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  • When The Patient Was Found In Khaparganj, The People Of The Locality Started Crying Out Of Fear, After 210 Deaths In The District, Fearless Markets Were Roaming

काेरोना पहले और अब:खपरगंज में मरीज मिला था तो मोहल्ले के लोग डर से रोने लगे थे, जिले में 210 मौतों के बाद बेखौफ घूम रहे बाजारों में

बिलासपुर6 दिन पहले
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सकरी स्थित रामा लाइफ सिटी के मेन गेट के बाहर हुई थी नाकेबंदी।
  • मार्च में स्वास्थ्य कर्मियों से मकान खाली करवा लिए थे

सत्यवीर सिंह कुशवाह | कोरोना वायरस। इससे देश, राज्य, जिले, शहर व गांव अभी भी जूझ रहे हैं। लेकिन इसका अब वह डर नहीं रहा जो कोरोना के शुरुआती काल यानि कि मार्च में रहा। मार्च से लेकर अक्टूबर तक कोरोना को लेकर लोगों का नजरिया पूरी तरह से बदल गया। शुरुआती दौर जब 22 मार्च काे जनता कर्फ्यू लगा तथा 24 मार्च जब 21 दिन के लिए केंद्र सरकार ने देश को पहले लॉकडाउन में भेजा। तब जिस जगह पॉजिटिव मरीज मिलता था तो वहां के पूरे क्षेत्र को सील करके पहरा बैठा दिया जाता था। मकान मालिकों ने स्वास्थ्य कर्मियों से घर तक खाली करवा लिए। डॉक्टरों ने इस्तीफे दिए, कोई बाहरी व्यक्ति अंदर न आ सके इसलिए लोगों ने बैरिकेडिंग स्वयं के स्तर पर ही कर ली। यह स्थिति उस समय की है जब बिलासपुर में कोरोना का एक ही मरीज मिला था। मरीजों की संख्या सैंकड़ों में पहुंचने लगी तो स्थिति सामान्य सी हो गई। इसके पीछे जिम्मेदार डॉक्टर यह ही कह रहे हैं कि जब कोरोना शुरू हुआ तो देश लॉकडाउन हो गया था इसलिए सब भय में आ गए। लेकिन जब लॉकडाउन खुला तो स्थिति सामान्य होती चली गई।
डर इतना था कि यह किया लोगों ने: एक युवक ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैला दी कि तालापारा में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला है। सरकारी अमला वहां पहुंचा तो ऐसा कुछ नहीं था हां लोग जरूर दहशत में आ चुके थे। पुलिस ने युवक को खोजा और एफआईआर दर्ज की। शहर हो या गांव बाहर का कोई भी सीमा में प्रवेश न कर पाए इसलिए पहरा बैठा दिया और बैरीकेड लगवा दिए।

महिला के पॉजिटिव होने का पता चला तो पूरा मोहल्ला दहशत में आ गया था
यह बात है 12 अप्रैल के दोपहर की। खपरगंज में एक बुजुर्ग महिला के पॉजिटिव होने की बात पता चलते ही प्रशासन, नगर निगम, पुलिस व स्वास्थ्य विभाग का भारी-भरकम अमला वहां पहुंच गया। यह जिले में पॉजिटिव मरीज मिलने का दूसरा मामला था। पुलिस ने निगम के सहयोग से खपरगंज को चारों तरफ से बैरीकेड लगा कर सील कर दिया। वाहन से पूरे क्षेत्र को सेनिटाइजर किया गया। किसी को गली में अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। घर के छज्जों पर खड़े हुए लोग यह कहते हुए रो तक दिए कि अब उनका क्या होगा? माहौल ने बिगड़े इसलिए पुलिस को सभी को घर के अंदर रहने के निर्देश दिए। हालांकि शाम को जब महिला के दूसरे सैंपल की रिपोर्ट आई तो वह निगेटिव निकली। लेकिन इससे पहले महिला को क्वारेंटाइन सेंटर भेजा जा चुका था। पता चला कि कोटा की एक महिला का नाम इनसे हमनाम होने के कारण गलत स्थिति बनी।

कोरोना से पांच मरीजों की मौत
24 घंटे में जिले के हॉस्पिटलों में 5 कोविड संक्रमितों की मौत हुई है। इनमें दो बिलासपुर जिले के हैं तो वहीं 3 जांजगीर जिले के रहने वाले हैं। जिले में कोरोना से मरने वाले मरीजों की संख्या 210 हो गई है। रविवार को कोटा निवासी 37 वर्षीय ग्रामीण की मौत सिम्स में हुई है। विनोबा नगर निवासी 74 वर्षीय संक्रमित बुजुर्ग की मौत अपोलो में हुई है। कोविड हॉस्पिटल में जांजगीर के 75 वर्षीय ग्रामीण की मौत भी रविवार को हुई।

94 पॉजिटिव मिले, 30 में संक्रमण के लक्षण
जिले में कोरोना मरीजों की संख्या में रविवार को कुछ कमी आई। रविवार को 94 नए संक्रमित मरीजों की पहचान हुई है। जिसमें से 93 मरीज जिले के हैं तो एक मरीज मुंगेली जिले का रहने वाला है। इन्हें मिलाकर अब जिले में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 11003 हो गई है। शहरी क्षेत्रों से केवल 67 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जबकि जिले के चार ब्लॉक बिल्हा,कोटा,मस्तूरी और तखतपुर से 26 ग्रामीणों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिनमें केवल 30 मरीजों में ही कोविड के लक्षण मिले है। बाकी 64 मरीजों में कोरोना के कोई भी सिस्टम नही है। इन मरीजों में 54 पुरुष और 40 महिला मरीज है। जिनमें 6 साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग शामिल है। वहीं रविवार को 128 मरीज डिस्चार्ज हुए जिससे ठीक होने वालों की संख्या भी 9300 हो गई है। रविवार को भी अपोलो हॉस्पिटल की 24 वर्षीय डॉक्टर संक्रमित पाई गई है।

नर्स से मकान खाली करवा लिया
सिविल लाइन पुलिस थाना क्षेत्र में रहने वाले कांग्रेस पार्षद सीताराम जायसवाल ने उनके मकान में रहने वाली स्वास्थ्य कर्मी जो प्राइवेट नर्सिंग होम में काम करती थी उससे मकान खाली करवा लिया। अस्पताल संचालक से बात तक करवाई पर कांग्रेस पार्षद नहीं माने। पार्षद पर एफआईआर हुई थी। भारतीय नगर में रहने वाली एक अन्य स्वास्थ्य कर्मी से भी मकान मालिक ने घर खाली करवाया तो उन पर भी मामला दर्ज हुआ।

लोग जागरुक हुए हैं डर उतना ही है
"यह कहना गलत है कि लोग कोरोना से डर नहीं रहे। हां पहले की अपेक्षा अब सतर्कता ज्यादा बरत रहे हैं। सैंपल लेने की क्षमता बढ़ी है इसलिए मरीज भी ज्यादा सामने आ रहे हैं। शहर हो या गांव मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है और उनसे घर में ही रहने को कहा जा रहा है। हर घर में पुलिस या स्वास्थ्य कर्मी का पहरा नहीं बैठाया जा सकता।"
-डा. प्रमोद महाजन, सीएमएचओ, बिलासपुर

देशव्यापी लॉकडाउन था इसलिए ऐसा हुआ
"कोरोना के शुरुआती चक्र में देशव्यापी लॉकडाउन रहा। प्रशासन के साथ सभी विभाग प्रभावी कदम कोरोना को बढ़ने से रोकने के लिए उठा रहे थे। इससे लोगों को भी लगा कि अभी घर में ही रहना ठीक है। लॉकडाउन खुला और आर्थिक गतिविधियां प्रारंभ हुई तो लोगों को लगने लगा कि स्थिति सामान्य हो चुकी है।"
-डाॅ. रमणेश मूर्ति, डीन अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज।

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