आतंक का जाल:नक्सली रखते हैं बहीखाता, तेंदूपत्ता, निर्माण कार्य व गाड़ियों से वसूली कर बनाते हैं बजट

कांकेर2 महीने पहले
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डायरी के पन्ने, जिसमें दर्ज है खर्च व वसूली की जानकारी। - Dainik Bhaskar
डायरी के पन्ने, जिसमें दर्ज है खर्च व वसूली की जानकारी।

अब तक नक्सलियों पर तरह-तरह के अवैध उगाही के इल्जाम लगते रहे हैं। दूसरी ओर नक्सली स्वयं काे पाक-साफ बता बैनर व पोस्टर के माध्यम से इलाके में काम करने वाले ठेकेदारों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को लुटेरा व शोषक बताते हैं। लेकिन सवाल यह है कि भारी मात्रा में आए दिन लगाए जाने वाले बैनर व पोस्टर के लिए इनके पास रकम आती कहां से है।

इसका खुलासा शुक्रवार को आमाबेड़ा इलाके के कमकाकुड़ुम पहाड़ी में हुई मुठभेड़ के बाद पुलिस को सर्चिंग में मिली डायरियों से हुआ। इसमें अवैध वसूली की सूची और पूरा बहीखाता भी पुलिस के हाथ लगा है। यह नक्सलियों द्वारा तेंदुपत्ता व सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों से अवैध वसूली का ठोस सबूत है।

अवैध वसूली के बाद मिले रकम से बजट बनाने का भी खुलासा दस्तावेजों से हुआ है। कमकाकुड़ुम पहाड़ी से पुलिस को कई दस्तावेज, नोटबुक, डायरियां मिली। इन डायरियों में कमेटी व स्थान के नाम के साथ उनसे वसूली कुल रकम व खर्च का ब्योरा भी दर्ज है।

2021 में लाखों के खर्च का था हिसाब-किताब

वसूली कब की गई इसका उल्लेख नहीं है। कुछ में साल 2021 लिखा होने से माना जा रहा है यह उसी साल का हिसाब है। डायरियों में गोंडी भाषा में लिखा गया है।

मुठभेड़ के बाद दस्तावेजों की कर रहे जांच-पड़ताल

एसपी शलभ कुमार सिन्हा ने कहा नक्सलियों द्वार अवैध वसूली की बाते हमेशा आती रही है। मुठभेड़ के बाद ऐसे ही दस्तावेज हाथ लगे हैं जिसकी जांच पुलिस कर रही है।

मुखबिरी तंत्र को मजबूत करने के लिए अलग से फंड

एक ओर पुलिस नक्सलियों को घेरने अपने मुखबिर तैयार कर रही है। इधर नक्सली भी पुलिस व उनके मुखबिरों की सूचना देने गांव में अपने मुखबिर तैयार कर रहे हैं। इसके लिए भी वे अलग से फंड बनाकर इन्हें देते हैं। नक्सली कैंप से जो दस्तावेज मिले हैं उसमें हाल ही में नक्सलियों द्वारा मनाए शहीदी सप्ताह के लिए बांटे फंड व सामग्री का उल्लेख है। इसका जिक्र स्वयं कुएमारी कमेटी सचिव प्रसाद ने किया है। प्लानिंग व बैठक, बैनर बांधने व अन्य क्रम की रूपरेखा की जानकारी देने के बाद नक्सलियों को मिलने वाले सामान का जिक्र है। सिल्वर रंग का 1 लीटर पेंट, लाल व अन्य रंग के 30 मीटर कपड़ा व अन्य सामग्री दर्ज है।

वसूली के लिए करते हैं कोडवर्ड का इस्तेमाल

नक्सलियों की जो डायरी हाथ लगी है उसमें तेंदूपत्ता कमेटी, निर्माण कार्य व वाहनों से वसूली के लिए उनके नाम की जगह शार्ट में कोडवर्ड लिखा है। कमकाकुड़ुम की जगह कामक तेंदुपत्ता पैसा 500, गुमझीर की जगह गुम तेंदुपत्ता पैसा 24 हजार 500, एक अन्य कमेटी से तेंदुपत्ता का 35 हजार, आड़ेंगा 33 हजार 200, मलांजकुड़ुम 14 हजार 500, कालमु 6 हजार, रोड निर्माण से 2 लाख व गाड़ी चंदा 20 हजार लिखा है। डायरी के अन्य पन्नों में खर्चे के हिसाब में दवा 15 हजार, िवस्फोटक 25 हजार, फिर वस्फोटक 35 हजार के अलावा बैनर पोस्टर का भी जिक्र है।

हर हमले की बाकायदा तैयार करते हैं रिपोर्ट

डायरियों में कई रिपोर्ट भी मिली है जो हमले व पुलिस से आमना सामना होने के बाद नक्सलियों ने तैयार की है। पुलिस पर फायरिंग, बम लगाने, रोड निर्माण में लगी गाड़ी को राेकने, वाहन व जेसीबी को जलाने समेत मीटिंग व अन्य कार्रवाई की तारीख व जगह समेत रिपोर्ट तैयार की गई है।

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