गणतंत्र दिवस विशेष:संस्कारवान पीढ़ी गढ़ने के साथ संवैधानिक अधिकार, देश प्रेम का भी पाठ पढ़ा रहे

दुर्ग10 दिन पहले
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जिला मुख्यालय से महज आठ किमी दूर ग्राम पिसेगांव में हर रविवार को लगने वाले बाल संस्कार शाला में चरित्रवान व संस्कारवान पीढ़ी गढ़ने के साथ-साथ देश प्रेम का भी पाठ पढ़ाया जाता है। आठ-दस साल के ये बच्चे संविधान में दिए गए नागरिक दायित्वों और मौलिक कर्तव्यों के बारे में बखूबी जानते हैं। उन्हें यह अच्छे से पता है कि देश व समाज हित में क्या करना है और क्या नहीं करना है। तभी तो राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करते हुए उन्हें देखा जा सकता है।

कान में जन, गण, मण... सुनाई देते ही, वे कहीं भी हो तुरंत सावधान के मुद्रा में खड़े हो जाते हैं। प्राकृतिक पर्यावरण, वन, झील, नदी और वन्य जीवों के संरक्षण, संवर्धन तथा प्राणीमात्र के प्रति दया भाव उनमें कूट-कूटकर भरी हुई है। इसके लिए गांव मे नदी किनारे करीब ढाई एकड़ में पौधरोपण में उनकी नियमित सहभागिता है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते ये बच्चे नहीं देख सकते। चाहे कोई भी हो, वे तुरंत टोक देते हैं। सामजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व ये बच्चे जानते हैं। विविध पर्व त्योहार और जन्म दिन वे भारतीय परंपरा के अनुरूप मनाते हैं। संविधान की जानकारी भी देते हैं।

बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने 20 गांवों में चल रहा जागरूकता अभियान
आध्यात्मिक व नैतिक शिक्षा के साथ - साथ अभी से देशहित में समर्पण का भाव जगाने और उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखने महापुरुषों की जीवनी और उनके प्रेरणास्पद संस्मरण सुनते-सुनाते रहते हैं। भारत के ये भावी नागरिक विचारों और संस्कारों से समृद्ध रहे, इसलिए उन्हें खेल-खेल में और रोचक तरीके से जीवन जीने की कला भी सिखाई जाती है।

बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने 20 गांवों में चल रहा जागरूकता अभियान
पिसेगांव की तरह ही दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में उनका यह अभियान जारी है। यहां बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास के साथ ही समाज और देशहित के लिए सदैव तत्पर रहने की सीख बच्चों को दी जाती है। यह बाल संस्कार शाला सप्ताह में केवल एक दिन रविवार को 2 घंटे लगती है, लेकिन इसके परिणाम बेहद सुखद और सकारात्मक हैं। यहां बच्चों को प्रार्थना, वंदना, सदवाक्य चिंतन-मनन, प्रेरणास्पद कहानी, भाव भरे गीत, योगाभ्यास, प्राणायाम सतसंकल्प पाठ, जयघोष आदि का अभ्यास कराया जाता है।

बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने 20 गांवों में चल रहा जागरूकता अभियान
पिसेगांव की तरह ही दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में उनका यह अभियान जारी है। यहां बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास के साथ ही समाज और देशहित के लिए सदैव तत्पर रहने की सीख बच्चों को दी जाती है। यह बाल संस्कार शाला सप्ताह में केवल एक दिन रविवार को 2 घंटे लगती है, लेकिन इसके परिणाम बेहद सुखद और सकारात्मक हैं। यहां बच्चों को प्रार्थना, वंदना, सदवाक्य चिंतन-मनन, प्रेरणास्पद कहानी, भाव भरे गीत, योगाभ्यास, प्राणायाम सतसंकल्प पाठ, जयघोष आदि का अभ्यास कराया जाता है।

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