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छत्तीसगढ़ गांजा तस्करी का कॉरिडोर:भास्कर ने पता लगाया गांजे का नेटवर्क; 600 करोड़ का काला धंधा, हर साल छत्तीसगढ़ से होकर देश के 17 राज्यों तक पहुंच रहा ओडिशा का गांजा

छत्तीसगढ़13 दिन पहले
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ओडिशा से देश के इन राज्यों में होती है गांजे की सप्लाई। - Dainik Bhaskar
ओडिशा से देश के इन राज्यों में होती है गांजे की सप्लाई।
  • इस कारोबार में कोई एक गैंग नहीं, बल्कि ओडिशा और आंध्र के कई गांव हैं शामिल
  • तस्करी का रूट ओडिशा व जगदलपुर; ट्रेन, बस और सब्जी की गाड़ियों से होती है तस्करी

छत्तीसगढ़ में 2020 के बाद गांजा तस्करी के बहुत ज्यादा मामले एकाएक सामने आने लगे। भास्कर ने इसके पीछे की वजह का पता लगाया तो कई प्रमुख कारण सामने आए। इसलिए भास्कर लेकर आ रहा है ‘छत्तीसगढ़: गांजा तस्करी का कॉरिडोर’ की सीरीज। इसके पहले भाग में आज हम बताएंगे कि कैसे ओडिशा से छत्तीसगढ़ होते हुए पूरे देश में गांजा तस्करी की जा रही है। प्रदेश से लगभग कटा हुआ हिस्सा है मलकानगिरी की पहाड़ी। यह क्षेत्र ओडिशा में आता है। इस पहाड़ी से छत्तीसगढ़, ओडिशा व आंध्रप्रदेश की सीमा जुड़ी हुई है। गांजे का कारोबार यहीं से हो रहा है।

ओडिशा और आंध्रप्रदेश से हर साल 600 करोड़ से अधिक कीमत का गांजा देश के 17 से अधिक राज्यों में पहुंचता है। इन 17 राज्यों में जो गांजा सप्लाई होता है, उसका मुख्य रास्ता छत्तीसगढ़ के बस्तर, महासमुंद और रायगढ़ से होकर गुजरता है। इन्हीं तीन जिलों के अलग-अलग रास्तों से तस्कर गांजे की खेप अलग-अलग राज्यों में लेकर जाते हैं।

सबसे ज्यादा गांजा हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दमन-दीव, हिमाचल प्रदेश, आंधप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर में भेजा जाता है। करोड़ों रुपए के इस नशे के कारोबार में कोई एक व्यक्ति या गैंग नहीं, बल्कि ओडिशा और आंध्र के कई गांव के गांव शामिल हैं।

गांजे की खेती से लेकर देशभर के अलग-अलग राज्यों के तस्करों तक गांजा पहुंचाने के लिए यहां के लोग बाहर नहीं जाते हैं, बल्कि गांव में ही रहकर पूरे काम को संचालित करते हैं। बाकी राज्यों से तस्कर इन लोगों से संपर्क करते हैं और फिर खेप लेने के लिए खुद या किसी बिचौलिए को लेकर पहुंचते हैं।

मुकुंडागुड़ा गांव में गांजे को इस तरह सुखाया जा रहा।
मुकुंडागुड़ा गांव में गांजे को इस तरह सुखाया जा रहा।

तस्करों में ओडिशा के गांजे की सर्वाधिक मांग
200 करोड़ रुपए से ज्यादा का 146 क्विंटल गांजा पिछले साल इन्हीं जिलों से पकड़ा गया था।ओडिशा के कंधमाल, कालाहांडी, गंजाम, भवानीपटना, मुन्नीमुड़ा, नवरंगपुर, कोरापुट जिले के व्यापारीगुड़ा, आंध्र-ओडिशा बॉर्डर और मलकानगिरी में होती है गांजे की खेती

गांजा लोड होने से पहले ही ले ली जाती है गाड़ी
गांजा तस्करी में पकड़े गए लोगों को पता ही नहीं होता कि उनकी गाड़ी में गांजा किस इलाके से लोड किया गया है। तस्कर इसके लिए ऐसी जगह का प्रयोग करते हैं, जहां या तो ढ़ाबा हो या फिर कोई चाय-नाश्ते की गुमटियां, जहां बड़ी संख्या में गाड़ियां रुकती हों। यहां जब अन्य राज्यों के तस्कर गाड़ी लेकर पहुंचते हैं तो स्थानीय युवक ड्राइवर से गाड़ी लेकर चले जाते हैं और गांजा लोडकर वापस उसी स्थान पर छोड़ देते हैं।

ड्राइवर को बकायदा समय बताया जाता है कि इतने देर में गाड़ी वापस मिल जाएगी। यही कारण है कि गांजे के साथ पकड़ने वाले अधिकांश ड्राइवर या हेल्पर को पता ही नहीं होता कि गांजे की खेप गाड़ी में कहां ले जाकर लोड की गई है।

पुलिस ने स्वीकारा- ओडिशा से निकलने वाले गांजे का 15% ही पकड़ पाते हैं
देश के 17 राज्यों की पहली पसंद ओडिशा का गांजा है। महासमुंद, बस्तर और रायगढ़ पुलिस ने साल 2020 में 146 क्विंटल गांजा पकड़ा। इस दौरान तस्करों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वे ओडिशा से गांजा लेकर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार ओडिशा में पहले गांजे की खेती कोरापुट जिले के व्यापारीगुड़ा, आंध्र ओड़िशा बार्डर और मलकानगिरी में होती थी।

पिछले कुछ समय में ओडिशा के गांजे की मांग बढ़ी और करीब देश के 17 राज्यों के गांजा तस्कर यहां गांजा लेने आने लगे। इसके बाद बढ़ती मांग को देखते हुए अब ओडिशा के ही नवरंगपुर जिले में इसकी खेती की शुरूआत हुई है। इसके साथ ही कंधमाल, कालाहांडी, गंजाम, भवानीपट्नम, मुन्नीमुड़ा, में भी खेती शुरू हो गई। ओडिशा के इन इलाकों से ही हर साल 550 करोड़ रुपए से अधिक का गांजा देशभर में जा रहा है।

ओडिशा-आंध्रप्रदेश के इन इलाकों में होती है गांजे की खेती
भास्कर की पड़ताल में गांजे की खेती में जो इलाके सामने आए हैं, उसके अनुसार ओडिशा के कंधमाल, कालाहांडी, गंजाम, भवानीपटना, मन्नामुड़ा, नवरंगपुर, मलकानगिरी, कोरापुट जिले के व्यापारीगुड़ा और आंध्रप्रदेश के अंदरूनी इलाके में गांजा की खेती की जाती है। बस्तर और महासमुंद पुलिस की जांच में अब तक जो बातें सामने आई है, उसके अनुसार करोड़ों रुपए के इस कारोबार का कोई सरगना नहीं है। खेती से लेकर इसकी सप्लाई तक के लिए लोकल लोगों का ही सहयोग लिया जाता है।

पहाड़ से नीचे लाने एक ट्रिप का 4000
गांजा ऊपर पहाड़ियों पर होता है। एक बोरी में 20 किलो गांजा भरा जाता है। इसे नीचे लाने के लिए एक युवक को 4 हजार रुपए दिए जाते हैं। पहाड़ी से नीचे आने के लिए करीब 25 किमी का पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है। एक बार में 15 से 20 युवकों की टोली निकलती है। ये सारा काम रात के अंधेरे में होता है।

1700 में खरीदकर बेचते हैं 6000 तक
तस्करों से भास्कर ने बात की तो ज्यादा माल खरीदने के एवज में 1700 रुपए किलो गांजा का दाम तय हुआ। यही गांजा शहरों तक पहुंचकर तकरीबन 6 हजार रुपए किलो हो जाता है। 1700 रुपए में परिवहन का खर्चा शामिल नहीं है। इसमें नक्सलियों और पुलिस का हिस्सा शामिल है। नक्सलियों को पैसा एडवांस में पहुंचता है।

नशे के लिए देश में गांजा दूसरे नंबर की पसंद
इधर, नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट (एनडीटीटी) एम्स की रिपोर्ट के अनुसार देश में जितनी आबादी नशा करती है उनमें नशे के लिए उपयोग में लाये जाने वाले नशीले पदार्थ में शराब नंबर वन पर है तो गांजा दूसरे नंबर पर है। एनडीटीटी की मानें तो देश की करीब 20 प्रतिशत आबादी अलग-अलग प्रकार का नशा करती है। जानें कौन-सा नशा कितनी प्रतिशत आबादी करती है।

3 चरणों में होता है काम; गांजे की खेती से लेकर सप्लाई तक का पूरा काम 3 चरणों में पूरा होता है-

1.पहले चरण में ग्रामीण गांजे की खेती करते हैं।
2.गांव के ही कुछ युवक खेती करने वाले लोगों से खरीदते हैं और गांव में ही रखते हैं।
3.तीसरे चरण में सप्लाई का काम होता है।

आंकड़े चौंकाने वाले

  • 30 हजार एकड़ में हो रही गांजे की खेती। नक्सली करा रहे।
  • 03 सौ करोड़ रु. का कारोबार सिर्फ एक सीजन में।
  • 02 हजार रु. किलो तक जंगल के अंदर बेचा जा रहा।

रिपोर्टर लाइव; नक्सली एडवांस लेते हैं, पुलिस ट्रिप के हिसाब से
हम 26 अगस्त को दोपहर करीब 2 बजे सीतापल्ली पहुंचे। हमें सख्त हिदायत थी कि लोकल लोगों को न तो क्रॉस करना है और न ही विवाद की स्थिति बनने देना। एक से गांजा खरीदने की बात हुई। उसने कहा- कितना? हमने बड़ी मात्रा बताई। एक दिन का वक्त मांगा।

27 अगस्त को फोन आया। उनसे मिले, काफी देर बातचीत के बाद 17 सौ रुपए में 1 किलो गांजे के हिसाब से सौदा तय हुआ। हमने सप्लाई रूट के बारे में पूछा तो बताया कि यहां से ओडिशा रूट सेफ है, पर इसका खर्च अलग से लगेगा। कुछ पुलिस को देना पड़ेगा।

28 अगस्त को सुबह 10 बजे के पहले 10-10 किलो के 5 पैकेट बनाकर देना तय हुआ। पर जैसे ही सुबह निकले बाइक से कुछ लोग लगातार फॉलो करते मिले। 29 अगस्त को चित्रकोंडा की घाटी में लगभग 12 से 15 किमी चलने के बाद कुछ गांव के हर घर में गांजा सूखता मिला। यहां गणेश पूजन के साथ गांजे की खेती शुरू होती है।

गांजे में मोल्टी के साथ सामिली, तामिली, चिंगलपोली, पिरामल जैसी वैरायटी उगाई जाती है। हमने गांजा खरीदने के लिए चित्रकोंडा पुलिस स्टेशन से महज 3 सौ मीटर दूरी पर बसे गांव मोखीगुडा में संपर्क किया। वहां 10 साल के बच्चे ने हमें गांजे का सैंपल दिखाया। उसके घर में 5 क्विंटल से ज्यादा गांजा रखा हुआ था।

सप्लायर को पकड़ने वाले डीएसपी से जानिए गांजे के कारोबार का सिंडिकेट
भानपुरी एसडीओपी बनने के बाद हमारी टीम ने होशंगाबाद के तस्करों से करीब दो क्विंटल गांजा पकड़ा। हर बार की तरह तस्करों पर कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजने की तैयारी में लगी हुई थी। इसी दौरान मैंने सोचा कि तस्करों से पूछा जाए कि ये गांजा कहां से लाते हैं। पूछताछ में पता चला कि गांजा व्यापारीगुड़ा से लाया गया था। इसके बाद तस्करों को जेल भेज दिया गया। चूंकि अब हमारे पास गांजा लाने वाली जगह की जानकारी थी, ऐसे में मैंने खुद ओडिशा के व्यापारीगुड़ा में कैंप किया। इसके बाद पहली बार हमारी टीम ने व्यापारीगुड़ा के मांझीगुड़ा निवासी सुकादेब नायक को पकड़ा। सुकादेब यहीं का लोकल बाशिंदा है और उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार और राजस्थान के तस्करों को गांजा देने का काम करता था। गिरफ्तारी के बाद उसने बताया कि पिछले डेढ़ साल में 5 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का सौ क्विंटल सप्लाई कर चुका था। इस कार्रवाई के बाद हमारी टीम ने ओडिशा-आंध्र बाॅर्डर पर गांजा की खेती कराने वाले कोरापुट के सुभाष मेहर उर्फ राहुल को पकड़ा। यह भी लोकल आदमी था और यह भी मप्र, दिल्ली, रांची और झारखंड के तस्करों को गांजा सप्लाई करता था। इसके बाद हमने नवरंगपुर जिले में भी गांजे की खेती का खुलासा किया और यहां के सप्लायर श्यामगन कुम्भार को पकड़ा। ये दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल में गांजा सप्लाई करवाता था। इस पूरी कार्रवाई के दौरान हमने पाया कि गांजे का कारोबार कोई विशेष गैंग नहीं कर रहा है गांव वाले और लोकल बेरोजगार मिलकर यह कारोबार कर रहे हैं।
-जैसा कि भानपुरी एसडीओपी उदयन बेहार ने भास्कर को बताया

मिलीभगत की होगी जांच: गृहमंत्री

  • लगातार पुलिस राज्य के सीमाओं पर गांजे की खेप पकड़ रही है। महासमुंद और जगदलपुर पुलिस ने तस्करों को गिरफ्तार किया है। अगर चेकपोस्ट से सांठगांठ करके गांजे की तस्करी हो रही है तो उसकी जांच होगी। दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। - ताम्रध्वज साहू,गृह मंत्री
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