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कु-प्रथाओं का सिलसिला जारी:लॉकडाउन के बीच चुपके से रचाई जा रही थी नाबालिग बच्ची की शादी, खबर मिलते ही पहुंच गई पुलिस और अफसरों की टीम

कोरबा4 महीने पहले
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तस्वीर कोरबा की है। परिवार के लोगों को पुलिस और महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने समझाया तब जाकर वो शादी न करने के लिए माने। - Dainik Bhaskar
तस्वीर कोरबा की है। परिवार के लोगों को पुलिस और महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने समझाया तब जाकर वो शादी न करने के लिए माने।

कोरबा के कटघोरा थाना इलाके में शुक्रवार को एक बाल विवाह का मामला सामने आया है। ये घटना ग्राम पंचायत धवईपुर के आश्रित ग्राम रामनगर की है। शुक्रवार को अक्षय तृतिया का दिन था। इसे शादी के लिहाजा से सबसे शुभ दिन माना जाता है। राम नगर के एक परिवार में नाबालिग बच्ची की शादी की जा रही थी। 17 मई तक लागू लॉकडाउन के सन्नाटे के बीच गांव के घर में हो रहे इस काम की खबर किसी ने पुलिस को दे दी। महिला बाल विकास परियोजना के अफसर और पुलिस ने घर में दबिश देकर बच्ची की शादी रुकवा दी।

ये है पूरा मामाला
जानकारी के मुताबिक रामनगर के रहने वाले मुनीराम की दो बेटियां हैं। एक की उम्र 18 साल है और छोटी बेटी अभी नाबालिग है। मुनीराम ने दोनों बेटियों की शादी साथ में ही करने का फैसला लेकर एक मंडप अपनी नाबालिग बेटी के लिए भी बनवा दिया। इसकी जानकारी मिलने पर पहुंचे अफसरों ने बताया कि बाल विवाह गैर-कानूनी है। ऐसा करने पर बाल विवाह अधिनियम 2006 के तहत एक लाख जुर्माना और 2 साल की सजा हो सकती है।

समझाइश के बाद छोड़ा
अफसरों ने इसकी जानकारी मुनीराम के परिवार को दी। करीब 1 घंटे तक रहे गहमा-गहमी के माहौल के बाद बच्ची के घर वालों ने अपनी गलती मानीं। अफसरों ने परिवार के सदस्यों को समझाइश देकर विवाह नही करवाने के निर्देश दिए। बात-चीत के बाद ये तय हुआ कि लॉकडाउन के बाद बड़ी बेटी प्रशासन से अनुमति लेकर करें। बच्ची के पिता से एक शपथ पत्र भी भरवाया गया कि जिसमें उन्होंने बेटी के बालिग होने पर ही शादी करवाने का वादा किया। परिवार को फिलहाल समझाइश देकर छोड़ दिया गया है।

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