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राज्य में मेहमान बन आए पंछी:कोसरंगी बांध में तैरते नजर आए 9 सुर्खाब, 4 दिन में राज्य में 240 प्रजातियों के पक्षियों की पहचान, इनमें 60 माइग्रेटरी बर्ड

रायपुर8 दिन पहले
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कोसरंगी बांध में तैरते सुर्खाब (रूडी शेल्डक) की ये तस्वीर बर्ड वॉचर जागेश्वर वर्मा ने क्लिक की है। - Dainik Bhaskar
कोसरंगी बांध में तैरते सुर्खाब (रूडी शेल्डक) की ये तस्वीर बर्ड वॉचर जागेश्वर वर्मा ने क्लिक की है।

आपने अक्सर ये कहावत सुनी होगी कि- उसमें कौन से सुर्खाब के पर लगे हैं...। आज हम आपको बता रहे हैं कि कोसरंगी को वास्तव में सुर्खाब के पर लग गए हैं। सुर्खाब मेहमान बनकर छत्तीसगढ़ आए हैं। खूबसूरती के लिए ये पक्षी दुनियाभर में पहचाना जाता है।

शहर से 45 किलामीटर दूर कोसरंगी बांध में 9 सुर्खाब नजर आए। बर्ड काउंट इंडिया की ओर से रखे गए ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट प्रोग्राम के दौरान बर्ड वॉचर जागेश्वर वर्मा ने सुर्खाब की तस्वीर अपने कैमरे में कैद की। इसे रूडी शेल्डक भी कहा जाता है। एक के पीछे एक नजर आ रहे 9 सुर्खाब पक्षियों का झुंड, इतनी बड़ी संख्या में कम नजर आता है।

पक्षियों की प्रजातियों की गणना के मकसद से रखे गए 4 दिन के इस कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग जिलों से शामिल हुए 50 बर्ड वॉचर्स ने 240 प्रजातियों के पक्षी कैमरे में कैद किए, जिनमें कई दुर्लभ पक्षी भी शामिल हैं। तिल्दा स्थित बांध से 15 ब्लैक स्टार्क पक्षियों का झुंड दिखा।

डोंगरगढ़ से 50 कॉमन क्रेन का झुंड नजर आया। इन्हें यूरेशियन क्रेन भी कहा जाता है। प्रवासी पक्षियों में यूरेशियन विजन, नॉदर्न शॉवलर, नॉदर्न पिनटेल, गार्गेनी, टैगा फ्लाईकैचर, वर्डिटर फ्लाईकैचर, वुली नेक्ड स्टार्क, ब्लूथ्रोट, ब्लैक रेडस्टार्ट, ट्री पीपिट, ऑलिव बैक्ड पीपिट जैसे पक्षी भी राज्य में नजर आए। बर्ड वॉचर जागेश्वर वर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत राज्य में 60 प्रजातियों के माइग्रेटिव बर्ड्स की फोटोज आईं हैं। उन्होंने बताया, ये कार्यक्रम हर साल फरवरी में पूरे देश में रखा जाता है। विश्व में बर्ड काउंट के मामले में हमारा देश दूसरे स्थान पर है।

सुर्खाब (रूडी शेल्डक)
यह ऑरेंज, ब्राउन कलर का पक्षी है, जिसका सिर हल्के पीले रंग का होता है। गले में काले रंग का छल्ला व काले रंग की पूंछ होती है। यह उत्तरी यूरोप और रूस से आते हैं। कुछ क्षेत्रों में इसे सुर्खाब भी कहते हैं। ये चकवा-चकवी के जोड़े के तौर पर भी पहचाना जाता है। बर्ड वॉचर राहुल सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ में इसे गोनिन गोना भी कहते हैं। इस पक्षी की सबसे खास बात ये है कि ये जोड़े में ही नजर आता है।

रायपुर के 5 स्पॉट्स में देखे गए 217 प्रजातियों के पक्षी
रायपुर के पांच स्पॉट्स पर फोटोग्राफी और पक्षी अवेयरनेस प्रोग्राम रखा गया। इस दौरान 217 प्रजाति के पक्षी देखे गए। डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में सबसे ज्यादा 70, जंगल सफारी नया रायपुर में 63, माेहरेंगा नेचर सफारी में 45, कोसरंगी डैम से 61, देवर तिल्दा में 67 प्रजातियों के पक्षी देेखे गए। बात करें अन्य जिलों की तो दंतेवाड़ा में 107, बिलासपुर में 97 प्रजातियों के पक्षियों की पहचान की गई। कुम्हारी डैम में 55 प्रजातियों के पक्षी पाए गए।

ब्लैक स्टार्क
ये उत्तरी यूरोप और रूस से आते हैं। ये आसपास के क्षेत्रों में तो नजर आते थे, लेकिन रायपुर में कुछ सालों बाद दिखाई दिए हैं। तिल्दा क्षेत्र के जलसो बांध में डॉ. दिलीप वर्मा ने 15 पक्षियों के झुंड की तस्वीर अपने कैमरे में कैद की। लगभग एक मीटर ऊंचा ये पक्षी ब्लैक कलर का होता है। सामने गले से छाती तक का हिस्सा सफेद रंग का होता है। चोंच और पैर सूर्ख लाल रंग के होते हैं।

ये बहुत शर्मीला पक्षी माना जाता है। अामतौर प ये कहीं रुके बिना लंबा सफर तय कर एक जगह पर पहुंचता है। ये ठंड में राज्य में लगभग तीन महीने तक रुकता है। ठंड खत्म होते ही वापस लौट जाता है। बर्ड वॉचर जागेश्वर वर्मा ने दावा किया कि 15 पक्षियों के ग्रुप में ये बहुत कम देखने मिला है।

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