95 साल की विधवा से सरकार की बेरुखी:पेंशन लेने हर तीसरे माह तय करती हैं 900 किमी दूरी, सिर्फ ये बताने कि मैं जिंदा हूं

​​​​​​​बिलासपुर2 महीने पहलेलेखक: आशीष दुबे
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली 95 साल की विधवा ललिता देवी को पेंशन के लिए हर तीसरे महीने 900 किमी की दूरी तय करनी होती है। उन्हें 6,000 रुपए पेंशन मिलती है। इसे पाने के लिए वे 20 सालों से बलिया (उत्तर प्रदेश) आना-जाना कर रही हैं। ललिता देवी सेकंड वर्ल्ड वॉर के सैनिक रहे रंजीत सिंह की पत्नी हैं।

वैसे तो वो बलिया में ही थीं, लेकिन पिछले दो दशक से बिलासपुर में हैं। बिलासपुर आने के बाद उन्हें हर तीसरे महीने जीवित होने का सबूत देने बलिया जाना पड़ रहा है। पहले उन्हें बेटे के साथ बलिया आने-जाने में ज्यादा दिक्कत नहीं थी, लेकिन पिछले 10 साल से सफर करने की हालत में नहीं हैं।

बेटे की आंख की भी 70% रोशनी जा चुकी है। इस वजह से वे पिछले कई साल से बिलासपुर के अफसरों को अर्जी देकर पेंशन बलिया से बिलासपुर शिफ्ट करवाना चाह रही हैं, लेकिन सुनवाई ही नहीं हो पाई है।

ससुर भी रह चुके हैं स्वतंत्रता सेनानी
ललिता देवी के पति तो वतन के लिए लड़े ही थे, उनके ससुर भी उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता सेनानी रह चुके हैं, इसलिए उन्हें यह मलाल भी है कि पति और ससुर, दोनों ने देश के लिए जीवन दिया पर बिहार और छत्तीसगढ़, दोनों ही राज्यों के अधिकारी उनकी अर्जी पर ध्यान नहीं दे रहे।

दो साल पहले उन्होंने बिलासपुर सैनिक कल्याण बोर्ड को आवेदन दिया कि उन्हें बलिया की जगह बिलासपुर से पेंशन मिल जाए। इसके बाद भी वहां से राहत नहीं मिल पाई।

ललिता के पति वर्ल्ड वॉर में 3 साल लड़े
ललिता देवी के पति रंजीत सिंह राजपूत रेजिमेंट के सैनिक थे। वे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में महलीपुर थाना इलाके के निवासी थे। रंजीत सिंह 1942 से 1945 तक दूसरे विश्व युद्ध की लड़ाई में रहे और सेना से रिटायर हुए। उनकी मृत्यु 2003 में हुई।

बेटा भी हो चुका रिटायर
ललिता देवी की बेटे आरके सिंह की उम्र भी 67 साल हो गई है। वे कृषि विभाग के रिटायर्ड अधिकारी हैं। आंखों से कम दिखाई देता है। घर में भी ऐसा कोई शख्स नहीं जो बलिया में ललिता देवी को रखकर दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर पेंशन बिलासपुर ट्रांसफर करवा सके। समस्या जानने के बाद यहां के अधिकारी मदद नहीं कर रहे हैं।

NOC के बाद ही कर सकेंगे मदद
बिलासपुर में सैनिक कल्याण बोर्ड के जिला अधिकारी कुलदीप सेंगर का कहना है कि ऐसे मामलों में पेंशनभोगी का रजिस्ट्रेशन जिस राज्य में है, वहां की NOC जरूरी है। दस्तावेज बलिया से ट्रांसफर होकर आए तो यहां से उनकी पेंशन शुरू करवा सकते हैं। नियम है कि हर 3 माह में पेंशनभोगी का फिजिकल वैरिफिकेशन जरूरी है। इसलिए उन्हें जाना पड़ रहा है, तब पैसे मिलते हैं।

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