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कोरोना पड़ताल:महामारी से निपटने राजधानी में 25 करोड़ खर्च, इसमें जांच-इलाज नहीं

रायपुर ।अमिताभ अरुण दुबे14 दिन पहले
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  • नगर निगम, स्मार्ट सिटी और हेल्थ विभाग ने 10 माह में 90 जरूरतों पर खर्च की रकम

राजधानी में बुरी तरह फैले कोरोना संक्रमण ने शहर के लोकल एजेंसियों को भी करोड़ों रुपए की चोट पहुंचाई है। तकरीबन 10 माह के कोरोना काल में नगर निगम, स्मार्ट सिटी और हेल्थ विभाग ने कुल मिलाकर 25 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं, जबकि इसमें जांच, दवा-इलाज का खर्च शामिल नहीं हैं। कोरोना नियंत्रण ड्राइव, कोविड केयर सेंटर बनाना, सड़कों पर सैनिटाइजेशन, कोरोना वेस्ट डिस्पोजल, कंटेनमेंट जोन का निर्माण और क्वारेंटाइन सेंटरों की व्यवस्था से लेकर लॉकडाउन में राहत और जागरुकता अभियानों को मिलाकर 90 तरह की जरूरतों पर तीनों एजेंसियों ने 25 करोड़ रुपए लगाए हैं। इसमें सबसे कम 5 करोड़ रुपए का खर्च स्मार्ट सिटी का है। वित्तीय वर्ष जल्दी खत्म होने वाला है, इसलिए सभी विभागों ने कोरोना खर्च का हिसाब-किताब शुरू कर दिया है। बिल पर्चियां खंगाली जा चुकी हैं। इसमें सबका खर्च अलग-अलग है। जैसे, सीएमएचओ कार्यालय के ज्यादातर खर्चे ऊपरी इंतजामों जैसे सैनिटाइजर, जागरूकता, जांच के लिए अभियान, कोरोना जांच सेंटर बनाने उन्हें संचालित करने में हुए। अभी तक लगाए गए अनुमान के मुताबिक करीब पांच करोड़ से ज्यादा सीएमएचओ कार्यालय को खर्च करना पड़ गया है। इसी तरह, नगर निगम ने भी कोरोना की दस्तक के साथ संक्रमण और बचाव पर ताबड़तोड़ पैसे खर्च किए। इसमें 8 कोविड केयर सेंटरों का निर्माण भी शामिल है। लॉकडाउन के दौरान शहर के लोगों ने राहत सामग्री खुलकर दान की। अगर यह सामग्री खरीदनी पड़ती तो निगम का खर्च 16 करोड़ रुपए से बढ़कर 20 करोड़ रुपए के पार भी हो सकता था।

2 हजार बेड वाले केयर सेंटर
निगम ने राजधानी में दो हजार से ज्यादा बिस्तरों वाले नौ कोविड केयर सेंटर भी बनाए थे। जिसमें लगभग 10 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज भी किया गया। मरीजों के खाने रुकने और ठहरने के इंतजाम भी खर्च के हिसाब में शामिल किए गए हैं। रायपुर नगर निगम ने स्मार्ट सिटी के साथ प्रदेश का ढाई सौ बिस्तरों वाला पहला कोविड केयर सेंटर इंडोर स्टेडियम में बनाया था। इसी तरह, शहर में जब बड़ी संख्या मरीज निकल रहे थे, तब रायपुर में एक समय में दो सौ से ज्यादा तक कंटेनमेंट जोन बन गए थे। कंटेनमेंट जोन में राहत पहुंचाने के साथ बांस बल्ली, सैनिटाइजेशन, संक्रमितों के घरों के बाहर स्टीकर घेराबंदी लगाने जैसे खर्च भी इस हिसाब में शामिल किए गए हैं।
एक करोड़ से शुरू हुआ खर्च
शहर में कोरोना का पहला केस 18 मार्च को मिला, लेकिन एक करोड़ की राशि के साथ रायपुर में सबसे पहले सार्वजनिक स्थलो को डिसइंफेक्ट करने व सैनिटाइजेन के लिए एक एजेंसी तुरंत नियुक्त की गई। राजधानी होने के कारण यहां प्रवासियों की आवाजाही सबसे ज्यादा हुई, 4 करोड़ से ज्यादा की राशि प्रवासियों के भोजन आवास और परिवहन क्वारेंटाइन सेंटर के बंदोबस्त पर खर्च हुई। प्रदेश का पहला कोविड केयर सेंटर 60 लाख रुपये में यहां स्मार्ट सिटी के फंड से बनाया गया। आपदा प्रबंधन के तहत जिलो को शुरूआत में मिली करीब 2 करोड़ की राशि में डेढ़ करोड़ यहां पर खर्च हुए।

राजधानी में इस तरह के खर्च

  • शुरुआती सेनिटाइजेशन (एकमुश्त) - 1 करोड़
  • शहर में 9 कोविड केयर सेंटर - 3.10 करोड़
  • सफाई, फॉगिंग और ब्लीचिंग - 4 करोड़
  • प्रवासियों का क्वारेंटाइन खर्च - 2 करोड़
  • कॉल सेंटर, एक्टिव सर्विलांस - 30 लाख
  • शहर में कोरोना कचरा डिस्पोजल - 2 करोड़
  • लॉकडाउन में राहत और रसद - 3-5 करोड़
  • कोरोना मृतकों की अंत्येष्टि - 1 करोड़
  • लैब, सैंपल कलेक्शन, स्टिकर - 90 लाख
  • जांच केंद्रों से जुड़े इंतजाम - 5 करोड़
  • निगम, स्मार्ट सिटी, हेल्थ विभाग का खर्च - 25 करोड़

"अब भी ऑडिट चल रही है, यह खर्च वास्तविक तो नहीं पर पुख्ता अनुमान पर आधारित है। और दौर में शहर को संक्रमण से बचाने के लिए जो जरूरत पड़ी, सभी का बंदोबस्त किया था।"
-डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ रायपुर

"नगर निगम ने कोरोना काल में 90 से ज्यादा प्रकार के मदों पर पैसे खर्च किए हैं। सभी का हिसाब बनाया जा रहा है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि वास्तविक खर्च कितना हुआ है।"
-पुलक भट्‌टाचार्य, अपर आयुक्त-निगम

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