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  • Chhattisgarh Cooperative Society Peon Rs 8 Lakh Fraud; Raigarh District Police Seized Cash And Bike From His House

चपरासी ने कर दिया 8 लाख का फ्रॉड:किसानों को डेबिट कार्ड देने की जगह, खुद ही रजिस्टर में एंट्री कर एक्टिवेट किए, फिर ATM से निकाले रुपए; धान विक्रय से मिले थे

रायगढ़2 महीने पहले
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धनीराम ने बताया कि रुपए निकालने के दौरान उसे आभास हुआ कि किसानों के मोबाइल पर ट्रांजैक्शन का मैसेज नहीं आता है। उसने दो साल में रुपए निकाले और अपने घर में छिपा दिए। - Dainik Bhaskar
धनीराम ने बताया कि रुपए निकालने के दौरान उसे आभास हुआ कि किसानों के मोबाइल पर ट्रांजैक्शन का मैसेज नहीं आता है। उसने दो साल में रुपए निकाले और अपने घर में छिपा दिए।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक सहकारी समिति के चपरासी ने 8 लाख रुपए का फ्रॉड कर दिया। शातिर चपरासी से किसानों को डेबिट कार्ड देने की जगह खुद ही उसे एक्टिवेट कर ATM से रुपए निकाल लिए। बिना OTP के खाते से रुपए निकलने पर किसानों ने बैंक कर्मचारियों पर संदेह जताया तो जूटमिल चौकी पुलिस आरोपी तक पहुंची। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उसके घर से ATM से निकाली गई रकम और बाइक बरामद की है।

जानकारी के मुताबिक, ग्राम तरकेला निवासी हीरालाल चौधरी (66) ने ATM से 5,45,510 रुपए और ग्राम ननसिया निवासी अश्वनी कुमार पटेल (61) ने 2.5 लाख रुपए निकाले जाने का मामला दर्ज कराया था। इसमें बताया कि उनका खाता छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) में है। उनको बैंक की ओर से पासबुक मिली है, लेकिन डेबिट कार्ड नहीं मिला है। खाते में हर साल धान विक्रय की राशि जमा होती है।

मोबाइल पर न मैसेज आया न कोई OTP
दोनों किसानों ने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल पर किसी तरह का कोई मैसेज नहीं आया और न ही कोई OTP ही आया। इसके बाद भी उनके खाते से रुपए निकल गए। इस पर दोनों किसानों ने बैंक व सेवा सहकारी समिति के कर्मचारियों और पदाधिकारियों पर मिलीभगत का संदेह जताते हुए उनके खाते से राशि का गबन करने का आरोप लगाया। दोनों किसानों के खाते से ATM के जरिए कुल 7,95,510 रुपए निकाले गए थे।

CCTV फुटेज से आरोपी तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने प्रबंधक और कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ ही CCTV फुटेज की जांच की। इसमें सेवा सहकारी में चपरासी धनीराम पटेल की भूमिका संदिग्ध लगी। इस पर उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो बताया कि 2009 से वह समिति में संविदा पर है। खाताधारकों को डेबिट कार्ड देने, रजिस्टर में नाम दर्ज कर कार्ड एक्टिवेट करना वह जानता है। ऐसे में उसने दोनों किसानों के कार्ड रख लिए और रुपए निकालना शुरू कर दिया।

दो साल में निकाले रुपए, मोबाइल पर मैसेज नहीं आने से बढ़ी हिम्मत
धनीराम ने पुलिस को बताया कि रुपए निकालने के दौरान उसे आभास हुआ कि किसानों के मोबाइल पर ट्रांजैक्शन का मैसेज नहीं आता है। इसे देखते हुए उसने दो साल के दौरान कई बार में रुपए निकाले और अपने घर में छिपा दिए। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर घर में छिपाई गई ATM से निकाली गई सारी रकम, वारदात में प्रयुक्त बाइक व अन्य सामान बरामद कर लिया है। उसने किसी और के शामिल होने की बात से इनकार किया है।

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