनकार नहीं है लेकिन उनकी गति नियंत्रित कर कुछ ही किलोमीटर तक चलाई जाती है।

ओवरलोड मालगाड़ी नहीं चल रही
ओवरलोड मालगाड़ी कहीं भी नहीं चलाई जा रही है। हर साइडिंग में वे-ब्रिज लगे हुए हैं। वहां वे-मेंट होने पर जिस वैगन में माल अधिक होता है उसे खाली करा दिया जाता है। अगर कहीं पर वे ब्रिज नहीं है तो लोडिंग के बाद मालगाड़ी को अगले वे-ब्रिज वाले स्टेशन तक 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलाने की अनुमति दी जाती है।
-पुलकित सिंघल, सीनियर डीसीएम बिलासपुर मंडल

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