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मिट्‌टी में दबने से तीन मजदूरों की मौत:कुएं में काम के दौरान मिट्टी धंसने से दबे थे तीनों, 24 घंटे तक चला रेस्क्यू; तीन अन्य श्रमिकों ने जैसे-तैसे खुद बचाई जान

सूरजपुर2 महीने पहले
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हादसे में मारे गए तीनों मजदूर धरसेड़ी के रहने वाले थे। उनकी पहचान नाम साय, दागेंद्र और सजन सिंह के रूप में की गई है।  - Dainik Bhaskar
हादसे में मारे गए तीनों मजदूर धरसेड़ी के रहने वाले थे। उनकी पहचान नाम साय, दागेंद्र और सजन सिंह के रूप में की गई है। 

सूरजपुर जिले के ओड़गी ब्लॉक के धरसेड़ी गांव में शनिवार को एक हादसा हो गया। शाम के वक्त यहां बन रहे कुएं की मिट्‌टी धसकने से अंदर तीन मजदूर फंस गए। करीब 24 घंटे तक चले रेस्क्यू के बाद भी तीनों को नहीं बचाया जा सका। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सूरजपुर कलेक्टर को तीनों मृत श्रमिकों के परिजन को 5.25-5.25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने को कहा है।

उधर, हादसे के बाद एक मजदूर का शव रविवार सुबह 6 बजे तो दूसरे का दोपहर करीब 3 बजे मिला। वहीं शाम करीब 6:30 बजे तीसरे का भी शव बरामद कर लिया गया। सूचना के बाद घटनास्थल पर जिला प्रशासन की 3 JCB राहत कार्य में जुटी थी। हादसे के वक्त कुएं में 6 मजदूर काम कर रहे थे। मिट्टी धंसने के बाद तीन ने तो जैसे-तैसे खुद को बचा लिया। मगर बाकी के तीन अंदर ही फंस गए।

घटनास्थल पर जुटी ग्रामीणों की भीड़।
घटनास्थल पर जुटी ग्रामीणों की भीड़।

रोटी की खातिर गया मिली मौत
हादसे में मारे गए तीनों मजदूर धरसेड़ी के रहने वाले थे। उनकी पहचान नाम साय, दागेंद्र और सजन सिंह के रूप में की गई है। तीनों रोजी-रोटी की आस में कुएं का काम करने आए थे। मनरेगा के प्रोजेक्ट के तहत ये कुआं खोदा जा रहा था। मकसद था कि ग्रामीणों की प्यास बुझे और पानी के जरिए जिंदगी चले। मगर इस कुएं के निर्माण में हुए हादसे ने तो श्रमिकों की जिंदगी छीन ली। हादसे की सूचना के बाद घटनास्थल के आस-पास के गांव के लोगों की भीड़ जमा हो गई थी।

कुएं के पास से खुदाई कर श्रमिकों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया।
कुएं के पास से खुदाई कर श्रमिकों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया।

इस वजह से हुआ हादसा
धरसेड़ी में बन रहे कुएं के अंदरूनी हिस्से को पक्का किया जा रहा था। 6 श्रमिकों को नीचे उतार कर काम करवाया जा रहा था। पिछले दो दिनों इस इलाके में बारिश हुुई है। अंदर चल रहे काम की वजह से कुएं के ऊपरी हिस्से की मिट्‌टी धंस गई। अब ये सवाल भी उठ रहे हैं कि इस रिस्क को क्या समझा ही नहीं गया और अगर पहले ही मिट्‌टी गिली थी तो फिर अंदर काम करने का जोखिम किसके कहने पर लिया गया, अफसर इसकी जांच कर रहे हैं।