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नक्सलियों ने लापता जवान की हत्या का दावा किया:राजनांदगांव में थाने से 1KM दूर बांधा बैनर, असिस्टेंट कांस्टेबल पर मुखबिरी और अवैध वसूली का आरोप भी लगाया; पुलिस ने कहा- पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं

राजनांदगांव/कांकेर8 दिन पहले
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नक्सलियों का दावा है कि उन्होंने सहायक आरक्षक मनोज नेताम की हत्या कर दी है। हालांकि जवान का शव बरामद नहीं हुआ है। वह 28 अप्रैल से लापता हैं। - Dainik Bhaskar
नक्सलियों का दावा है कि उन्होंने सहायक आरक्षक मनोज नेताम की हत्या कर दी है। हालांकि जवान का शव बरामद नहीं हुआ है। वह 28 अप्रैल से लापता हैं।

छत्तीसगढ़ पुलिस में सहायक आरक्षक मनोज नेताम 36 दिन से लापता हैं। नक्सलियों का दावा है कि उन्होंने मनोज नेताम की हत्या कर दी है। इसको लेकर नक्सलियों ने राजनांदगांव में मदनवाड़ा थाने से महज एक किमी दूर बैनर भी बांधा है। नक्सल संगठन के स्थानीय लीडर ने पत्र जारी कर मुखबिरी और अवैध वसूली के नाम पर हत्या की बात कही है। हालांकि जवान का शव बरामद नहीं हुआ है। वहीं पुलिस का कहना है कि जवान का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

नक्सलियों ने मदनवाड़ा से रेतेगांव के बीच सीतागांव मार्ग पर दो पेड़ों के बीच बैनर लगाया है। उसी बैनर पर लापता जवान मनोज नेताम को मौत की सजा देने की बात लिखी गई है।
नक्सलियों ने मदनवाड़ा से रेतेगांव के बीच सीतागांव मार्ग पर दो पेड़ों के बीच बैनर लगाया है। उसी बैनर पर लापता जवान मनोज नेताम को मौत की सजा देने की बात लिखी गई है।

नक्सल संगठन RKB प्रवक्ता ने ली है मारने की जिम्मेदारी

जानकारी के मुताबिक, नक्सलियों ने मदनवाड़ा से रेतेगांव के बीच सीतागांव मार्ग पर दो पेड़ों के बीच बैनर लगाया है। उसी बैनर पर लापता जवान मनोज नेताम को मौत की सजा देने की बात लिखी गई है। नक्सल संगठन RKB डिवीजन के प्रवक्ता विकास ने सहायक आरक्षक मनोज नेताम की हत्या की जिम्मेदारी ली है। कहा है कि पुलिस में भर्ती होने के पहले मनोज गोपनीय सैनिक के रूप में मुखबिरी का काम करता था। फिर जब पुलिस में भर्ती हो गया तो अवैध रूप से वसूली करने लगा।

नक्सल प्रवक्ता ने अपने पत्र में बताया है कि पहले भी उन्होंने मनोज को खत्म करने का प्रयास किया था, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद मौका देखकर उसका अपहरण करने के बाद हत्या कर दी गई।
नक्सल प्रवक्ता ने अपने पत्र में बताया है कि पहले भी उन्होंने मनोज को खत्म करने का प्रयास किया था, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद मौका देखकर उसका अपहरण करने के बाद हत्या कर दी गई।

शव परिजनों को देने जताई असमर्थता
नक्सल प्रवक्ता ने अपने पत्र में बताया है कि पहले भी उन्होंने मनोज को खत्म करने का प्रयास किया था, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद मौका देखकर उसका अपहरण करने के बाद हत्या कर दी गई। प्रवक्ता ने जवान मनोज का शव परिजनों को देने में असमर्थता भी जताई है। हालांकि पुलिस की ओर से नक्सलियों के इस दावों की पुष्टि नहीं की गई है। भानुप्रतापपुर SDOP अमोलक सिंह ढिल्लो का कहना है कि सहायक आरक्षक मनोज नेताम की हत्या किए जाने की कोई जानकारी नहीं है।

मानपुर के नक्सल क्षेत्र में मिली थी बाइक और चप्पल
सहायक आरक्षक मनोज नेताम की बाइक और चप्पल 1 मई को कांकेर बार्डर से लगे राजनांदगांव के नक्सल प्रभावित इलाके मानपुर के सुनसान इलाके में मिली थी। वह कांकेर के जाड़ेकुर्सी गांव के रहने वाले हैं और कोडेकुर्सी थाने में तैनात थे। वह 28 अप्रैल को ड्यूटी पर थाना नहीं पहुंचे। इसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चल रहा था। जहां से चप्पल और बाइक बरामद हुई है, वहीं से कुछ दूरी पर जवान का गांव भी है। तब अफसरों ने कहा था कि वह बिना बताए और छुट्‌टी लिए गायब हैं।

कवर्धा में भी 21 अप्रैल को लापता CAF के APC का सुराग नहीं
सहायक आरक्षक मनोज नेताम से करीब 10 दिन पहले 21 अप्रैल को कवर्धा में CAF (छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स) के 20वीं बटालियन के असिस्टेंट प्लाटून कमांडर (APC) कृष्टोफर लकड़ा गायब हुए हैं। उनका अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। नक्सल प्रभावित इलाके में स्थित कैंप से गायब होने के चलते नक्सलियों के अगवा कर लेने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अफसरों ने इससे इनकार किया है। SP शलभ सिन्हा ने कहा था कि जवान की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।

बीजापुर और सुकमा में अगवा SI सहित दो जवानों की हत्या की थी
इससे पहले बीजापुर में 21 अप्रैल को अगवा किए गए DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप) के SI मुरली ताती की नक्सलियों ने 23 अप्रैल की देर रात हत्या कर दी थी। उनका शव सड़क किनारे फेंक कर नक्सली भाग निकले। उनका शव रात एड्समेटा के पेददा पारा में मिला। वहीं इसके बाद 12 मई को सुकमा में नक्सलियों ने घर में घुसकर सहायक आरक्षक वेट्‌टी भीमा की बेरहमी से हत्या कर दी थी। सहायक आरक्षक वेट्‌टी भीमा SIB (स्पेशल इंवेस्टीगेशन ब्रांच) में पदस्थ था और उसकी ड्यूटी दोरनापाल थाने में थी।

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