वायरल फीवर का कहर:सूरजपुर जिला अस्पताल में 71 बच्चे भर्ती, एक बेड पर दो-दो मासूमों का इलाज, 11 को ऑक्सीजन पर रखा

अंबिकापुर/सूरजपुर4 महीने पहले
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सूरजपुर के जिला अस्पताल में बेड की कमी की वजह से दो बच्चों और उनकी मां को रखा, संक्रमण का बढा खतरा। - Dainik Bhaskar
सूरजपुर के जिला अस्पताल में बेड की कमी की वजह से दो बच्चों और उनकी मां को रखा, संक्रमण का बढा खतरा।
  • वायरल के म्यूटेंट व बैक्टीरियल इंफेक्शन का अंदेशा, सीमावर्ती इलाकों में जांच करेगी मेडिकल टीम

सूरजपुर जिले में भी बच्चों को वायरल फीवर व सर्दी-खांसी इस तरह जकड़ रहा है कि ठीक होने में दस दिन से अधिक समय लग रहा है। इससे पहले बच्चे अधिकतम पांच से छह दिन में स्वास्थ्य हो जाते थे। इससे सूरजपुर के 50 बेड वाले शिशु वार्ड में 71 बच्चों को भर्ती किया जा चुका है। जगह की कमी के कारण एक बिस्तर पर दो बच्चों को भर्ती किया गया है। इनमें से ज्यादा गंभीर 11 बच्चों को ऑक्सीजन पर रखा है।

क्षमता से अधिक बेड बच्चों के भर्ती होने से शिशु वार्ड में पांव रखने तक की जगह नहीं है। मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ वायरल म्यूटेंट के साथ बैक्टीरियल इंफेक्शन का अंदेशा लगा रहे हैं। जल्द ही मेडिकल काॅलेज से जिले के सीमावर्ती इलाकों की स्थिति जानने टीम भेजने की तैयारी है। वायरल फीवर की जांच व हालत का जायजा लेने अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज से डाॅक्टरों की टीम बनाई जा रही है, ताकि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बच्चों के इलाज के लिए व्यवस्था बना सकें। सूरजपुर जिला अस्पताल में 50 बेड वाले शिशु वार्ड में 71 बच्चे भर्ती हैं। इनमें 11 बच्चों को ऑक्सीजन में रखा है। इनमें 19 बच्चे ऐसे हैं, जिनकी उम्र एक माह से कम है। ओपीडी में भी रोजाना औसत 120 से ज्यादा बच्चे पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले बच्चों का कोविड-19 टेस्ट किया जा रहा है। इनकी रिपोर्ट भी नेगेटिव आ रही है। बच्चों के बीमार होने की बढ़ती संख्या को देखकर वार्ड के अलावा बाहर बरामदे में भी अतिरिक्त बेड लगाए गए हैं।

संक्रमण का खतरा: पांच नवजात आॅक्सीजन पर एक बेड पर दो बच्चे और उनकी मां को रखा गया
शिशु वार्ड में भर्ती 71 बच्चों में से 19 एक माह से कम उम्र के हैं। इसमें से 5 बच्चों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। इसकी वजह से डॉक्टरों ने इन्हें ऑक्सीजन पर रखा है। नवजात शिशुओं के साथ उनकी मां भी वार्ड में है। एक बेड पर दो बच्चे और उनकी माताओं के होने के कारण वार्ड में संक्रमण का खतरा भी 24 घंटे बना हुआ है।

बेड की कमी: सांस लेने में परेशानी अधिक, दूसरे डॉक्टर भी ऐसे मरीजों को भेज रहे जिला अस्पताल
जिला अस्पताल के शिशु रोग के डॉ. अजय मरकाम ने कहा अस्पताल में पिछले साल की अपेक्षा अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं। सांस लेने में दिक्कत की समस्या आते ही वे अस्पताल आ रहे हैं। इससे उनका ट्रीटमेंट समय पर कर रहे हैं। बीमार बच्चों की संख्या अधिक होने से बेड़ की कमी तो है, लेकिन इलाज कर रहे हैं। वहीं सांस लेने की शिकायत पर दूसरे डॉक्टर भी जिला अस्पताल भेज रहे हैं।

डीन ने कहा- वायरल अटैक और बैक्टीरियल इंफेक्शन
अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज के डीन डॉ. आर मूर्ति का कहना है कि बच्चों में एक से अधिक वायरल अटैक कर रहा होगा या फिर साथ में बैक्टीरियल इंफेक्शन होगा। ऐसा इसलिए भी क्योंकि, बच्चों के बीमार होने पर हार्ट में दिक्कत व सांस लेने सबंधी समस्या आ रही है। जो स्थिति है, उसे देखकर इस बात की भी आशंका है कि वायरल का वायरस म्यूटेंट हो सकता है। इसके लिए मेडिकल काॅलेज के डाक्टरों की टीम बना रहे हैं।

कोविड टेस्ट निगेटिव, लेकिन ठीक होने में लग रहा समय
सूरजपुर जिले के सीएमएचओ डॉ. आरएस सिंह ने कहा कि जो भी बीमार बच्चे आ रहे हैं। उनकी कोविड जांच की जा रही है। सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। बच्चों में पहले वायरल फीवर तीन से पांच दिन में ठीक हो जाता था, लेकिन अब सात से दस दिन तक का समय लग रहा है। इसके पीछे का कारण पता लगाने के लिए अब तक कोई काम नहीं हुए हैं। पूरी टीम अभी बच्चों के इलाज पर फोकस कर रही है।

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