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दिव्यांग केंद्र में बच्चियों से दरिंदगी:रोज शराब पीकर आते थे कर्मचारी, पता होने पर भी अफसरों ने कुछ नहीं किया, सरकारी नियम भी दरकिनार; BJP की कमेटी करेगी जांच

जशपुर2 महीने पहले
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DMC विनोद पैंकरा कहते हैं कि वह 22 सितंबर को रायपुर प्रशिक्षण में थे। जो आरोप लगे हैं, वैसा कुछ नहीं है। जांच में सब सामने आ जाएगा। - Dainik Bhaskar
DMC विनोद पैंकरा कहते हैं कि वह 22 सितंबर को रायपुर प्रशिक्षण में थे। जो आरोप लगे हैं, वैसा कुछ नहीं है। जांच में सब सामने आ जाएगा।

छत्तीसगढ़ के जशपुर स्थित समर्थ दिव्यांग केंद्र में मूक-बधिर बच्चियों से दरिंदगी के बाद चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। केंद्र में सरकारी नियम ही ताक पर थे। छात्र-छात्राओं को एक ही कैंपस में रखा जाता था और रात में महिला के नाम पर बच्चियों के लिए सिर्फ एक स्वीपर होती। दैनिक भास्कर की पड़ताल में पता चला कि आरोपी कर्मचारी अक्सर ही शराब पीकर आते थे। अफसरों को भी इसका पता था, पर शिकायत के बावजूद उन्होंने कार्रवाई नहीं की। अब कह रहे हैं कि जांच में सब पता चल जाएगा।

करीब 10 माह पहले लोदाम से समर्थ दिव्यांग केंद्र को जिला मुख्यालय के पास शिफ्ट किया गया था। आरोपी दोनों कर्मचारी चौकीदार नरेंद्र भगत और केयर टेकर राजेश राम काफी समय से यहां काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि चौकीदार नरेंद्र तो आए दिन शराब पीकर ही हॉस्टल में घुसता था। केंद्र में पदस्थ कर्मचारी बताते हैं कि विभाग के अफसरों को कई बार चौकीदार के शराब पीकर हॉस्टल आने की शिकायत मौखिक रूप से की गई थी। उसे हटाने की मांग भी हुई, पर अफसरों ने ध्यान नहीं दिया।

आरोपी कर्मचारी अक्सर ही शराब पीकर आते थे। अफसरों को भी इसका पता था, पर शिकायत के बावजूद उन्होंने कार्रवाई नहीं की।
आरोपी कर्मचारी अक्सर ही शराब पीकर आते थे। अफसरों को भी इसका पता था, पर शिकायत के बावजूद उन्होंने कार्रवाई नहीं की।

कार्रवाई नहीं हुई तो आरोपियों का हौसला बढ़ता गया
आरोपी दोनों कर्मचारियों को पता चल चुका था कि शराब पीकर हॉस्टल में रहने का पता अफसरों को लग गया है। वह यह भी जानते थे कि शिकायत की गई है, लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई तो उनका हौसला बढ़ता चला गया। यही वजह है कि 22 सितंबर की रात चौकीदार और केयर टेकर ने हॉस्टल में शराब पीने के बाद वारदात को अंजाम दिया। घटना के समय हॉस्टल में 24 बच्चे और 14 बच्चियां थीं। यहां पहली से 8वीं तक के दिव्यांग बच्चों को सांकेतिक भाषा में पढ़ाने और कौशल विकास की सुविधा दी गई है।

10 साल पहले भी हो चुकी है वारदात
जिले में हॉस्टल में रह रही छात्रा के साथ रेप की यह दूसरी बड़ी वारदात है। इससे पहले वर्ष 2011 में मनोरा विकासखंड के ग्राम गुतकिया में ऐसी वारदात सामने आई थी। उस वक्त हॉस्टल अधीक्षक के पति ने पहाड़ी जनजाति संवर्ग की एक छात्रा के साथ कई दिनों तक अनाचार किया था। अनाचार की शिकार पहाड़ी कोरवा छात्रा जब गर्भवती हो गई थी तब घटना पर से पर्दा उठ पाया था। मामले को लेकर हॉस्टल अधीक्षिका से लेकर बीईओ तक कार्रवाई की गाज गिरी थी।

46 बच्चों का हॉस्टल, 13 स्टाफ पदस्थ
दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने व उनके कौशल विकास के लिए राजीव गांधी शिक्षा मिशन की ओर से साल 2017-18 में केंद्र को फिर से शुरू किया गया था। यह पूर्व कलेक्टर की विशेष पहल पर शुरू हुआ था। दिव्यांग बच्चों के लिए योजना 2012 में बनी थी। इस हॉस्टल में जिले भर के 46 दिव्यांग बच्चों की दर्ज संख्या है। इसमें 26 बालक व 20 बालिकाएं हैं। हॉस्टल में 13 स्टाफ है, जिसमें 4 विशेष शिक्षक, एक-एक कंम्प्यूटर ऑपरेटर, कंप्यूटर शिक्षक, रसोइया, सहायक रसोईया, 2 केयर टेकर, 2 स्वीपर और एक चौकीदार शामिल थे।

छात्रावासों के लिए मांगा महिला होमगार्ड
जिले में छात्राओं की आवासीय शिक्षा के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग की ओर से 85 आश्रम और छात्रावास संचालित हैं। इसमें विशिष्ट छात्रावास, पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास, प्री मैट्रिक कन्या छात्रावास, प्राथमिक कन्या छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। हालांकि दिव्यांग केंद्र शामिल नहीं है। अफसरों के मुताबिक सभी कन्या छात्रावासों में हॉस्टल अधीक्षक से लेकर चपरासी व रसोइया तक महिलाएं पदस्थ की गई हैं। दिव्यांग केंद्र की इस घटना के बाद अब विभाग के सहायक आयुक्त ने पुलिस को पत्र लिखकर सभी गर्ल्स हॉस्टल में महिला होमगार्ड की मांग की है।

BJP ने मामले की जांच के लिए बनाई कमेटी
BJP ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि घटना को लेकर BJP जांच कमेटी गठित कर रही है। सांसद गोमती साय ने कहा कि यह घटना घोर निंदनीय है। बेटियां सरकार के संरक्षण में हॉस्टल में भी सुरक्षित नहीं है। बाहर की बात करना ही बेमानी है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। बीते ढाई साल में प्रदेश भर में शिक्षा का स्तर बेहद गिर चुका है।

अब जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अफसर
इस संबंध में DEO सत्यनारायण पांडा का कहना था कि वह रायपुर में हैं। घटना की जानकारी उनको मिली है। शिक्षकों की स्थिति वहां क्या थी, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा। मुझे गए हुए अभी 4 दिन ही हुए हैं। DMC मामले को देख रहे हैं। वहीं DMC विनोद पैंकरा कहते हैं कि वह भी 22 सितंबर को रायपुर प्रशिक्षण में थे। बात सामने आई तो निर्देश दिए थे। उस वक्त यह पता नहीं चल पाया था कि इतनी बड़ी घटना हुई है। उनका कहना है कि जो आरोप उनके ऊपर लगे हैं वैसा कुछ नहीं है। जांच में सब सामने आ जाएगा।

केंद्र में एक बच्ची से दुष्कर्म और 5 का किया गया था यौन उत्पीड़न
समर्थ दिव्यांग केंद्र में 22 सितंबर की रात करीब 11 बजे शराब के नशे में धुत केयर टेकर राजेश राम और चौकीदार नरेंद्र भगत ने मूक-बधिर बच्चों से मारपीट और अश्लील हरकतें की। उनके कपड़े फाड़ दिए। बच्चे जान बचाने के लिए नग्न हालत में कैंपस में भागते रहे। चौकीदार ने 15 साल की एक बच्ची से दुष्कर्म किया। जबकि 5 बच्चियों से यौन उत्पीड़न किया गया। केंद्र का संचालन खनिज न्यास मद के तहत राजीव गांधी शिक्षा मिशन की ओर से किया जाता है। 3 दिन बाद केंद्र के अधीक्षक संजय राम को निलंबित और जिला समन्वयक विनोद पैंकरा को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है।

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