दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों का बुरा हाल:आखिर कहां जाएं मरीज? जिला अस्पताल में दांतों का इलाज नहीं, सिम्स में एक्सरे मशीन बंद

बिलासपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

जिला अस्पताल में दांतों की साफ-सफाई नहीं हो पा रही है। यहां डेंटल चेयर मशीन तो है लेकिन उसे अफसरों ने अभी तक इसे चालू नहीं किया है। रोज मरीजों को बिना इलाज यहां से लौटना पड़ रहा है। अस्पताल में दांतों के दो डॉक्टर हैं।

एक डॉक्टर को एनएचएम के माध्यम से जिला अस्पताल बुलाया गया लेकिन वे सिर्फ टीकाकरण का काम देख रहे हैं। वहीं एक महिला डॉक्टर ओपीडी में मरीजों की समस्या सुनकर दवाइयां लिख रही हैं। जिन मरीजों को ज्यादा तकलीफ होती है, उन्हें यहां इलाज नहीं मिल रहा है, क्योंकि डेंटल चेयर मशीन अभी बंद है। कोरोना आने के बाद अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को कोविड हॉस्पिटल बना दिया।

जिला अस्पताल से मरीजों को सिम्स जाने दे रहे सलाह
जिला अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को सिम्स जाने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टर मरीजों से कहते हैं कि यहां सुविधाएं और संसाधन नहीं हैं इसलिए आप मेडिकल कॉलेज जाइए वहां आपको इलाज मिलेगा। बुधवार को भी दांतों का इलाज करवाए आए एक मरीज को यही कहा गया। डॉक्टरों उसे दूसरे अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी। जिला अस्पताल के डॉक्टर और नर्सों का रवैया ठीक नहीं है, इलाज तो बाद में वे मरीजों से ठीक से बात भी नहीं करते हैं। गरीबों को मजबूरी में यहां इलाज कराना पड़ रहा है।

शायद जानबूझकर सिम्स में चालू नहीं कर रहे डेंटल एक्सरे?
इधर सिम्स में डेंटल एक्सरे मशीन दो साल बाद भी चालू नहीं हो पाई। हर दिन 20 से ज्यादा मरीजों को एक्सरे कराने निजी सेंटरों पर जाना पड़ रहा है। डॉक्टर जांच करने के बाद एक्सरे तो लिख रहे हैं लेकिन मशीन को चालू नहीं कर रहे हैं। इस जांच में 450 रुपए खर्च होते हैं। सिम्स अधीक्षक डॉक्टर पुनीत भारद्वाज ने कई बार डेंटल विभाग को पत्र लिखकर कह दिया है कि डेंटल एक्सरे मशीन को जल्द से जल्द चालू की जाए लेकिन यहां के डॉक्टर मशीन को चालू नहीं कर रहे हैं। लोग तो ये तब कह रहे हैं कि यहां के डॉक्टरों का बाहरी दुकानों से कमीशन बंधा है इसलिए डेंटल एक्सरे को चालू नहीं किया जा रहा है।

खबरें और भी हैं...