• Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Chhattisgarh Coronavirus; Hospital Blood Medicine Group Delivers 300 Free Oxygen Cylinders In Gariaband GPM District

महामारी में मिसाल बने युवा:GPM में फ्री ऑक्सीजन उपलब्ध करा रहा हॉस्पिटल ब्लड मेडिसिन ग्रुप, अब तक 300 से ज्यादा सिलेंडर दिए; गरियाबंद में अंतिम यात्रा में कर रहे मदद

​​​​​​​गरियाबंद/पेंड्रा7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
यह तस्वीर गरियाबंद की है। जहां नि:शुल्क शव वाहन के जरिए परिजनों की मदद की जा रही है। - Dainik Bhaskar
यह तस्वीर गरियाबंद की है। जहां नि:शुल्क शव वाहन के जरिए परिजनों की मदद की जा रही है।

एक ओर जब मरीज ऑक्सीजन के लिए तरस रहे हैं। हर ओर हाहाकार मचा है। मरने के बाद भी शवों काे श्मशान और कब्रिस्तान नहीं मिल रहा। ऐसे में छत्तीसगढ़ में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले और गरियाबंद के युवक महामारी में मिसाल बन गए हैं। GPM में जहां युवाओं का संगठन हॉस्पिटल ब्लड मेडिसिन ग्रुप 20 दिन में 300 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर मुफ्त उपलब्ध करा चुका है। वहीं, गरियाबंद में युवा नि:शुल्क शव वाहन उपलब्ध करा रहे हैं।

GPM : ग्रुप ने जारी किया है मोबाइल नंबर, हर रोज दे रहे 15 ऑक्सीजन सिलेंडर

पेंड्रा का हॉस्पिटल ब्लड मेडिसिन ग्रुप मरीजों को लगातार फ्री ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करा रहा है। इमरजेंसी के लिए ग्रुप ने दो मोबाइल नंबर 9479119444 और 91315 25177 जारी किए हैं। इस पर कॉल कर जरूरतमंद नि:शुल्क ऑक्सीजन सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। 10 अप्रैल से करीब 15 सिलेंडर रोज लोगो की मदद के लिए पहुंचाए जा रहे हैं। अब तक 300 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर दे चुके हैं। संस्था के पास सहयोग से 35 सिलेंडर और 1 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेशन भी है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद उनकी वैनिटी वैन पत्नी रेणु जोगी ने ग्रुप को दान कर दी है। अब वह वैनिटी वैन ग्रुप के पास एंबुलेंस के रूप में काम कर रही है।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद उनकी वैनिटी वैन पत्नी रेणु जोगी ने ग्रुप को दान कर दी है। अब वह वैनिटी वैन ग्रुप के पास एंबुलेंस के रूप में काम कर रही है।

स्थानीय दुकानदार रीफिलिंग के लिए नहीं लेते इनसे कोई चार्ज

यह ग्रुप कई वर्षों से जरूरतमंदों को फ्री में ब्लड उपलब्ध करा रहा है। अब कोरोना संक्रमण काल में मरीजों को प्राणवायु देने का बीड़ा भी उठा लिया है। ग्रुप के सदस्य होम आइसोलेशन या क्वारैंटाइन होने वाले जरूरतमंद मरीज को मुफ्त ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराते हैं। इनकी सेवा भावना के चलते स्थानीय लोगों ने ऑक्सीजन सिलेंडर दान किए हैं। खास बात यह है कि इनको देखकर स्थानीय दुकानदारों ने भी ऑक्सीजन सिलेंडर की फ्री रीफिलिंग शुरू कर दी है।

पूर्व CM जोगी की वैनिटी वैन बनी ग्रुप की एंबुलेंस

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद उनकी वैनिटी वैन पत्नी रेणु जोगी ने ग्रुप को दान कर दी है। इसी वैन में पूर्व मुख्यमंत्री जोगी सफर किया करते थे। अब वह वैनिटी वैन ग्रुप के पास एंबुलेंस के रूप में काम कर रही है। फिलहाल इस ग्रुप के पास दो मिनी एंबुलेंस और एक बड़ी एंबुलेंस है। इन्हें प्रभावित और संक्रमित मरीजों को बिलासपुर, रायपुर, मध्य प्रदेश या महाराष्ट्र और देश के अन्य जगहों पर भेजने के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

पेंड्रा का हॉस्पिटल ब्लड मेडिसिन ग्रुप मरीजों को लगातार फ्री ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करा रहा है। ग्रुप ने दो मोबाइल नंबर 9479119444 और 91315 25177 जारी किए हैं।
पेंड्रा का हॉस्पिटल ब्लड मेडिसिन ग्रुप मरीजों को लगातार फ्री ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करा रहा है। ग्रुप ने दो मोबाइल नंबर 9479119444 और 91315 25177 जारी किए हैं।

गरियाबंद : किराए पर लेकर नि:शुल्क शव वाहन उपलब्ध करा रहे युवा

गरियाबंद में 20 अप्रैल से पहले तक एक मात्र शव वाहन मुक्तांजली (डायल 119) से संचालित था। इससे जिला अस्पताल, कोविड अस्पताल के अलावा आसपास के ब्लॉक तक निर्भर थे। कोरोना से मौत का आंकड़ा बढ़ा तो शव ले जाने के लिए प्राइवेट वाहन 50 किमी का 30 हजार तक वसूल रहे थे। ऐसे में जिले के 7 युवा सन्नी मेमन, पालिकाध्यक्ष गफ्फार मेमन, आबिद ढेबर, मैनपुर के नीरज हेमंत सांग, डॉक्टर हरीश चौहान और चंद्रभूषण चौहान आगे आए। अब वे किराए पर शव वाहन मंगाकर लोगों के लिए मुफ्त सेवा मुहैया करा रहे हैं।

शिक्षक की मौत पर परिजनों को भटकते देखा तो शव वाहन की व्यवस्था की

जिले में 15 अप्रैल को मैनपुर के शिक्षक अजय ध्रुव की मौत हो गई। उनके परिजनों को शव वाहन के लिए भटकता देख इन युवाओं ने व्यवस्था की। किराये पर मंगाया गया शव वाहन अब भी लोगों को फ्री सेवा दे रहा है। इसका पूरा खर्च ये युवा ही उठाते हैं। हालांकि जिले के देवभोग, छुरा और मैनपुर ब्लॉक के लिए 3 शव वाहन प्रशासन ने 23 अप्रैल को उपलब्ध करा दिए, पर उनके लिए चालक की व्यवस्था नहीं होने से उनका संचालन भी अब तक शुरू नहीं हो सका है।

अंतिम सफर में शव वाहन और मुक्तांजलि के ड्राइवर हरकू राम और गुलशन कुमार भागीदार बन रहे हैं। दोनों 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अंतिम सफर में शव वाहन और मुक्तांजलि के ड्राइवर हरकू राम और गुलशन कुमार भागीदार बन रहे हैं। दोनों 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शव वाहन और मुक्तांजलि के ड्राइवर 24 घंटे दे रहे सेवा

अंतिम सफर में शव वाहन और मुक्तांजलि के ड्राइवर हरकू राम और गुलशन कुमार भागीदार बन रहे हैं। संक्रमित शवों को ले जाने में वह किसी हीरो से कम नहीं हैं। हरकू राम 20 अप्रैल से अब तक 1000 किमी से ज्यादा का सफर तय कर चुके होंगे। उन्होंने 10 से ज्यादा शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के सुपुर्द किया। वहीं मुक्तांजलि के गुलशन कुमार 7500 के मासिक वेतन पर 24 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। यह रकम कलेक्टर दर से भी कम है।

खबरें और भी हैं...