200 गांवों में निस्तारी की समस्या:35 किमी लंबी हाफ नदी की धार टूटी, नांदघाट के पास शिवनाथ में समाहित हो जाती है यह नदी

पंडरिया7 दिन पहले
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नगर से होकर गुजरने वाली जिले की सबसे बड़ी हाफ नदी का बहाव रविवार से थम गया है। कुछ गड्ढों में ही पानी दिखाई पड़ रहा है, जो भी एक-दो दिन में सूख जाएगी। हाफ नदी पिछले दो वर्षों से कोरोना के कारण नहीं सूखी थी। इस वर्ष यह नदी फिर से सूख गई है।

हाफ नदी में बहाव टूटने के कारण नदी किनारे स्थित गांवों में लोगों की परेशानी बढ़ेगी। हाफ नदी पंडरिया के पंडरीपानी-दलदली के मध्य मैकल पर्वत श्रृंखला से निकलती है। जो मुंगेली व बेमेतरा जिले से होते हुए नांदघाट के पास शिवनाथ नदी में मिल जाती है। इस नदी की लंबाई करीब 35 किलोमीटर है, जो जिले की सबसे बड़ी व लंबी नदी है। इस नदी में आमतौर पर मई के अंतिम हफ्ते में पानी की कमी होती थी। लेकिन यह पहली बार है कि मई में सूख गई है।

इसके चलते ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस नदी में क्षेत्र के करीब 200 से अधिक गांव के ग्रामीण निर्भर रहते हैं। ब्लाॅक अंतर्गत लंबी प्रवाहित होने वाली हाफ नदी सूख चुकी है। पहले सदवाहनी नदी थी: करीब 10 वर्ष पूर्व यह नदी सदवाहनी नदी के रूप में थी,जिसमे पूरे वर्ष पानी का बहाव रहता था। लेकिन विगत 6-7 वर्षों से यह नदी गर्मी के मौसम के सूख रही थी।

बोर का जलस्तर गिरा
क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि नदी सूखने के बाद गांव में स्थित हैंडपंप का जल स्तर नीचे हो गया है। हैंडपंप से केवल 2-2 घंटे के भीतर पानी निकल रहा है। गांव के ज्यादातर हैंडपंप करीब 220 से 280 फीट तक खुदाई की गई थी। इन बोर में पानी की कमी है।

ग्रामीणों को निस्तारी के लिए भटकना पड़ रहा है। पहले नदी किनारे स्थित हर गांव में हाफ नदी के पानी से सब्जी उत्पादन हुआ करता था। अब सब्जी उत्पादन नहीं हो पा रहे हैं। इसी प्रकार मुंगेली जिले की जीवनदायिनी आगर नदी उद्गम स्थल में ही सूख गई है। इस नदी पर पंडरिया ब्लॉक के वनांचल के लोग निर्भर है।

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