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बढ़े सड़क हादसे:अनलॉक के बाद शराब और तेज रफ्तार के कारण गई ज्यादा जानें, 651 लोगों की मौत

रायपुरएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • इस साल 9 महीने में सड़क हादसों और उससे होने वाली मौत में आई कमी

राज्य में इस साल 9 महीने में सड़क हादसों और उससे होने वाली मौत में कमी हुई है, लेकिन अनलॉक के बाद शराब पीकर गाड़ी चलाने, ओवर स्पीड या लापरवाही के कारण 651 लोगों की जान गई है। इन 9 महीनों में आठ हजार से ज्यादा हादसे हुए हैं, जिनमें 3158 लोगों की जान गई है। कोरोना की वजह से तीन महीने गाड़ियों की आवाजाही बंद रही। इस वजह से हादसों की संख्या में भी काफी कमी आई, लेकिन अनलॉक के बाद देशभर में गाड़ियों की आवाजाही तेजी से बढ़ी है। इसके बाद हादसों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। पुलिस मुख्यालय से जारी आंकड़ों के मुताबिक अभी भी हादसों की संख्या में 23.71 फीसदी और इससे होने वाली मौत में 17.63 फीसदी की कमी आई है। पुलिस मुख्यालय के एआईजी ट्रैफिक संजय शर्मा ने बताया कि हादसों की स्टडी के बाद जो रिपोर्ट बनाई गई है, उसके आधार पर सभी एसपी को हादसों पर रोक लगाने के लिए कहा गया है। हादसों में पीड़ित परिवार को समय पर इंश्योरेंस की राशि उपलब्ध कराने के लिए समन्वय करने के लिए कहा गया है।

जहां हादसे वहां पुलिस के साथ निर्माण विभाग के सदस्य कर रहे सर्वे
राज्य में जहां-जहां बड़े हादसे हो रहे हैं, उन स्थानों का लीड एजेंसी द्वारा सर्वे किया जाता है। इसमें पुलिस विभाग के साथ शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, नेशनल हाईवे और स्वास्थ्य विभाग के भी सदस्य हैं। सर्वे के बाद लीड एजेंसी द्वारा हादसों की रोकथाम के लिए सिफारिशें की जाती हैं। नेशनल हाईवे से जुड़ने वाली सड़कों के आसपास ठेले-गुमटी या झाड़ियों से हादसे की आशंका होती है, जिसे हटाने के अलावा जरूरी निर्माण के लिए भी कहा जाता है। स्पेशल डीजी आरके विज नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों की बैठकें लेते हैं, जिसमें हादसों की समीक्षा के अलावा रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए जाते हैं। नेशनल हाईवे में हादसों की रोकथाम के उद्देश्य से हाईवे पेट्रोलिंग की संख्या बढ़ाई गई है। इसके अलावा सभी जिलों की ट्रैफिक पुलिस को अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराए गए हैं। लगातार मॉनिटरिंग के कारण कई ब्लैक स्पॉट में अब हादसों की संख्या घट गई है। नए स्थानों में सुधार के लिए भी कोशिशें की जा रही हैं।

हादसों के लिए ये वजह जिम्मेदार
सभी जिलों से दुर्घटनाओं की केस स्टडी के बाद जो जानकारी सामने आई है, उसमें अनलॉक के बाद ओवर स्पीड, खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाने, शराब पीकर गाड़ी चलाने, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट की वजह से मौत हुई है। गाड़ी की खराबी की वजह से 39 हादसे हुए, जिसमें 46 की जान गई। ड्राइवर की गलती रांग साइड, नशे, मोबाइल से बात करते और हिट एंड रन के 558 मामले हुए, जिनमें 575 की जान गई। मवेशियों या अंधेरे की वजह से 42 हादसे हुए और 42 लोगों की जान चली गई।

इन 4 जिलों में बढ़ गई दुर्घटनाएं
राज्य में मुंगेली, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर में दुर्घटनाओं में मौत की संख्या बढ़ी है। पिछले साल अगस्त-सितंबर की तुलना में इस साल इन महीनों में दुर्घटना और उससे होने वाली मौत में भी वृद्धि हुई है। दोपहर बाद चार बजे से रात 9 बजे के बीच 767 लोगों की जान गई है। नेशनल हाइवे में 864, स्टेट हाइवे में 684 और अन्य रास्तों में 1610 लोगों की जान गई है। इसी तरह सबसे ज्यादा दोपहिया सवारों की जान गई है। 9 महीने में 1223 लोगों की जान गई है, जबकि कार-जीप या टैक्सी सवार 308 की मौत हुई।

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