मजबूरी / गर्भवती ने 50 दिन 2 मासूम के साथ भीख मांगकर किया गुजारा

Pregnant spent 50 days with 2 innocent begging
X
Pregnant spent 50 days with 2 innocent begging

  • लॉकडाउन में अमृतसर में फंसी रही, रामानुजगंज में युवाओं ने खिलाया खाना, कलेक्टर ने वाहन से एमपी बार्डर तक भेजा

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

रामानुजगंज. मध्यप्रदेश के सिंगरौली की गर्भवती वैष्णो देवी का दर्शन करने गई थी। वह दो मासूम बच्चों के साथ लॉकडाउन में अमृतसर में फंस गई। 50 दिन वहां भीख मांगकर गुजारा किया। जब प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेन चली तो वह जांजगीर चांपा पहुंची।
जहां से बस बुक कर झारखंड जा रहे मजदूरों के साथ वह भी एक हजार रुपए किराया देकर रामानुजगंज पहुंची। लगातार 24 घंटे से भूखे रहने से पेट में दर्द होने लगा। शनिवार सुबह 8 बजे बेटियों के साथ युवाओं द्वारा प्रवासी मजदूरों के लिए चलाए जा रहे लंगर में भोजन करने गई। जहां वह फफक कर रोने लगी। जब युवाओं ने पूछा तो महिला ने पूरी कहानी बताई। इस पर कलेक्टर ने उसे वाहन से एमपी बार्डर तक भिजवाया। सुनीता बसोर ने बताया कि वह पंजाब में फंसी थी। किसी तरह छत्तीसगढ़ आई और शुक्रवार शाम रामानुजगंज पहुंची। कलेक्टर झा ने गर्भवती के लिए वाहन की व्यवस्था कराई तो नगर पंचायत अध्यक्ष रमन अग्रवाल ने सैनिटाइजर व मास्क के साथ आर्थिक मदद की। वह वैष्णो देवी उत्तर प्रदेश के रिश्तेदारों के साथ गई थी। वापसी में अमृतसर पहुंचने के दौरान लॉकडाउन का एलान हो गया। वहां एक झोपड़ी किराए में लेकर 6 वर्ष की बेटी सुमन व 3 वर्ष की बेटी रागनी के साथ भीख मांग कर गुजारा करने लगी। जब अमृतसर से मजदूरों को लेकर  स्पेशल ट्रेन चली तो वह छत्तीसगढ़ के चांपा स्टेशन में पहुंची। रात भर रामानुजगंज में बंद पड़े आरटीओ नाका के पास स्थित पेड़ के नीचे  गुजारी। सुबह जब नगर के आशीष गुप्ता, प्रिंस गुप्ता, अनिल ठाकुर, भोला, जौली गुप्ता द्वारा भोजन दिया जा रहा था। तब गर्भवती भी बच्चों के साथ भोजन लेने आई। वह गांव तक पहुंचाने की गुजारिश करने लगी। तब मामला कलेक्टर तक पहुंचा था।
बस वाले एक हजार लेकर पहले ही उतार दिया था
महिला ने बताया कि जब वह बस में बैठी तब चालक ने उससे एक हजार ले लिए। उसके पास उतने पैसे ही थे। इसके बाद चालक ने उसे एमपी बार्डर चांदनी बिहारपुर तक छोड़ने कहा था, लेकिन रात में छत्तीसगढ़ झारखण्ड सीमा पर उतार दिया।
भूखे रहने से हो गया था पेट में दर्द शुरू
सुनीता ने बताया कि झारखंड से लेकर मजदूरों को लेकर जा रही बस में बहुत भीड़ थी। किसी प्रकार बच्चियों को लेकर रामानुजगंज तक पहुंची। शुक्रवार को खाना नहीं मिलने से पेट में दर्द हो रहा था। उसके पास 15 सौ रुपए थे जिसमें से 500 झोपड़ी किराया दिया। वहीं बस वाले ने एक हजार किराया ले लिया। वहीं जब वहां ज्यादा कड़ाई होती थी तो भीख भी नहीं मांग पाती थी। इससे भूखे ही बेटियों के साथ रात गुजारना पड़ता था।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना