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आर्थिक परेशानी:अधूरे ठेके और कर्मचारियों के गबन में फंसे 1500 करोड़, वसूली पर फोकस

रायपुर11 दिन पहलेलेखक: जॉन राजेश पॉल
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  • सख्ती का फैसला

प्रदेश में कोरोना की वजह से आर्थिक परेशानियों से जूझ रही सरकार ने राजस्व वसूली में ढिलाई बरतने पर वाले विभागों पर सख्ती बरतने का फैसला किया है। उसने संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की है। अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा गबन, निर्माण कार्यों में देरी करने वाले ठेकेदार व फर्म, कर अपवंचन, लाइसेंस, ट्रांसपोर्ट सरकारी रिकवरी, अधिक भुगतान के मामलों में सरकार को करीब 1400-1500 करोड़ रुपए की वसूली करनी है। मालूम हो कि विधानसभा का बजट सत्र प्रारंभ हो गया है। पैसों की जरूरत की वजह से प्रदेश की आमदनी व खर्चों का आंकलन किया जा रहा है। इसलिए वसूली पर फोकस है। महालेखाकार के साथ पिछली बैठक में यह जानकारी सामने आई थी कि सरकार को जिन-जिन से भी पैसा लेना है। इस बिखरे हुए राजस्व का उसका आंकलन किया जाए तो यह राशि करीब 1400 से 1500 करोड़ रुपए है। हालांकि इसके ताजा डेटा 26 फरवरी को आने की संभावना है। इस दिन सरकार व महालेखाकार के बीच बैठक होनी है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने पिछले हफ्ते पहले इसकी जानकारी वित्त विभाग से मांगी थी। वित्त विभाग ने अब सभी विभागों व राजस्व मंडल, कमिश्नरों व कलेक्टरों से सालभर की राजस्व वसूली का प्रतिवेदन मांग लिया है। इसे हर तिमाही के अनुसार जानकारी भेजनी होगी। इरीगेशन, पीडब्लूडी, पीएचई जैसे वर्कर्स डिपार्टमेंट में काम छोड़कर जाने वाले ठेकेदारों-फर्मों से भी वसूली अटकी है। इनके द्वारा जमा संचित निधि में से वसूली संभव है। विभागों से इसके रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट ही शासन तक नहीं पहुंचते। आर्थिक अनियमितता में फंसे व ज्यादा भुगतान करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों से भी सेवानिवृत्ति के पहले ही वसूली हो पाती है।

यह है प्रक्रिया
शासकीय विभागों द्वारा व्यय की जाने वाली धनराशि का नमूना आडिट महालेखाकार की टीम करती है। इस आडिट रिपोर्ट के अनुसार हानि और गबन के मामलों पर संबंधित ठेकेदार फर्म तथा सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाती है। इसके अलावा इसकी जिम्मेदारी नियंत्रणकर्ता अधिकारी व कार्यालय प्रमुख की होती है। नियंत्रणकर्ता अधिकारी व कार्यालय प्रमुख इसमें कोताही बरत रहे हैं।वे प्रकरणों को लंबे समय तक लंबित रखते हैं। संबंधित कर्मचारी के सेवानिवृत्त हो जाते हैं। या केस कोर्ट की वजह से सरकार को बड़ी वित्तीय हानि होती है।

यह बताना होगा विभागों को

  • पहली, दूसरी, तीसरी व चौथी तिमाही में कितनी वसूली की
  • आडिट रिपोर्ट के साथ वसूली का कारण क्या है
  • कितनी वसूली की जानी थी। वसूली किससे की जानी थी।
  • जिम्मेदार ठेकेदार व फर्म का नाम क्या है?
  • अधिकारी-कर्मचारी का नाम व पद भी क्या है?
  • यदि वह सेवानिवृत्त हो गया है तो तारीख।
  • अब तक कितनी राशि वसूली जा सकी है।
  • कितनी राशि लेना बाकी है।
  • वसूली नहीं होने के क्या कारण हैं?
  • वसूली कब तक पूरी होने की संभावना है।
  • आडिटर का नाम व वर्ष कौन सा है।

हर विभाग पर है बकाया: पांडेय
वित्त विभाग के अपर सचिव सतीश पांडेय के अनुसार हर विभाग पर कुछ न कुछ बकाया है। ये महालेखाकार के ऑडिट में विभागों, ठेकेदारों, फर्मों व अधिकारियों-कर्मचारियों पर निकाली गई वसूली योग्य बकाया राशि राशि है। कई तो बरसों पुरानी है। वास्तविक राशि का रिपोर्ट आने के बाद पता चल सकेगा। इसलिए अब हर तीन महीने में तय फार्मेट में रिपोर्ट मंगवाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। इससे सालभर की बजाए हर तीन महीने में वसूली का खाका सामने आ सकेगा।

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