घूसखोरी में महिला पटवारी सस्पेंड:जमीन नामांतरण के लिए मांगे रुपए, कहा- 2000 दे देना, जो दिए थे ऊपर दे आई हूं, बाकी दे दोगे तो काम जल्दी हो जाएगा

अंबिकापुर4 महीने पहले
महिला पटवारी ने कहा कि जो पहले दिए थे वह तो ऊपर वालों को दे दिए। अब जल्दी काम कराना है तो और देने पड़ेंगे। 

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में घूसखोरी का एक वीडियो सामने आने के बाद महिला पटवारी को सस्पेंड कर दिया गया। जमीन नामांतरण के लिए महिला पटवारी एक ग्रामीण से रुपयों की मांग कर रही थी। उससे पहले भी पटवारी ने रुपए लिए थे, फिर से कह रही थी कि 2000 दे देना। जो पहले दिए थे, उसे ऊपर दे आई हूं। बाकी दे दोगे तो काम जल्दी हो जाएगा। ग्रामीण ने अपने साथियों के साथ मिलकर इसका वीडियो बना लिया। मामला लूंड्रा तहसील क्षेत्र का है।

रसौली क्षेत्र के एक ग्रामीण को बी-1 में नाम सुधरवाना था और जमीन का नामांतरण कराना था। इसके लिए महिला पटवारी पूनम टोप्पो से संपर्क किया। महिला पटवारी ने ग्रामीण को मिलने के लिए बुलाया और उससे रुपयों की मांग की। इस पर ग्रामीण ने फिर से रुपए देने की बात पूछी तो महिला पटवारी ने कहा कि जो पहले दिए थे वह तो ऊपर वालों को दे दिए। अब जल्दी काम कराना है तो और देने पड़ेंगे।

महिला पटवारी और ग्रामीण के बीच हुई बातचीत

  • पूनम टोप्पो : कल से छुट्टी पर जा रही हूं। मैं नहीं मिलूंगी तो फिर तुम्हारा काम अटक जाएगा। वहीं दिन अच्छे से करा देता तो काम हो जाता। आज भी मैं नहीं आने वाली थी। तुम्हारे काम के लिए ही ऑफिस आई हूं, वरना आज नहीं आती।
  • ग्रामीण : कितना देना पड़ेगा?
  • पूनम टोप्पो : तुमको बताया तो था। दू ठन दे देना।
  • ग्रामीण : हैं?
  • पूनम टोप्पो : बार-बार एक ही बात पूछते हो।
  • ग्रामीण : फिर से देना होगा क्या 2000? बहुत ज्यादा बोल रही हैं।
  • पूनम टोप्पो : जितना दिए थे, उतना तो ऊपर दे आई हूं। सर, नहीं मान रहे थे। कहा कि कर दीजिए सर। फिर इसके लिए नहीं आऊंगी दोबारा। तब लास्ट टाइम पर किया है।

वीडियो सामने आने के बाद कलेक्टर ने शाम को सस्पेंड किया
ग्रामीण ने रुपयों के लेनदेन की बातचीत का वीडियो बना लिया और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद कलेक्टर संजीव झा ने मंगलवार शाम महिला पटवारी पूनम टोप्पो को सस्पेंड कर दिया। बातचीत में रुपयों को ऊपर तक देने की बात सामने आने पर मामले की जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि वीडियो बनाने वाला ग्रामीण कौन है और पहले कितने रुपए दिए गए।

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