दुर्ग जिले का रिजल्ट:12वीं में बीते वर्ष 98.73% सफल थे तो इस बार 78.46 फीसदी 10वीं में 99.42% सफल छात्रों का आंकड़ा 68.80% रह गया

भिलाई9 दिन पहले
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बीते साल 90% से ऊपर बच्चे प्रथम श्रेणी में, इस बार इनकी संख्या आधे से भी कम हो गई - Dainik Bhaskar
बीते साल 90% से ऊपर बच्चे प्रथम श्रेणी में, इस बार इनकी संख्या आधे से भी कम हो गई

शनिवार को छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के 10वीं और 12वीं कक्षा के नतीजे घोषित हो गए। पिछले दो साल के नतीजे और इस बार के नतीजे ने ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षा की स्थिति स्पष्ट कर दी है। दुर्ग जिले में देखें तो साल 2021 में हुई ऑनलाइन परीक्षा और इस बार हुई ऑफलाइन परीक्षा में 10वीं के नतीजे में 30 फीसदी से अधिक और 12वीं के नतीजे में 20 फीसदी से अधिक गिरावट आई है।

12वीं में जहां बीते वर्ष 98.73 सफल रहे तो इस बार 78.46 फीसदी परिणाम आया। वहीं 10वीं में बीते वर्ष 99.42 छात्र सफल हुए थे तो इस बार 68.80 छात्र ही सफल हो पाए। यही दोनों कक्षाएं छात्रों का भविष्य तय करती हैं। पढ़ाई हो या परीक्षा दोनों ऑफलाइन हो। तभी गुणवत्ता कायम रहेगी और मेनुपुलेशन नहीं होगा। ऑनलाइन परीक्षा में लर्निंग लॉस भी हुआ है। इसलिए ऑनलाइन परीक्षा एक विकल्प हो सकता है, लेकिन स्थायी नहीं। ऑनलाइन पढ़ाई और परीक्षा तात्कालिक व्यवस्था थी। फेस-टू-फेस इंटरेक्शन नहीं होता।

कॉलेज एडमिशन: कटऑफ मार्क्स घटेगा

  • 10वीं के छात्र:- अपने मनपसंद विषयों का चयन करेंगे। उसके अनुसार आगे बढ़ेंगे। जिसमें रूचि हो, वही विषय लें।
  • 12वीं के छात्र:- कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और प्रोफेशनल कोर्स का द्वार खुलेगा। यही से भविष्य तय कर पाएंगे।
  • कट ऑफ मार्क्स :- पिछले साल की तुलना में इस बार परिणाम 20 से 30 फीसदी कम आया है। इसकी वजह से कट ऑफ मार्क्स में कमी आना तय है।

बेटियां आगे:10वीं में 13.76 व 12वीं में 10.32% ज्यादा छात्राएं हुईं सफल
10वीं व 12वीं की परीक्षा में बालकों की तुलना में बालिकाओं की संख्या अधिक रही। उनके नतीजे भी बेहतर आए। 10वीं की परीक्षा में सफल होने वाले बालकों का प्रतिशत 61.52 रहा तो बालिकाओं का प्रतिशत 75.28 रहा। इसी तरह 12वीं की परीक्षा में सफल बालकों का प्रतिशत 71.74 रहा तो बालिकाओं का प्रतिशत 82.06 फीसदी रहा। इस बार भी बेटियां आगे रहीं।

ये हैं हमारे जिले से टॉपर
10वीं: पिता को खोया तो सरकारी स्कूल में प्रवेश लेकर टॉपर
स्टेट में 8वां स्थान: पिछले साल कोरोना में पिता को खोया तब आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। कापी-किताब, इंटरनेट की समस्या बनी रही। आय का साधन खेती-किसानी ही है। फीस देने के पैसे नहीं थे। तब सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। मां गंगोत्री ने ही खेती कर पढ़ाई कराई। हर दिन 6-7 घंटे पढ़ाई की। टाइम टेबल बनाकर पढ़ा। ट्यूशन नहीं गया। सभी ने हौसला बढ़ाया।

इंटरनेट से मदद, मॉडल बनाकर प्रैक्टिस, रोज 6 घंटे पढ़ाई
स्टेट में 10वां स्थान: वीडियो और सोशल मीडिया से परीक्षा की तैयारी की। हर दिन 6-8 घंटे पढ़ाई की। बड़े भाई ने लगातार मार्गदर्शन दिया। परीक्षा की तैयारी में मॉडल प्रश्न पत्र का फायदा हुआ। पढ़ाई का तनाव दूर करने के लिए शतरंज और मम्मी के साथ बैडमिंटन खेला। मेरा लक्ष्य राकेट साइंटिस्ट बनना है। मेरी मां शकुंतला साहू, पिता एनके साहू दोनों शिक्षक हैं।

12 वीं: विषयों को रटने के बजाए कंसेप्ट समझने पर फोकस
स्टेट में 10वां स्थान: घर पर स्मार्ट मोबाइल भी नहीं था। शुरू से ही इंटरनेट से पढ़ाई करने में काफी दिक्कत हुई। हालात ऐसे थे कि मैं ट्यूशन भी नहीं जा पाता, तब मेरे पिता ने ही मेरा हौसला बढ़ाया। परीक्षा की तैयारी कराई। पिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन में विषयों को रटने के बजाय कांसेप्ट पर ध्यान दिया। रोज 6 घंटे पढ़ाई को टाइम शेड्यूल तय किया।

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