बोर्ड परीक्षा:ऑफलाइन परीक्षा में 12वीं में 30% 10वीं में 25% स्टूडेंट्स हो गए फेल

जांजगीर14 दिन पहले
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कोरोना के कारण दो साल बाद बोर्ड की परीक्षाएं ऑफलाइन हुई। विद्यार्थी जिस स्कूल में पढ़ रहे थे, उन सभी स्कूलों को केंद्र बनाया गया, जांजगीर-चांपा जिला प्रदेश का एक मात्र जिला था जहां नकल रोकने के लिए सभी सेंटर्स में सरकारी शिक्षकों की परीक्षा ड्यूटी लगाई गई। इसके अलावा सेंटर्स में तीन घंटे बैठने के लिए अन्य अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई गई।

जबकि अन्य जिलोें में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने उसी स्कूल के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई थी। जिले में नकल के कुछ प्रकरण भी बने। दो साल पढ़ाई नहीं होने का विद्यार्थियों के रिजल्ट पर सीधा असर पड़ा है। पिछले साल यानि 2021 में दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं विद्यार्थियों ने अपने घरों में बैठकर दी थी, इसलिए दोनों ही कक्षाओं का रिजल्ट लगभग शत प्रतिशत था।

इस वर्ष शनिवार को घोषित रिजल्ट में बारहवीं के 30.86 प्रतिशत विद्यार्थी फेल हो गए, जबकि दसवीं में 25. 48 प्रतिशत विद्यार्थियों को असफलता का सामना करना पड़ा। इस वर्ष बारहवीं में 69.14 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए हैं तो दसवीं में 74.52%विद्यार्थी सफल हुए हैं।

छात्राएं फिर रहीं आगे
दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में छात्राओं ने फिर एक बार बाजी मारी है। दसवीं की मेरिट लिस्ट में जिले के चार विद्यार्थियों को स्थान मिला है। जिसमें तीन छात्राएं डभरा की ग्रीतु चंद्रा, जांजगीर की खुशी यादव, नैला की दीपाली सूर्यवंशी शामिल हैं, जबकि मेरिट लिस्ट में एक मात्र छात्र डभरा से हर्ष तिवारी हैं।

वहीं बारहवीं की जिला वार जारी सूची में भी जैजैपुर स्कूल की छात्रा रेणुका चंद्रा 479 नंबर 95.80 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्रा हैं। उसकी इस सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी का मामला है। उससे मिलने लोग पहुंच रहे हैँ।

मेरिट में आने से बहन का सपना पूरा: हर्ष
नेशनल कॉन्वेंट स्कूल डभरा के छात्र हर्ष तिवारी की मां मालती तिवारी गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल में शिक्षिका हैं, उनके पिता तुलेश्वर तिवारी भी पेशे से शिक्षक हैं। हर्ष ने बताया कि उनकी बहन खुशी का सपना था कि वो मेरिट लिस्ट में आए लेकिन कुछ अंकों से वे चूक गई थीं, तब से घर में सब चाहते थे कि मैं वह पूरा करुं।

हर्ष ने बताया कि नवमी से ही दसवीं की पढ़ाई शुरू कर दी थी। ऑनलाइन क्लास भी लगातार ज्वाइन किया। जब ऑफलाइन क्लास लगी तब भी पढ़ाई की। घर में 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे। उनके मम्मी और पापा भी उन्हें लगातार मोटिवेट करते रहे।

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