टेक्सटाइल की परीक्षा में 28 फीसदी पास:देश के सातवें व प्रदेश के पहले भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान की पढ़ाई व्यवस्था बदहाल

जांजगीर2 महीने पहले
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डिप्लोमा इन हैण्डलूम एंड टेक्सटाइल्स टेक्नालॉजी परीक्षा का रिजल्ट इस बार 30 प्रतिशत रहा, जबकि 70 प्रतिशत छात्र फेल हुए। पिछले दो सालों से परीक्षा छात्रों ने घर बैठे दी, उसमें वे पास हुए, जबकि इस साल ऑफलाइन परीक्षा केंद्र में ही अधिकांश छात्र फेल हुए। कोरोनाकाल में हुई ऑनलाइन परीक्षा की चाह में इस भी भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्रों ने तैयारी नहीं की, इसी बीच अचानक प्रशासन द्वारा ऑफलाइन परीक्षा लेने का निर्देश जारी करते हुए टाइम टेबल की जारी कर दिए हैं। नतीजा यह रहा कि अधूरी तैयारी के बीच परीक्षा में बैठे भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान में पढ़ने वाले 59 छात्र-छात्रों में से केवल 17 परीक्षार्थी ही पास हुए, जबकि 42 परीक्षार्थी फेल हो गए।

दरअसल पिछले दो सालों संक्रमण काल के दौरान ऑनलाइन परीक्षा ली गई। इस साल के शैक्षणिक सत्र के दिसम्बर में आई तीसरी लहर के बीच एक बार छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा की आस जगी थी, लेकिन आॅफलाइन हुई परीक्षा में 59 छात्र-छात्राओं में केवल 17 परीक्षार्थी ही पास हुए। भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान चांपा में डिप्लोमा इन हैण्डलूम एंड टेक्सटाइल्स टेक्नालॉजी पाठ्यक्रम में प्रथम वर्ष में सिर्फ 21 विद्यार्थी ही अध्ययनरत हैं, जबकि द्वितीय वर्ष में 20 और फाइनल इयर में सिर्फ 18 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

दिसम्बर में आई तीसरी लहर के बीच कुछ दिनों तक काॅलेज बंद रहा, जिसके कारण एक बार छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन परीक्षा होने की उम्मीद थी, लेकिन फरवरी के दूसरे सप्ताह में प्रशासन द्वारा ऑफलाइन की परीक्षा लेने का निर्देश देते हुए टाइम टेबल भी जारी कर दिए, जिसके कारण अधिकांश छात्र अधूरी तैयारी के बीच परीक्षा में शामिल हुए और परीक्षा दी, लेकिन इनमें से 72 प्रतिशत छात्र फेल हुए।

डिग्री लेकर भटक रहे बेरोजगार
भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान की शुरूआत वर्ष 2007 में हुई थी, तब से यहां कई बैच पास होकर निकल चुका है, लेकिन उनमें से अधिकांश छात्र बेरोजगार घूम रहे हैं। प्रदेश के हाथकरघा व ग्रामोद्योग विभाग में अर्से से भर्ती नहीं हुई है, जिसके कारण उपसंचालक, सहायक संचालक, उप हाथकरघा निरीक्षक, हाथकरघा निरीक्षक, रेशम विभाग में वरिष्ठ रेशम अधिकारी सहित अधिकांश पद खाली है, यदि इन विभागों में हर साल भर्ती होती तो आईआईएचटी से पास होकर निकलने वाले छात्रों को नौकरी के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ती।

परीक्षा को लेकर छात्र गंभीर नहीं थे

^परीक्षा के तीन पहले ही उन्हें ऑफलाइन परीक्षा होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन फिर भी छात्र परीक्षा का लेकर गंभीर नहीं थे। कालेज में रेग्युलर पढ़ाई कराई जाती है, लेकिन फिर छात्र रूचि नहीं लेते। कालेज की रिजल्ट खराब होने में परीक्षार्थी ही जिम्मेदार होता है।
डोमू धकाते, प्राचार्य, आईआईएचटी चांपा

आईआईएचटी की व्यवस्था बदहाल

देश के सातवें व प्रदेश के पहले भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां फैबरिक स्ट्रक्चर, वीविंग थ्योरी और कलर कांस्पेट विषय संचालित है, लेकिन यहां नियमित शिक्षकों का टोटा शुरू से ही है। इतने बड़े कॉलेज में यहां महज 50-60 विद्यार्थी ही अध्ययनरत है। यहां नियमित शिक्षकों की पहले ही कमी है साथ ही पर्याप्त संसाधन का अभाव है।

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