दुर्ग के किसानों का संकट:सरकारी समितियों में न तो खाद, न ही बीज, प्रबंधक बोले-आएगा तो देंगे; कर्ज में डूबने का संकट

भिलाई7 महीने पहले
खाद बीच लेने समिति पहुंचे किसान

दुर्ग में भी मानसून ने दस्तक दे दी है। बोनी का समय आ गया, लेकिन अब तक किसान को खाद और धान का बीज नहीं मिल पा रहा है। दुर्ग जिले में अन्नदाता अब अपनी फसल के पिछड़ने की चिंता से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि समितियों में खाद और धान के बीज का स्टॉक नहीं है। अब तक उनके खेत में धान का थरहा लग जाना था। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें तीन से चार दिन में धान का बीज नहीं मिला तो उनकी फसल पिछड़ जाएगी। यदि ऐसा हुआ तो फसल अच्छी नहीं होगी और वह कर्ज में डूब जाएंगे।

खाद और बीज की डिमांड में बैठे किसान
खाद और बीज की डिमांड में बैठे किसान

सेवा सहकारी समिति मर्यादित भिलाई 3 धान का बीज और खाद लेने पहुंचे पचपेड़ी के किसान अश्वनी धनकर ने बताया कि समितियों में खाद और बीज नहीं है। किसान डिमांड कर रहे हैं, लेकिन समिति प्रबंधक आज आएगा कल आएगा का बहाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ के किसी भी सोसाइटी में खाद और धान का बीज नहीं है।

पचपेड़ी से आए गोपाल कृपाल का कहना है कि डीएपी नहीं है। धान का बीज नहीं दिया जा रहा है। अगर तीन से चार दिन में धान का बीज नहीं मिला तो बोनी पिछड़ जाएगी। इससे पैदावार और फसल दोनों में दिक्कत होगी। वहीं नियारी के किसान सुरेंद्र कुमार का कहना है कि धान का कोई भी बीज समितियों में नहीं है। समिति प्रबंधक का कहना है कि पत्र लिखा गया है। आएगा तो देंगे। कई किसान इस बात से परेशान हैं कि उन्होंने खेती के लिए कर्जा ले रखा है। यदि वह समय पर नहीं हुआ तो उनके सामने नया संकट खड़ा हो जाएगा।

डिमांड के मुताबिक बीज नहीं मिला

इस बारे में कृषि विभाग दुर्ग के उप संचालक एसएस राजपूत का कहना है कि उन्होंने किसानों को डीएपी उपलब्ध कराने के लिए मार्कफेड को पत्र लिखा है। किसानों में स्वर्णा धान की काफी अधिक डिमांड है। हमने डिमांड भेजी थी तो 250 क्विंटल बीज मिला है, लेकिन यह डिमांड के मुताबिक काफी कम है।

खेत में उगने लगी धान की फसल
खेत में उगने लगी धान की फसल

1.23 लाख हेक्टेयर में धान की फसल का लक्ष्य

राज्य सरकार के आंकड़ों की बात करें तो इस साल 1 लाख 23 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बोनी का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कृषि विभाग ने मार्कफेड और बीज विकास निगम के माध्यम से जिले की 86सहकारी समितियों में खाद व बीज का भंडारण कराया गया है। मानसून के आते ही किसानों ने धान की बोनी शुरू कर दी है। इतना इंतजाम होने के बाद भी अन्नदाता को खाद और बीज के संकट का सामना करना पड़ रहा है।

37700 मीट्रिक टन खाद के भंडारण का लक्ष्य

जिले में खरीफ की फसल के लिए कुल 37 हजार 700 मीट्रिक टन खाद के भंडारण का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 15 हजार 800 मीट्रिक टन यूरिया, 7400 मीट्रिक टन सुपर फास्फेट, 9300 मीट्रिक टन डीएपी, 1600 मीट्रिक टन इफ्को और 3600 मीट्रिक टन पोटाश शामिल है।

जाने कितना हुआ भंडारण और वितरण

दिए गए लक्ष्य के अनुपात में भंडारित किए गए 13074 मीट्रिक टन यूरिया खाद में से 10192 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है। इसी तरह 2975 मीट्रिक टन फास्फेट में से 2525 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका। 4917 मीट्रिक टन डीएपी में से 4722 मीट्रिक टन का उठाव हो चुका है। वर्तमान में मात्र 145 मीट्रिक टन डीएपी खाद ही शेष बची है।

जिले की 86 में मात्र 20 समितियों में ही है स्टॉक

बोनी के समय में किसानों में खाद और बीज की भारी डिमांड है। ऐसे में जिले की 86 में से मात्र 20 समितियों में ही डीएपी का स्टॉक है। इससे किसानों को किसानी छोड़कर बार-बार समितियों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।

किसानों में स्वर्णा धान की सबसे अधिक डिमांड

किसानों के मुताबिक समितियों से उन्हें स्वर्णा धान का बीज नहीं मिल पा रहा है। फसल पिछड़े न इसके लिए वह 1001, 1010, मौखरी, आईआर 36, महामाया, राजेश्वरी, क्रांति जैसे दूसरे धान के बीच की मांग कर रहे हैं, लेकिन समिति में किसी भी किस्म के धान का बीज नहीं है।