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  • Chhattisgarh Gariyaband Covid 19 News: Cremation Of Old Man Body After 50 Hours Due To Insensitivity Of Corona Infection

बेटे नहीं आए, दो दिन मर्च्यूरी में पड़ा रहा शव:121 KM दूर शव भेजने के लिए अस्पताल ने परिजनों के आने की शर्त रखी, संक्रमित परिवार ने मना किया तो 50 घंटे बाद हो सका अंतिम संस्कार

​​​​​​​गरियाबंद6 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के बीच संवेदनहीनता के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। गरियाबंद में संक्रमण से वृद्ध की मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने पहले तो 121 किमी दूर शव भेजने के लिए परिजनों के आने की शर्त रख दी। संक्रमित परिवार ने अपने हालात का हवाला देते हुए जाने से मना कर दिया। प्रशासन की टीम अस्पताल पहुंची तो मॉर्चुरी से शव वाहन में रखने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। फिर किसी तरह 50 घंटे बाद रात 9 बजे अंतिम संस्कार किया जा सका।

देवभोग के बरबहली गांव निवासी जयराम नेताम (64) को कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराया गया था। वहां तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो रविवार को गरियाबंद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद शाम को उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने शव को गांव भेजने के लिए परिवार के किसी सदस्य के आने की शर्त रखी। इस पर बेटे भारत और परमानंद ने बताया कि परिवार के सभी 6 सदस्य पॉजिटिव हैं। उनकी आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है।

प्रशासन की टीम सुबह पहुंची, रात 8 बजे शव मिला

दोनों बेटों ने सोमवार शाम को लिखित रूप से प्रशासन को कहा कि वे शव ले जाने और अंतिम संस्कार करने में सक्षम नहीं हैं। उसी रात SDM आशीष टोप्पो ने देवभोग तहसीलदार समीर शर्मा को अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सौपी। आदेश के मुताबिक मंगलवार को नायब तहसीलदार अभिषेक अग्रवाल तीन अन्य राजस्व कर्मियों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। वहां घंटों की मशक्कत के बाद रात 8 बजे शव मिला तो अंतिम संस्कार किया जा सका।

पालिका का स्वीपर शव छोड़कर भागा, प्राइवेट बुलाया गया

जिला अस्पताल की मॉर्चुरी से शव को वाहन तक ले जाने के लिए कोई स्वीपर नहीं मिल रहा था। शव वाहन का ड्राइवर 4 बजे पहुंचा तो नगर पालिका के जिस स्वीपर की ड्यूटी थी वह शव छोड़कर भाग गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में निर्माण काम कर रहे एका प्लेसमेंट एजेंसी के स्वीपर को रात 8 बजे अस्पताल बुलाया गया। उसने शव को वाहन तक पहुंचाया। वहीं सिविल सर्जन जीएस टंडन ने कहा, स्वीपर भी है, ड्राइवर भी है। हमने पूरा सहयोग किया।

टीम समय पर गरियाबंद पहुंच गई थी। निर्धारित स्थल पर चिता और अन्य जरूरी सामान का प्रबंध भी करवा लिया गया था। कई घंटे बाद भी शव नहीं मिला। फिर शाम 7.30 बजे बारिश भी शुरू हो गई। इस पर टीम लौटने लगी। रात करीब 8.30 बजे किसी तरह शव को श्मशान घाट पहुंचा कर अस्पताल प्रबंधन ने सूचना दी। तब तक टीम 40 किमी दूर आ चुकी थी। वह फिर लौटी और रात करीब 9 बजे अंतिम संस्कार करवा सकी।
- समीर शर्मा, तहसीलदार, देवभोग