भागवत कथा:दूसरों की रक्षा के लिए बोला गया असत्य पाप नहीं होता: संत निरंजन

दुर्ग7 दिन पहले
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दुर्ग जिला देवांगन समाज द्वारा मां परमेश्वरी आश्रम, बघेरा में आयोजित सार्वजनिक श्रीमद्भागवद महापुराण कथा सप्ताह के छठवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया।

पूतना वध, बाल लीला, माखन चोरी प्रसंग पर संत निरंजन महाराज ने कहा कि दूसरे के प्राण की रक्षा के लिए असत्य बोलने से पाप नहीं होता है। हर युग में मनुष्यों को सत्कर्म में प्रेरित करने के लिए और धर्म-कर्म के पालन के साथ संसार कर्तव्यमय हो इसलिए भगवान अवतार लेते हैं। हर वर्ष फीट-फीट बढ़ने वाला मनुष्य सत्कर्म करने पर मन से भी फिट रहता है। कथा के दौरान जिलाध्यक्ष पुराणिक राम देवांगन व सदस्य उपस्थित थे।

भगवान काे पाने के लिए भक्ति व प्रेम ही मार्ग है: गोपिकेश्वरी​​​​​​​
दुर्गा मंदिर परिसर एचएससीएल कालोनी स्टेशन मरोदा में चल रहे दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन के आठवें दिन गोपिकेश्वरी देवी ने कहा कि आज संसार में सैकड़ों मार्ग चल रहे हैं। लेकिन भगवान को प्राप्त करने के लेकिन कौन सा मार्ग सही है? किस पर चलकर जीव अपना जल्दी कल्याण कर सकता है, इन सब प्रश्नों का समाधान है कि भगवान ने तो पुराणों में केवल एक ही मार्ग बताया है उनको पाने का।

पुराणों में स्वयं भगवान कहते हैं जितने भी मार्ग आज संसार में बड़े से बड़े चल रहे हैं या आगे भी चलेंगे वो ज्यादा से स्वर्ग या मुक्ति की प्राप्ति करवा सकते हैं, लेकिन उनमें से किसी भी मार्ग पर चल कर मेरे को, मेरे प्रेम को कोई भी जीव प्राप्त नहीं कर सकता।

भगवान को प्राप्त करने का तो केवल एक ही मार्ग है और वो है भक्ति मार्ग, प्रेम मार्ग। प्रेम मार्ग पर चर्चा करते हुए देवी ने बताया कि भक्ति मार्ग अत्यंत सरल मार्ग है जो किसी नियम की अपेक्षा नहीं रखता। हर कोई भगवान की भक्ति कर सकता है, हर स्थान पर, हर समय, हर क्रिया में, हर कर्म में भगवान की भक्ति कर सकता। ये भक्ति 10 प्रकार की होती है।

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