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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:RT-PCR की निगेटिव रिपोर्ट पर ही एंट्री, पर लक्षण दिखे तो होना पड़ेगा आइसोलेट; आंध्र प्रदेश में कोरोना का नया वैरिएंट मिलने के बाद सड़क से जंगल तक नजर

​​​​​​​जगदलपुर3 महीने पहलेलेखक: लोकेश शर्मा
पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में कोरोना का नया वैरिएंट मिलने के बाद बस्तर के बीजापुर और सुकमा जिले में अलर्ट कर दिया गया है।

पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में कोरोना का नया वैरिएंट मिलने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार अलर्ट पर है। बस्तर के बीजापुर और सुकमा जिले की सीमाएं आंध्र प्रदेश से मिलती हैं। ऐसे में यहां पर खास सतर्कता बरती जा रही है। प्रदेश में प्रवेश करने से पहले 72 घंटे की RT-PCR की निगेटिव रिपोर्ट होना जरूरी है। इसके बाद भी अगर लक्षण दिखाई दिए तो आइसोलेट होना पड़ेगा। प्रशासन की इन तैयारियों को लेकर दैनिक भास्कर ने ग्राउंड रिपोर्ट की।

बीजापुर के तिमेड और तारलागुड़ा में 3 राज्यों से लगती है सीमा
बीजापुर जिले से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र राज्यों की सीमा लगती है। यहां पर ही प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इसके नक्सल प्रभावित क्षेत्र तिमेड और तारलागुड़ा में चेकपोस्ट बनाया गया है। तिमेड में महाराष्ट्र की ओर से, तो तारलागुड़ा में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से लोग छतीसगढ़ में प्रवेश कर रहे हैं। तीनों चेकपोस्ट हाईवे पर है। यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है। गांव जाने देने से पहले उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है।

बीजापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र तिमेड और तारलागुड़ा में चेकपोस्ट बनाया गया है। तिमेड में महाराष्ट्र की ओर से, तो तारलागुड़ा में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से लोग छतीसगढ़ में प्रवेश कर रहे हैं।
बीजापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र तिमेड और तारलागुड़ा में चेकपोस्ट बनाया गया है। तिमेड में महाराष्ट्र की ओर से, तो तारलागुड़ा में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से लोग छतीसगढ़ में प्रवेश कर रहे हैं।

मुख्य मार्ग से ज्यादा जंगल और ग्रामीण अंचलों में है नजर
बीजापुर कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने बताया कि आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र से ज्यादातर लोग जंगले के रास्ते से होकर ही जिले में प्रवेश करते हैं। पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। इस बार गांवों की सीमा में भी टीम तैयार है। ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है कि, गांव में आने वाले व्यक्ति की जानकारी दें। तेलंगाना के चेरला गांव से पामेड़ बेहद नजदीक है। वहीं बेदरे की सीमा महराष्ट्र से लगी है। दोनों ही क्षेत्र नक्सल प्रभावित हैं। ग्रामीण ज्यादातर इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते हैं।

सुकमा कलेक्टर चेकपोस्ट से निकलने वाले लोगों से पूछ रहे- कहां जा रहे हो भाई
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा से लगा दक्षिण बस्तर का दूसरा जिला सुकमा है। यहां भी हाइवे पर चेकपोस्ट बनाया गया है। कर्मचारियों के साथ खुद सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार भी वहां मौजूद रहे। कोंटा के चेकपोस्ट से गुजर रहे लोगों से कलेक्टर ने पूछ रहे हैं कि कहां जा रहे हो भाई। सारी जानकारी स्पष्ट होने के बाद ही उसे एंट्री दी जा रही है। अगर किसी के पास निगेटिव रिपोर्ट है और लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे आइसोलेट किया जा रहा है।

सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार कोंटा हाईवे पर बनाई गई चेकपोस्ट पर खुद मौजूद रहे। इस दौरान वहां से निकल रहे लोगों से वह खुद भी जानकारी ले रहे थे।
सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार कोंटा हाईवे पर बनाई गई चेकपोस्ट पर खुद मौजूद रहे। इस दौरान वहां से निकल रहे लोगों से वह खुद भी जानकारी ले रहे थे।

40 हजार से ज्यादा ग्रामीण मिर्ची तोड़ने जाते हैं आंध्र प्रदेश
दक्षिण बस्तर के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों के करीब 40 हजार से ज्यादा ग्रामीण मजदूरी के लिए मिर्ची तोड़ने आंध्र प्रदेश जाते हैं। साल 2020 में कोरोना ने देश में दस्तक दी थी और लॉकडाउन लगा, उस समय भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने वापसी की थी। इनमें से ज्यादातर ग्रामीण अंदरूनी व नक्सलगढ़ इलाकों के थे। कुछ माह पूर्व ग्रामीण फिर मिर्ची तोड़ने आंध्रप्रदेश गए थे। अब एक बार फिर कोरोना के नए वैरिएंट का पता चलने के बाद आंध्र प्रदेश से उनकी वापसी गांवों में हो रही है।

मौजूदा स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक
सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में मौजूदा स्ट्रेन के मुकाबले नया वैरिएंट 15 गुना ज्यादा खतरनाक है। चिंता की बात ये है कि यह वैरिएंट अच्छी इम्यूनिटी वाले लोगों को भी चपेट में ले रहा है। नए वैरिएंट से संक्रमित होने वाले मरीज 3-4 दिनों में हाइपोक्सिया या डिस्पनिया के शिकार हो जाते हैं। इस स्थिति में सांस मरीज के फेफड़े तक पहुंचना बंद हो जाती है। सही समय पर इलाज और ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं मिलने पर मरीज की मौत हो जाती है।

दक्षिण बस्तर के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों के करीब 40 हजार से ज्यादा ग्रामीण मजदूरी के लिए मिर्ची तोड़ने आंध्र प्रदेश जाते हैं।
दक्षिण बस्तर के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों के करीब 40 हजार से ज्यादा ग्रामीण मजदूरी के लिए मिर्ची तोड़ने आंध्र प्रदेश जाते हैं।

कुरनूल में हुई पहचान, इसके बाद तेजी से फैला
'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वायरस आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम समेत दूसरे हिस्सों में फैल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सबसे पहले इस स्ट्रेन की पहचान आंध्र प्रदेश के कुरनूल में हुई थी। दक्षिण भारत में अब तक कोरोना के 5 वैरिएंट मिल चुके हैं। आंध्र प्रदेश में मिला कोरोना वायरस का नए स्ट्रेन को AP Strain और N440K नाम दिया गया है। AP स्ट्रैन आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में काफी तेजी से फैल रहा है। इसका असर महाराष्ट्र में भी देखा जा रहा है।

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