कृषि उत्पाद को बढ़ावा:देवखोल के 70 पंडो व आदिवासियों की आर्थिक स्थिति सुधारने 9 करोड़ खर्चे, हालत जस की तस

बैकुंठपुर14 दिन पहले
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एनिमिया और कुपोषण से निपटने के लिए प्रदेश भर में मुनगा सप्लाई करने, पटना क्षेत्र के मुरमा पंचायत के देवखोल में मुनगा समेत अन्य कृषि उत्पाद को बढ़ाव देने और यहां रहने वाले आदिवासियों की आजीविका से जोड़ने के लिए 170 एकड़ भूमि का पट्टा 70 किसानों वन अधिकार के तहत दिया गया है। यहीं नही सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करीब 9 करोड़ रुपए डीएम फंड से खर्च किए गए, लेकिन यहां रहने वाले आदिवासियों की हालत में कोई सुधार अब तक देखने को नहीं मिला है।

बता दें कि सत्ता परिवर्तन के बाद जिले का कोई भी अधिकारी व जनप्रतिनिधि यहां दौरा करने नहीं पहुंचे। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत मुरमा भाजपा शासन के दौरान 2017-18 में हमर जंगल-हमर आजीविका के तहत 170 एकड़ वन अधिकार पट्टे की भूमि 70 किसानों को दी गई। वहीं इन किसानों को सिंचाई समेत अन्य कृषि उत्पादों को तैयार करने के लिए यहां 9 करोड़ खर्च विभिन्न निर्माण एजेंसियों के माध्यम से किए गए।

लेकिन यहां रहने वाले आदिवासियों की जमीनी हकीकत पहले ही तरह ही बनी हुई है। इस योजना के तहत जिन एजेंसियों को काम सौंपा गया, उन एजेंसियों के अफसर और कर्मचारी मालामाल हो गए। यहां बनाए गए बीज भंडार केंद्र का एक साल तक ही संचालन किया गया। इसके बाद से यहां बीज का भंडार बंद कर दिया गया है।

करोड़ों के स्टाप डेम, सोलर सिस्टम कुछ काम नहीं आए

170 एकड़ के क्षेत्र में मुरमीकरण, सड़क, नहर, नाला, फेसिंग बाउंड्री, तालाब, डबरी निर्माण, कच्चे मकान निर्माण, स्टाप डेम, बोरवेल, करीब 50 सोलर पंप स्थापित किया गया था। वहीं टपक विधि से सिंचाई के लिए ड्रीप सिस्टम भी लगाया गया था। यहां जल संसाधन विभाग ने 7 स्टॉप डेम और एक मिट्टी बांध का निर्माण कराया था, जो किसी काम नहीं आया है। 6-6 लाख के 6 और 40 लाख की लागत से एक स्टॉप डेम बनाया गया था। वहीं 10 लाख की लागत से मिट्टी बांध का निर्माण किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि मिट्टी बांध के निर्माण के बाद भी यहां एक बूंद पानी नहीं है। यहां सिंचाई के लिए बनाए गए डबरी, सोलर सिस्टम, स्टॉप डेम सब बेकार साबित हुए।

70 पंडो व आदिवासी किसानों का आत्मनिर्भर बनने का सपना टूटा
पंडो व आदिवासी जनजाति के 70 किसानों ने मुनगा, आम, अमरूद, साग सब्जी की खेती का सपना दिखाया था। उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार और उनके बच्चे आने वाले समय में आधुनिक व वैज्ञानिक विधि से खेती कर अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार ला सकेंगे, लेकिन यह योजना निर्माण एजेंसियों की लापरवाही से फेल हो गई और आदिवासियों के आत्म निर्भर होने का सपना टूट गया।

आदिवासी धान का ही उत्पादन कर रहे
बीते 5 साल से यहां रहने वाले आदिवासी खरीफ फसल के तहत धान का ही उत्पादन कर रहे है। जबकि यहां मुनगा समेत फल, सब्जी का उत्पादन कर आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों में सप्लाई करना था। वहीं मुनगा को पौष्टिकता से भरपूर होता है और इसकी मांग भी हमेशा बनी रहती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए योजना के तहत 100 से अधिक मुनगा के पौध लगाए गए थे, लेकिन इनमें 90 फीसदी पौधे नष्ट हो गए है।

ये निर्माण कार्य कराए गए थे

वर्ष 2017-18 में बैकुंठपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मुरमा के आश्रित ग्राम देवखोल को हमर जंगल हमर आजीविका योजना के लिए चयन किया गया था। योजना के तहत पंडो व आदिवासी जनजातियों के आर्थिक व सामाजिक स्तर को उपर उठाकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ना था। तालाब, स्टॉप डेम, फेसिंग उद्यानिकी के कार्य कराए गए थे। तत्कालीन कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा और वर्तमान जिला पंचायत सीईओ तूलिका प्रजापति ने वन अधिकार के तहत मिली वन भूमि जिला पंचायत के साथ कृषि उद्यान, लोक स्वास्थ्य व यांत्रिकी, आरईएस, जल संसाधन, रेशम, मत्स्य विभाग के तहत 9 कराेड रुपए जारी किए थे।

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