53 साल के अधेड़ ने काटा बड़े भाई का सिर:​​​​​​​जांजगीर में 63 साल के बुजुर्ग पर कुल्हाड़ी से किए 3 वार; आरोपी गिरफ्तार

​​​​​​​जांजगीर-चांपा3 महीने पहले
संपत्ति विवाद में बड़े भाई की हत्या कर दी। - Dainik Bhaskar
संपत्ति विवाद में बड़े भाई की हत्या कर दी।

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में बुधवार सुबह संपत्ति विवाद में एक अधेड़ ने अपने 10 साल बड़े भाई का सिर कुल्हाड़ी से काट दिया। आरोपी ने एक के बाद एक तीन वार बुुजुर्ग के सिर पर किए। इसके चलते उनका सिर आधा कटकर अलग हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने छोटे भाई को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि उसने तब तक वार किया, जब तक उसे बड़े भाई के मरने का विश्वास नहीं हो गया। मामला जांजगीर थाना क्षेत्र का है।

हत्या के बाद पूछताछ कर बयान लेती पुलिस।
हत्या के बाद पूछताछ कर बयान लेती पुलिस।

जानकारी के मुताबिक, पिसौद गांव निवासी दिलेराम साहू (63) बुधवार को अपने घर के पीछे बनी बाड़ी में काम कर रहा था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला उसका छोटा भाई दिलहरण साहू (53) वहां कुल्हाड़ी लेकर पहुंच गया और विवाद करने लगा। इससे पहले कि दिलेराम कुछ समझ पाता, दिलहरण ने उसके सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। कुल्हाड़ी सिर पर लगते ही दिलेराम जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद भी दिलहरण उसके सिर पर वार करता रहा। इसके चलते सिर के दो टुकड़े हो गए।

पुलिस हिरासत में आरोपी दिलहरण साहू।
पुलिस हिरासत में आरोपी दिलहरण साहू।

संपत्ति के बंटवारे के बावजूद, छोटा भाई कर रहा था विवाद
स्थानीय लोगों ने बताया कि दिलेराम साहू और उसके दिलहरण साहू के बीच पैतृक संपत्ति का बंटवारा हो चुका था। छोटे भाई दिलहरण ने अपने हिस्से की जमीन बेच दी थी। इसके बाद वह अपने बड़े भाई के हिस्से की जमीन में से दोबारा हिस्सा मांगता था और अक्सर विवाद किया करता था। जांजगीर के तहसील न्यायालय में दोनों के बीच संपत्ति विवाद का मामला भी चल रहा है। वह अपने ससुराल वालों से भी बंटवारा चाहता है। इसको लेकर वहां भी विवाद चल रहा है।

वारदात के बाद मौके पर एकत्र लोगों की भीड़।
वारदात के बाद मौके पर एकत्र लोगों की भीड़।

पारिवारिक झगड़े के कारण पिता छोड़कर चले गए
गांव के एक बुजुर्ग ने बताया कि पारिवारिक संपत्ति विवाद की वजह से ही दिलेराम और दिलहरण के पिता दयालू राम साहू कुछ साल पहले सब कुछ छोड़कर वृंदावन चले गए थे। वहीं कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई। उन्होंने दोनों भाइयों को बहुत समझाया, इसके बाद भी छोटा भाई नहीं मान रहा था। इसके चलते पिता परेशान रहते थे। दिलहरण को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।

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