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त्योहार:नवरात्रि के लिए समितियों ने तैयारी की शुरू, कराई जा रही साफ-सफाई

पटना/सोरगा8 महीने पहले
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वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर इस साल दुर्गा पूजा में पिछले साल की तरह व्यापक तरीके से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए पूजा पंडाल, कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होगा, लेकिन पूरे 9 दिनों तक माता दुर्गा जी की विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पटना, पाण्ड़वपारा, सोरगा, कटकोना क्षेत्र में पूजा-अर्चना की जाएगी। इसकी तैयारियां आयोजक समिति के पदाधिकारी करने में जुटे हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू हो रही है। पटना सहित क्षेत्र के कोयलांचल कटकोना और पाण्ड़वपारा क्षेत्र में दुर्गा पूजन की तैयारियां चल रही हैं। 17 अक्टूबर को कलश स्थापना और माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापना के साथ पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। पं. सुरेश कुमार मिश्रा ने बताया कि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त प्रातः बेला में होता है। अधिकांश जगहों पर इसी समय कलश स्थापित किए जाते हैं, लेकिन रात में 11.39 बजे तक प्रतिपदा तिथि है और उससे पहले कभी भी कलश स्थापना की जा सकती है। गौरतलब है कि इस साल भगवती दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रहा है, जिसका फल छात्रभंग योग बन रहा है। माता की विदाई भैंस पर होगी, जो शोक संताप देने वाला है।

जानिए... किस दिन किन देवी की होगी पूजा कार्यक्रम
कलश स्थापना के पहले दिन 17 अक्टूबर शनिवार को प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना होगी। 18 को द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी, 19 को तृतीय स्वरूप चंद्रघण्टा, 20 को चतुर्थ स्वरूप कुष्मांडा, 21 को पंचम स्वरूप स्कंदमाता, 22 को माता के छठे स्वरूप कात्यायनी की पूजा के साथ बिल्व आमंत्रण दिया जाएगा। 23 को सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा-अर्चना और रात में निशा पूजा होगी। 24 को अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना के साथ महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा, जबकि 25 को माता के नवम स्वरूप सिद्धीदात्री की पूजा-अर्चना के बाद हवन, कन्या पूजन और बलिदान कार्य संपन्न कराए जाएंगे। 26 अक्टूबर सोमवार को विजयादशमी (दशहरा) के दिन प्रातः बेला में कलश विसर्जन, अपराजिता पूजन और जयंती धारण के बाद प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहता है।

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