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नक्सलियों को जोर का झटका:माओवादियों के जनपितुरी सप्ताह का आखिरी दिन, 2 लाख के इनामी समेत 8 का सरेंडर, एक ने भरमार बंदूक के साथ किया आत्मसमर्पण

दोरनापाल11 दिन पहले
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सुकमा जिले में 8 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। सरेंडर करने वालों में एक दंपती भी शामिल है। - Dainik Bhaskar
सुकमा जिले में 8 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। सरेंडर करने वालों में एक दंपती भी शामिल है।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का इन दिनों जनपितुरी सप्ताह चल रहा है, इल दौरान नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं। लेकिन इस बीच माओवादियों को जोर का झटका लगा है। दरअसल, शुक्रवार को 2 लाख के इनामी समेत 8 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक नक्सल दंपती भी शामिल हैं। वहीं एक नक्सली ने भरमार बंदूक के साथ आत्मसमर्पण किया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों का कहना है कि उन्होंने संगठन में हो रहे भेदभाव, अत्याचार और शोषण के चलते ही सरेंडर करने का फैसला लिया है।

इन नक्सलियों ने किया सरेंडर

  • 2 लाख रुपए के इनामी नक्सली वंजाम भीमा ने सरेंडर कर दिया है।
  • रवि ने सरेंडर किया है, वो नक्सलियों का DKMS सदस्य था।
  • कोसा, नक्सलियों का जीआरडी कमांडर था, अब इसने आत्मसमर्पण कर दिया है।
  • सोड़ी दुला,देवा,कवासी देवा और दिरदो गंगा ने भी सरेंडर किया है, ये सभी मिलिशया सदस्य थे।
  • इन सभी के अलावा माड़वी कलावती ने सरेंडर किया है, ये नक्सलियों की सीएनएम सदस्य थी।

सभी नक्सलियों ने जिले के कलेक्टर विनीत नंदनवार, एसपी के.एल ध्रुव और तमाम अधिकारियों के सामने सरेंडर किया है। इससे पहले भी नक्सली सुकमा जिले के अलावा बस्तर के अलग-अलग क्षेत्रों में माओवादी संगठन को छोड़कर पुलिस के समक्ष सरेंडर कर चुके हैं। कुछ दिन पहले नारायणपुर जिले में नक्सलियों के लिए पुलिस की रेकी, खाना बनाने समेत तमाम करने वाले 6 से ज्यादा माओवादियों ने सरेंडर किया था। वहीं साल भर पहले इसी जिले में महिला समेत 5 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। इनमें से 2 नक्सलियों पर 5-5 लाख का इनाम था।

जनपितुरी सप्ताह क्या है?

नक्सली हर साल 5 से 7 दिन जनपितुरी सप्ताह मनाते हैं। इस दौरान नक्सली अंदरूनी इलाकों में ग्रामीणों की सभा लेते हैं। इस सभा के दौरान नक्सली ग्रामीणों को जल,जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ने को कहते हैं। इस दौरान नक्सली एनकाउंटर में मारे गए अपने साथियों को श्रध्दांजलि देते हैं। उनके याद में अलग-अलग जगह पर स्मारक बनाते हैं। वहीं लाल आतंकी इस पूरे सप्ताह के दौरान कोई बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं। इस साल नक्सलियों का ये सप्ताह 5 जून से शुरू हुआ था, जो 11 जून को खत्म हो रहा है।

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