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स्टेडियम में ही लाखों का दांव:मैच और टीवी प्रसारण में 35 सेकंड का अंतर, सटोरियों ने इसी अंतर को बनाया कमाई का जरिया, गेंद-ओवर के नाम पर भेजते है मैसेज

रायपुर8 महीने पहले
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नवा रायपुर परसदा स्टेडियम में चल रहे रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज में देश के बड़े खाईवाल स्टेडिम में बैठकर ऑन लाइन कटिंग ले रहे हैं। स्टेडियम में मैच और टीवी के प्रसारण में 35-40 सेकंड(1 गेंद)का अंतर होता है। जब गेंद फेंके जाने के 35 सेकंड बाद टीवी पर दिखाई देता है। उस समय तक या तो छक्का पड़ चुका होता है या चौका। विकेट भी गिर चुका रहता है।

इसी 35 सेकंड के अंतर को सटोरियों ने कमाई का जरिया बनाया है। मैदान में बैठा एजेंट गेंद, ओवर, टीम से लेकर खिलाड़ियों के नाम से लगातार मोबाइल पर मैसेज करता है। उसमें दांव लगाने के लिए सिर्फ 30-32 सेकंड मिलते है। जिसका दांव सही हुआ, उसे पैसा दिया जाता है। मैच में दांव लगाने का सटोरिए वाट्सएप से लेकर सोशल मीडिया और एप पर ग्रुप बनाकर रखते हैं। सट्‌टा लगाने वालों से एडवांस में पैसा जमा कराया जाता है। ताकि बाद में पैसा के लिए किसी तरह का विवाद न हो।

साइबर सेल टीआई रमाकांत साहू ने बताया कि मुंबई, दिल्ली और गाेवा के ज्यादातर बड़े खाईवाल लाइव मैच में ही दांव लेते हैं। इससे उन्हें मोटी कमाई होती है। किसी गेंद पर 10 लोगों ने दांव लगाया, जिसमें से सिर्फ 2 का दांव ही सही निकलने पर 8 लोगों का दांव गलत हो जाता है। उन आठ लोगों का पैसा खाईवाल के पास आ जाता है। स्टेडियम में बैठे एजेंट को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती है। उसे अपनी आईडी या ग्रुप में सिर्फ एक मैसेज करना होता है। उसी में पूरा दांव चलता है।

एक मैच में 3 से ज्यादा एजेंट स्टेडियम में
एक मैच में तीन या उससे ज्यादा सटोरिए व एजेंट स्टेडियम में बैठते है। इसमें कोई टीम पर दाव लेता है, तो कोई गेंद, ओवर और खिलाड़ियों पर। लगातार अलग-अलग तरह का दाव लिया जाता है। सभी चीजे की एप या ग्रुप में होता है। हिसाब करने के लिए अलग लोग होते हैं, जो घर पर बैठे होते हैं। वे ग्रुप को देखकर पूरा हिसाब करते हैं।

हर शहर में होते हैं सटोरियों के एजेंट
पुलिस के अनुसार ज्यादातर बड़े बुकी महाराष्ट्र, दिल्ली, गोवा और राजस्थान के है। ये मैदान में लाइव मैच देखते हुए हर शहर में कटिंग करते हैं। हर शहर में उनके एजेंट होते हैं। उनके माध्यम से पूरा खेल चल रहा है। एजेंट ही स्टेडियम में टिकट लेकर मैच देखने जाते है। वहीं से पूरा खेल खेलते है। एजेंटों से खाईवाल एडवांस में पैसा लेते हैं। ताकि उन्हें धोखा न दे सके। वहीं सट्टा खेलने वाले भी एडवांस में पैसा देते है। जितना पैसा खाते में जमा करते है, सटोरिए उतने तक का ही दांव लगा सकते हैं। उससे ज्यादा का दांव नहीं लगा सकते। पैसा जमा करने के बाद ही उन्हें पासवर्ड और आईडी दी जाती है, जिसमें सट्टा चलता है।

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