स्मृति शेष / मरवाहीवासियों को ‘कमिया’ की कमी खलेगी, ये फिक्र... अब उनकी कौन सुनेगा

Marwahwasi will miss the lack of 'Kamiya', they care ... now who will listen to them
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Marwahwasi will miss the lack of 'Kamiya', they care ... now who will listen to them

  • पूर्व सीएम अजीत अपने विस क्षेत्र मरवाही में कमिया के नाम से पहचाने जाते हैं, निधन की खबर से पैतृक गांव जोगी डोंगरी समेत पूरे जिले में शोक की लहर

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

पेण्ड्रा. पूर्व मुख्यमंत्री एवं मरवाही विस के विधायक अजीत जोगी का 74 वर्ष की उम्र में रायपुर के निजी अस्पताल में शुक्रवार को निधन हो गया। गंगा इमली का बीज जोगी के गले में अटक गया था। इसके कारण उन्हें 9 मई को अटैक आया था। जो अंततः उनकी मौत का कारण बन गया। जोगी की मौत से गौरेला पेण्ड्रा मरवाही जिले में शोक की लहर फैल गई है। मरवाही क्षेत्र में कमिया के नाम से पहचाने जाने वाले पूर्व सीएम अजीत जोगी अब नहीं रहे। अपनी विशिष्ट कार्यशैली के कारण वे मरवाही में कमिया के नाम से मशहूर थे। जिले का काम हो या प्रदेश का या देश के किसी भी कोने का। लोगों को अजीत पर विश्वास था कि उनके पास जाएंगे तो हमारा काम होगा। इसी कारण लोगों की भीड़ जोगी के पास लगते आई थी। अब क्षेत्र के लोग इस चिंता में है कि उनकी कौन सुनेगा।

प्राथमिक की पढ़ाई गौरेला और मैट्रिक की पेंड्रा में की
पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का जन्म 29 अप्रैल 1946 को पेण्ड्रारोड तहसील के ग्राम सारबहरा के जोगी डोंगरी में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा मिशन स्कूल गौरेला और मैट्रिक की पढ़ाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पेण्ड्रा से हुई थी। उसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई एमएसीटी कॉलेज भोपाल से की थी। इसके बाद आगे भी वह रुके नहीं।

विशिष्ट कार्यशैली के कारण मरवाही को बना लिया था गढ़ 
1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद अजीत जोगी के लिए तत्कालीन भाजपा विधायक रामदयाल उइके ने इस्तीफा देकर मरवाही की सीट खाली की थी। इसके बाद उप चुनाव में अजीत मरवाही से रिकॉर्ड मतों से जीत कर विधायक बने थे। उसके बाद मरवाही में उनकी विशिष्ट कार्यशैली के कारण मरवाही उनका गढ़ बन गया। मरवाही क्षेत्र में ही उनका पैतृक गांव जोगीसार है।

शिक्षा: राजनीति में आने के बाद की एलएलबी की पढ़ाई
1986 में इन्दौर कलेक्टर के पद से इस्तीफा देकर अजीत कांग्रेस की राजनीति से जुड़े और 2 बार राज्यसभा सांसद बने, कई संसदीय समितियों में रहे, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। 1998 में रायगढ़ से चुनाव लड़कर पहली बार लोकसभा पहुंचे उसके बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ गठन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ का पहला मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य मिला। अजीत जोगी राजनीति में आने के बाद एलएलबी की भी पढ़ाई किये तथा वे एलएलबी में भी गोल्ड मेडलिस्ट हैं।

जोगी के नाम 14 साल लगातार कलेक्टर रहने का कीर्तिमान
जोगी का 1968 में यूपीएससी में चयन हुआ। उसके दो साल बाद जोगी यूपीएससी में टॉपर रहे और आईएएस बने। भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद वे तत्कालीन मध्यप्रदेश के रायपुर, शहडोल, सीधी, इंदौर जिले में 14 साल तक लगातार कलेक्टर रहे जो कि देश में सबसे लंबे समय तक लगातार कलेक्टर के पद पर कार्य करने का कीर्तिमान अब तक कायम है।

जोगी की तरह टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट नेता कम ही होते हैं...
देश की राजनीति में अजीत जोगी की तरह इतनी योग्यता वाला नेता मिलना मुश्किल है। विलक्षण प्रतिभा के धनी अजीत जोगी आईएएस (टॉपर), आईपीएस, इंजीनियर (गोल्ड मेडलिस्ट) एलएलबी (गोल्ड मेडलिस्ट) थे।

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