आज से व्यवस्था लागू:अब ठेका श्रमिकों के अटेंडेंस में नहीं की जा सकेगी गड़बड़ी, 24 घंटे के बाद सिस्टम हो जाएगा लॉक

भिलाई18 दिन पहले
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अटेंडेंस के सिस्टम में बदलाव के बाद यह  चर्चा भी शुरू हो गई है कि प्रबंधन अब  जल्द ही नियमित कर्मियों के साथ ही ठेका  श्रमिकों के लिए बायोमैट्रिक्स सिस्टम लागू  कर सकता है। - Dainik Bhaskar
अटेंडेंस के सिस्टम में बदलाव के बाद यह  चर्चा भी शुरू हो गई है कि प्रबंधन अब  जल्द ही नियमित कर्मियों के साथ ही ठेका  श्रमिकों के लिए बायोमैट्रिक्स सिस्टम लागू  कर सकता है।

बीएसपी में काम कर रहे करीब 22 हजार ठेका श्रमिकों के लिए राहत भरी खबर है। अब उनके अटेंडेंस में गड़बड़ी नहीं की जा सकेगी। क्योंकि प्रबंधन ने इस काम के लिए 24 घंटे का समय निर्धारित कर दिया है। इसके बाद सिस्टम लॉक हो जाएगा। बीएसपी में हर साल बड़ी संख्या में नियमित कर्मचारी रिटायर होते जा रहे हैं। मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए प्रबंधन एक-एक कर प्लांट के कई हिस्सों को आउट सोर्स पर देता जा रहा है। यही वजह है कि वर्तमान में नियमित कर्मचारी से अधिक ठेका श्रमिक हो गए हैं।

नियमित कर्मियों की संख्या करीब 17 हजार है। वहीं वर्तमान में करीब 22 हजार ठेका श्रमिक कार्य कर रहे हैं। इतना ही नहीं कई विभागों में जहां नियमित कर्मियों से ही काम लिया जाना है वहां भी ठेका श्रमिकों को ड्यूटी पर लगा दिया गया है। लेकिन उनकी हमेशा से ही अटेंडेंस को लेकर शिकायत रही है। ठेका श्रमिकों का कहना है कि पूरे महीने काम करने के बाद भी ठेकेदार कम दिनों का उपस्थिति बताता था ताकि उसे कम पारिश्रमिक का भुगतान करना पड़े। उनका आरोप है कि इस काम को बिना आपरेटिंग अथारिटी के साथ मिलकर अंजाम दिया जाना संभव नहीं है।

22 हजार ठेका श्रमिकों को अटेंडेंस के हिसाब से मिलेगा पूरा वेतन

श्रमिकों के अटेंडेंस में हो रही थी गड़बड़ी को प्रबंधन ने भी माना
ठेका श्रमिकों की अटेंडेंस में हो रही गड़बड़ी की शिकायत उच्च प्रबंधन तक पहुंची। जिसकी जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट जब प्रबंधन के समक्ष पहुंची तो उसमें भी ठेका श्रमिकों की शिकायत को सही पाया गया। जिसके बाद प्रबंधन ने कांट्रैक्ट लेबर मेंटेनेंस सिस्टम (सीएलएमएस) बदलने का निर्देश दिया। इस पर कांट्रैक्ट सेल सक्रिय हुआ और सीएंडआईटी को एेसा सिस्टम डेवलप करने कहा जिसमें ड्यूटी के दूसरे दिन अटेंडेंस रिकार्ड फीड किए जाने के बाद सिस्टम लॉक हो जाए।

महीने के अंत में फीड किया जा रहा था उपस्थिति का डाटा
अब तक आपरेटिंग अथारिटी महीने के अंत में एक साथ अटेंडेंस डाटा को फीड करते थे। इससे काम बढ़ जाता था और गड़बड़ी की संभावना बनी रहती थी। यदि इसी काम को डे टू डे किया जाएगा तो उसमें गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम रह जाएगी। वहीं ठेकेदार भी अफसरों के साथ मिलकर अटेंडेंस में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकेंगे। नतीजा ठेका श्रमिकों को ड्यूटी के हिसाब से पारिश्रमिक भुगतान मिलने लगेगा। जिसकी वे लंबे समय से मांग कर रहे हैं।

बीएसपी में बायोमैट्रिक्स सिस्टम लागू करने हो गई है तैयारी
अटेंडेंस के सिस्टम में बदलाव के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि प्रबंधन अब जल्द ही नियमित कर्मियों के साथ ही ठेका श्रमिकों के लिए बायोमैट्रिक्स सिस्टम लागू कर सकता है। हालांकि प्लांट में नियमित कर्मियों को ही अब तक इसके दायरे में नहीं लाया गया है। प्लांट के बाहर के विभागों में ही यह व्यवस्था लागू है। नियमित कर्मी जहां इस सिस्टम का विरोध कर रहे हैं, वहीं ठेका श्रमिक यह सिस्टम उन पर जल्द लागू किए जाने का इंतजार कर रहे हैं ताकि अटेंडेंस से जुड़ी बाकी गड़बडिय़ों से भी निजात मिल सके।

आज से लागू होगा अटेंडेंस का नया सिस्टम
कांट्रैक्ट सेल के निर्देश पर सीएंडआईटी ने सीएलएमएस में एेसा बदलाव किया है कि ठेका श्रमिक के ड्यूटी करने के 24 घंटे के भीतर आपरेटिंग अथारिटी को उनका अटेंडेंस डाटा सिस्टम में फीड करना होगा। इस अवधि में डाटा फीड नहीं किया गया तो सिस्टम लॉक हो जाएगा। इसके बाद उस रिकार्ड में किसी भी तरह का करेक्शन संभव नहीं रह जाएगा। साथ ही प्रबंधन को भी इस बात की जानकारी हो जाएगी कि किस दिन प्लांट में कितने ठेका श्रमिकों ने काम किया।

17 हजार ठेका श्रमिकों का अटेंडेंस पेंडिंग
ठेका श्रमिकों का अटेंडेंस डाटा फीड किए जाने में लेटलतीफी का ही नतीजा था कि 17 सितंबर की स्थिति में 17 हजार ठेका श्रमिकों की हाजिरी नहीं लग पाई थी। अब जबकि प्रबंधन 19 सितंबर से नया सिस्टम लागू करने जा रहा है, पुराने अटेंडेंस से जुड़े पेंडिंग मामलों का तत्काल निपटाने कहा है। अन्यथा 17 हजार ठेका श्रमिकों का 18 दिनों का अटेंडेंस अबसेंट हो जाएगा और आपरेटिंग अथारिटी की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतान पड़ सकता है।

जानिए... ठेकेदार इसलिए चाहते हैं ठेका श्रमिकों का कम अटेंडेंस लगाना
सीटू के ठेका विंग के महासचिव योगेश सोनी के मुताबिक ठेकेदार ठेका हासिल करने के लिए रिवर्स आक्शन तक चले जाते हैं वास्तविक लागत से बहुत कम में काम ले लेते हैं। बाद में जब भुगतान की बारी आती है तब उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है। क्योंकि ड्यूटी के हिसाब से ठेका श्रमिकों को भुगतान करने पर ठेकेदार को नुकसान उठाना पड़ सकता है । उस नुकसान से बचने के लिए वह ठेका श्रमिकों को ड्यूटी से भी कम का भुगतान करना पड़े इसके लिए अटेंडेंस में गड़बड़ी करता है।

इसमें अधिकारियों की भी संलिप्तता पाई गई है। जिसके कारण ठेका श्रमिकों को हर महीने बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी शिकायत समय समय पर बीएसपी प्रबंधन से की जाती रही है। बीते सप्ताह भी आईआर विभाग को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या से अ‌वगत कराया गया था। साथ ही दिसंबर में आंदोलन करने की चेतावनी भी दी गई थी।

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