तुरंत कंपलेन के फायदे:साइबर फ्रॉड के 21 मामलों में 15 लाख लौटाए, क्योंकि 24 घंटे के अंदर शिकायत

भिलाई7 दिन पहले
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सायबर ठगी के शिकार 21 पीड़ितों को पुलिस ने बीते 8 महीने में 15 लाख रुपए वापस दिलाए हैं। - Dainik Bhaskar
सायबर ठगी के शिकार 21 पीड़ितों को पुलिस ने बीते 8 महीने में 15 लाख रुपए वापस दिलाए हैं।

सायबर ठगी के शिकार 21 पीड़ितों को पुलिस ने बीते 8 महीने में 15 लाख रुपए वापस दिलाए हैं। ये इसलिए हो पाया क्योंकि पीड़ितों ने ठगी का शिकार होने के 24 घंटे के अंदर टोल फ्री नंबर 1930, ऑनलाइन पोर्टल और पुलिस से संपर्क कर लिया था। केंद्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल और टोल फ्री नंबर पर शिकायत होने से एक साथ बैंक, यूपीआई और ऑनलाइन वॉलेट को ठगी की राशि का पता चल जाता है। इससे साइबर फ्रॉड की राशि को ब्लॉक कर दिया जाता है।

इसके बाद 30 से 45 दिन के अंदर पीड़ित को पैसा वापस मिल पाता है। पैसा वापस होने का एक सबसे बड़ा कारण है कि ठगी की जानकारी सही समय पर जांच एजेंसियों को मिल जाती है। इससे ठगी का पैसा पूरी तरह निकालने के पहले ब्लॉक करवा दिया जाता है। लेकिन ठगी का देरी से पता चलने और अकाउंट से पैसा निकल जाने पर कार्रवाई नहीं हो पाती। फ्राड के लिए फर्जी नंबर का उपयोग होता है।

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सही समय में शिकायत मिलने पर सक्रिय हो जाती है साइबर टीम

  • ठगी का पता चलने के 24 घंटे के अंदर पुलिस को करें शिकायत।
  • टोल फ्री नंबर, स्थानीय पुलिस और केंद्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर करें शिकायत।
  • बैंक और ऑनलाइन वॉलेट में पैसा जमा होने पर लौटेंगे पैसे।
  • शिकायत करने पर केंद्र की एजेंसी एक साथ बैंक,यूपीआई और ऑनलाइन वॉलेट को भेजती है जानकारी।
  • सही समय पर जानकारी साझा करने की वजह से ठगी की राशि हो जाती ब्लॉक।

आरबीआई : 1 लाख से कम ट्रांजेक्शन, बैंक लौटाए रकम
पुलिस के मुताबिक आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक साइबर फ्राड की राशि 1 लाख से कम होने पर केस दर्ज करने की जरुरत नहीं होती है। अगर समय पर जानकारी मिल जाए तो ये पैसा ब्लॉक करवा कर बैंक पीड़ित के खाते में पैसा वापस लौटा सकती है। पुलिस के मुताबिक अगर पीड़ित सही समय पर ठगी होने पर सूचना दें तो पैसा लौटाने की संभावनाएं ज्यादा रहती है। पुलिस 1 लाख से कम के मामले में केस दर्ज नहीं करती है।

ठगी का पता देरी से चलने पर पैसा लौटने की संभावनाएं नहीं
पुलिस के मुताबिक साइबर फ्राड का पता 72 घंटे बाद पता चलने पर ठगी की राशि वापस दिलाना संभव नहीं हो पाता है। उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ठग बैंक, यूपीआई और ऑनलाइन वॉलेट के जरिए धोखाधड़ी की राशि का ट्रांजिक्शन करते है। इसके बाद ठग इस राशि का उपयोग या तो खरीददारी में कर लेते है या फिर फिजिकली पैसा निकाल लेते हैं। ऐसे में पीड़ितों को पैसा वापस नहीं मिल पाता है। यूपीआई से ट्रांजिक्शन डिटेल मिलने में भी समय लगता है।

ऑनलाइन ट्रांसफर के मामले की जांच में लगता है समय
पुलिस के मुताबिक ठगी होने पर बाकी एजेंसियों से जानकारी मिलने में कई बार 1 महीने का वक्त लग जाता है। इस वजह से ऑनलाइन ठगी के मामलों में जांच में समय लग जाता है। यूपीआई ट्रांजिक्शन की जानकारी के लिए एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) से जानकारी लेना पड़ता है। इसमें वक्त लग जाता है । कई बार पीड़ित को लगता है कि ठग के वॉलेट में पैसा जमा होगा, लेकिन पैसों का उपयोग हो जाता है।

8 महीने में 21 पीड़ितों की रकम लौटाई गई
बीते 8 महीने में पुलिस ने 21 पीड़ितों के 15 लाख रुपए वापस दिलवाए हैं। पैसा वापस होने का सबसे बड़ा कारण ठगी का सही समय पर पता चलना है। पीड़ितो को कई बार ठगी का पता देरी से चलता है। इस वजह से पीड़ित समय पर सूचना नहीं दे पाते है। ठगी होने पर टोल फ्री नंबर और केंद्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं। -नसर सिद्दिकी, डीएसपी क्राइम ब्रांच दुर्ग

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