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नक्सली दंपती के सरेंडर पर सवाल:महिला के परिजन ने कहा- उसकी उम्र 16 साल है, उसकी शादी भी नहीं हुई है; बस्तर IG ने कहा- नक्सलियों ने पर्चा जारी कर बताया है गद्दार

जगदलपुर/कांकेर10 दिन पहलेलेखक: लोकेश शर्मा
24 दिन पहले उत्तर बस्तर माओवादी संगठन के नक्सली अर्जुन ताती और इसकी पत्नी लक्ष्मी पद्दा ने सरेंडर किया था।

छतीसगढ़ के कांकेर जिले के कामतेड़ा BSF कैंप में 12 मई को कोरोना संक्रमित इनामी नक्सली दंपती अर्जुन ताती व लक्ष्मी पद्दा ने सरेंडर किया था। पुलिस दंपती को उत्तर बस्तर माओवाद संगठन का सक्रिय सदस्य बता रही है। अब इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इनके सरेंडर के बाद दैनिक भास्कर की टीम लक्ष्मी पद्दा के गांव अति संवेदनशील इलाका आलदंड पहुंची। जहां लक्ष्मी के परिजनों, गांव की सरपंच व ग्रामीणों से मुलाकात की। इन्होंने बताया कि लक्ष्मी नक्सली नहीं है और न ही उसकी शादी हुई है। जिस लक्ष्मी की उम्र पुलिस 22 वर्ष बता रही है, वह केवल 16 साल की बच्ची है। परिजनों के इस बयान के बाद पुलिस के सरेंडर पर भी अब सवाल उठ रहे हैं। भास्कर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की है।

परिजन बोले- नहीं हुई है लक्ष्मी की शादी, वो अभी नाबालिग है
कांकेर जिले के अति संवेदनशील कंदाड़ी ग्राम पंचायत के आश्रित गांव आलदंड में भास्कर की टीम पहुंची। यहां लक्ष्मी के परिजनों से बात की। लक्ष्मी के बड़े भाई मंगू राम पद्दा ने बताया कि उसकी बहन नक्सली नहीं है, न ही उसकी किसी अर्जुन नाम के लड़के के साथ शादी हुई है। लक्ष्मी की उम्र अभी महज 16 साल है। वो नाबालिग है। पुलिस उसे शादीशुदा क्यों बता रही है? यह समझ नहीं आ रहा। पुलिस ने उसे नक्सली कह कर सरेंडर करवा दिया है। अर्जुन लड़का कौन है? कहां का है? हम नहीं जानते। हमें हमारी बच्ची वापस लौटा दो।

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आधार कार्ड में 16 वर्ष, पुलिस ने बताया 22 साल की है लक्ष्मी
लक्ष्मी के भाई मंगू ने लक्ष्मी का आधार कार्ड दिखाया, जिसमें उसकी जन्म तारीख 1-जनवरी-2005 लिखी हुई है। आधार कार्ड के अनुसार लक्ष्मी की उम्र महज 16 साल ही है। लेकिन सरेंडर के बाद पुलिस के द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति व अधिकारियों के द्वारा दिए गए बयान में लक्ष्मी पद्दा की उम्र 22 वर्ष बताई गई है।

नक्सलियों की ओर से जारी किया गया पर्चा जिसमें लक्ष्मी और उसके साथियों को गद्दार बताया गया है।
नक्सलियों की ओर से जारी किया गया पर्चा जिसमें लक्ष्मी और उसके साथियों को गद्दार बताया गया है।

तेंदूपत्ता तोड़ने गई थी मामा के घर
लक्ष्मी के परिजनों ने बताया कि लक्ष्मी के सरेंडर की जिस दिन खबर लगी उसके कुछ दिन पहले ही उसके मामा पंडरा नुरूटी उसे तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए अपने घर जरावर गांव ले कर गए थे। जहां से एक रात पहले लक्ष्मी घर पर नहीं दिखी। उसके मामा उसे ढूंढने आलदंड गए, लेकिन वहां भी कोई जानकारी नहीं मिली। फिर अखबार में पढ़े की लक्ष्मी का पुलिस ने सरेंडर करवा दिया है।

इधर, कंदाड़ी गांव की सरपंच मैनी कचलामी व ग्रामीणों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। सरपंच ने कहा कि लक्ष्मी की मां और बड़े भाई मेरे घर आए थे। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी तेंदूपत्ता तोड़ने मामा के घर गई थी। वहां से कोई उसे उठा कर ले गया। वो सिर्फ 16 साल की है। गांव में घोटुल की परंपरा प्रचलित है, लक्ष्मी उसमें नाच गाना करती थी। हमारी संस्कृति टीम में जुड़ी हुई थी। लक्ष्मी नक्सली नहीं है, उसके सरेंडर की खबर बड़ी आश्चर्य की बात है।

सरेंडर पर नारायणपुर विधायक भी उठा चुके हैं सवाल
हाल ही में नारायणपुर के विधायक चंदन कश्यप भी पुलिस के द्वारा नक्सलियों का सरेंडर करवाने पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने मीडिया में बयान देते हुए कहा था कि पुलिस आदिवासी युवक-युवतियों को घर से उठा कर ले जा रही है और उन्हें नक्सली बता कर सरेंडर करवा रही है। इस मामले पर मेरी DIG से भी बात हुई है। यदि वास्तव में नक्सली हैं, तो उनकी सूची जारी करिए। छतीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण नीति के तहत नक्सलियों का सरेंडर करवाएंगे और उन्हें शासकीय लाभ दिलवाएंगे। DIG ने कहा था कि मैं सूची जारी कर दूंगा लेकिन आज तक जारी नहीं किए हैं।

लक्ष्मी का आधार कार्ड। इसके मुताबिक, उसकी उम्र 16 साल है।
लक्ष्मी का आधार कार्ड। इसके मुताबिक, उसकी उम्र 16 साल है।

13 मई को IG और SP ने बताया था, लक्ष्मी है हार्डकोर इनामी नक्सली
बस्तर आईजी सुंदरराज पी व कांकेर के एसपी एम आर आहिरे ने 13 मई को मीडिया में अपना बयान जारी करते हुए बताया था कि कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के कामतेड़ा BSF कैम्प में 12 मई को नक्सली दंपती पहुंचे थे, इन्होंने अपना नाम अर्जुन ताती (28) और लक्ष्मी पद्दा (22) होना बताया था। जिनकी पहचान LOS सदस्य के रूप में की गई थी। दोनों पर 3-3 लाख रुपए का इनाम भी घोषित है। ये दोनों माओवादी पिछले कई वर्षों से उत्तर बस्तर नक्सल संगठन में रह कर काम कर रहे थे और कई बड़ी नक्सल घटनाओं में शामिल थे। बस्तर IG ने कहा था कि दोनों पति-पत्नी कोरोना संक्रमित हैं। इलाज के बाद विधिवत सरेंडर करवाएंगे।

बस्तर IG सुंदरराज पी ने भास्कर से चर्चा में बताया कि अर्जुन और लक्ष्मी दोनों पुलिस से संपर्क किया था। ये दोनों खुद को दंपती बता रहे थे। दोनों एक दूसरे को चाहते थे, इस लिए नक्सल संगठन छोड़ कर दोनों साथ में रहने लग गए थे। लक्ष्मी के नाबालिग होने की जानकारी नहीं है। उसका डॉक्यूमेंट चेक करवाएंगे। इन्हें इनके परिवार वालों से मिलवा देंगे ताकि आमने-सामने बात हो जाएगी। लक्ष्मी ने खुद कहा है कि वो नक्सली है और पिछले क़ई सालों से संगठन में जुड़ कर काम कर रही है। इस पर 3 लाख रुपए का इनाम भी घोषित है।

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