विडंबना:सरना की डिमांड ज्यादा फिर भी पिछले साल से 11 हजार 300 क्विं. कम मांगा, बीज की कमी

जांजगीरएक महीने पहले
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खाद आई है पर पर्याप्त मात्रा में नहीं। - Dainik Bhaskar
खाद आई है पर पर्याप्त मात्रा में नहीं।

जिले के किसान खरीफ फसल में स्वर्णा धान की ही खेती करते हैं, इसलिए इस धान के बीज की डिमांड अधिक होती है, लेकिन इस साल कृषि विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने जरूरत के हिसाब से धान की बीज की डिमांड कम कर दी है। पिछले साल की तुलना में इस साल 11 हजार 300 क्विंटल कम बीज मांगा गया है, बीज निगम से। इन दोनों विभागों के अधिकारियों की गैरजिम्मेदारी व लापरवाही का खामियाजा जिले के किसानों को भोगना पड़ रहा है। सहकारी समितियों में सरना धान का बीज नहीं मिल रहा है।

इससे किसानों को खुले मार्केट में व्यापारियों से अधिक दर में बीज खरीदना पड़ रहा है। जिले में धान खरीफ की प्रमुख फसल है, यह जिला प्रदेश में सर्वाधिक धान उत्पादन करने वाला जिला है। 95 प्रतिशत एरिया सिंचित होने से किसान धान लगाते हैं। इसमें भी किसान उस धान को बोना पसंद करते हैं, जिसका उत्पादन अन्य धान की तुलना में औसतन अधिक होता है। वर्ष 2021--22 में जिले के 1 लाख 90 हजार 898 किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान की बिक्री की थी।

इस साल कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार 5 लाख 72 हजार 500 एकड़ में धान की फसल लगाई जा सकती है। इस अनुमान से देखें तो किसानों को धान के बीज की भी अधिक जरूरत होगी। किसान अधिकतर सहकारी समितियों से ही धान का बीज लेते हैं,क्योंकि यहां बीज लेने पर उन्हें तत्काल पैसा नहीं देना पड़ता, लोन में सामान मिल जाता है और सस्ता भी पड़ता है, लेकिन इस वर्ष किसान परेशान हैं।

बाजार में 6000 रुपए क्विंटल पड़ रहा बीज, जबकि समिति में 2660
स्वर्णा का बीज बाजार में किसानों को भारी महंगा पड़ रहा है। समितियों में किसानों को 30 किलो का पैकेट 800 रुपए में मिलता है। इस हिसाब से एक क्विंटल बीज की कीमत 2660 रुपए पड़ती है, जबकि खुले बाजार में लाल सरना के 25 किलो के पैकेट के लिए किसानों को 1500 रुपए देने पड़ते हैं, यानि एक क्विंटल के 6000 रुपए पड़ रहा है। यानि प्रति क्विंटल किसानों को 3340 रुपए अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।

समितियों में सफेद सरना भी नहीं मिल रहा , खाद की भी किल्लत
किसान हर साल धान की फसल में बदलाव भी करते हैं। लाल सरना के साथ ही सफेद सरना की भी डिमांड किसानों के द्वारा की जा रही है, लेकिन न तो सहकारी बैंक के नोडल ने किसानों की इस डिमांड को ध्यान दिया न ही डीडीए ने। इन दोनों विभागों द्वारा मात्र 375 क्विंटल बीज की ही मांग की गई।

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