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भ्रष्टाचार:अंबिकापुर में लेखपाल 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, हेडमास्टर की मौत के बाद बेटी से लीव इन कैशमैंट के नाम पर रुपए मांगे थे

अंबिकापुर9 महीने पहले
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अंबिकापुर में एसीबी ने लेखपाल को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ की जा रही है। - Dainik Bhaskar
अंबिकापुर में एसीबी ने लेखपाल को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ की जा रही है।
  • लुंड्रा स्थित बीईओ कार्यालय में पदस्थ है आरोपी लेखपाल, पेंशन, ग्रेच्युटी समेत अन्य लाभ के लिए पहले भी लिए रुपए
  • प्राथमिक स्कूल देवरी के हेडमास्टर की 4 साल पहले मौत हो गई थी, इसके बाद से ही परिवार को परेशान कर रहा था

अंबिकापुर में गुरुवार को एसीबी ने लेखपाल को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। पकड़ा गए लेखपाल लुंड्रा के बीईओ कार्यालय में पदस्थ है। उसने लीव इन कैशमैंट (अवकाश नकदीकरण) की राशि का भुगतान करने की एवज में यह रुपए मांगे थे। इसके लिए वह करीब 4 साल से दिवंगत हेडमास्टर की बेटी को चक्कर लगवा रहा था। फिलहाल, एसीबी आगे की कार्रवाई कर रही है। 

50 हजार मांगे थे, 10 हजार में सौदा तय हुआ
जानकारी के मुताबिक, डोडरी सूरजपुर निवासी परमेश्वर राम राजवाड़े प्राथमिक स्कूल देवरी में हेडमास्टर थे। उनकी अप्रैल 2016 में मौत हो गई। इसके बाद से ही उनकी बेटी निर्मला राजवाड़े पिता की लीव इन कैशमैंट की बकाया राशि 4 लाख रुपए के लिए बीईओ कार्यालय के चक्कर लगा रही थीं। आरोप है कि बीईओ कार्यालय में पदस्थ लेखपाल पटेल राम राजवाड़े इसके लिए 50 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। 

घर पर मिलकर सौदा हुआ पक्का
निर्मला एक जून को लेखपाल पटेल राम से मिली तो उसने कहा कि 10 हजार रुपए दोगी तो सारा काम कर दूंगा। इसके लिए दूसरों से 20 से 30 हजार रुपए लेता हूं। इस पर निर्मला ने एसीबी में शिकायत कर दी। सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप का आयोजन किया और गुरुवार सुबह महामाया पेट्रोल पंप के पास उसे रुपए लेने बुलाया। लेखपाल ने रुपए लेने के बाद साथ लाए रजिस्टर के बीच में रखे, वैसे ही एसीबी ने उसे धर दबोचा। 

पहले भी पेंशन, ग्रेच्युटी के नाम पर लिए थे 4 हजार रुपए
आरोप है कि इससे पहले भी लेखपाल पटेल राम राजवाड़े हेडमास्टर की मृत्यु के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी और ग्रुप इंश्योरेंस जारी करने के नाम पर 4 हजार रुपए ले चुका था। अब लीव इन कैशमैंट की 4 लाख रुपए राशि जारी करने के लिए फिर से पैसों की मांग कर रहा था। लेखपाल पर भ्रष्टाचार के साथ ही सरकारी आदेश का उल्लंघन करने की भी धाराएं लगाई गई हैं। हेडमास्टर की मृत्यु के चार साल बाद भी उनकी सेवा अवधि के लाभ को रोके रखा। 

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