पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Chhattisgarh Police Constable Rajesh Patel Feeds 500 Dogs Daily As Kudargarh Dham Mandir Closed For Devotees

बंदरों का 'BROTHER', देखिए VIDEO:पुलिस कांस्टेबल राजेश की एक आवाज पर दौड़े आते हैं सैकड़ों बंदर, लॉकडाउन में कुदरगढ़ मंदिर बंद हुआ तो खुद के खर्च पर खाना खिलाते हैं

​​​​​​​सूरजपुरएक महीने पहले
सूरजपुर में पुलिस कांस्टेबल राजेश रोज खुद के खर्च से बंदरों को लाई (मुर्रा) खिलाते हैं।

छत्तीसगढ़ का सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ जंगल में स्थित है प्राचीन कुदरगढ़ी धाम। यहां सैकड़ों बंदर दिखाई दे जाएंगे। धाम में आने वाले श्रद्धालुओं से मिलने वाले प्रसाद और अन्य चीजों पर ही यह बंदर निर्भर हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान मंदिर बंद हुआ तो बंदर भी भूख से परेशान हो गए। सारी-सारी रात चिल्लाते रहते। ऐसे में पुलिस कांस्टेबल राजेश पटेल इनके लिए मसीहा बन गए। वह पिछले 2 माह से रोजाना 500 बंदरों को भोजन करा रहे हैं।

कुदरगढ़ी धाम में आने वाले श्रद्धालुओं से मिलने वाले प्रसाद और अन्य चीजों पर ही यह बंदर निर्भर हैं।
कुदरगढ़ी धाम में आने वाले श्रद्धालुओं से मिलने वाले प्रसाद और अन्य चीजों पर ही यह बंदर निर्भर हैं।

दरअसल, पुलिस कांस्टेबल राजेश पटेल कुदरगढ़ चौकी में पदस्थ हैं। संक्रमण के चलते उनकी ड्यूटी भी लगी थी। इस दौरान एक रात ड्यूटी के दौरान उन्होंने बंदरों के बच्चों को चिल्लाते हुए सुना। अगले दिन सुबह पहुंचे तो देखा कि बंदर भूख से बेहाल हैं। अपने साथ लेकर गई लाई (मुर्रा) उन्होंने बंदरों को खाने के लिए दिया। उसे देखते ही सारे बंदर टूट पड़े। बंदरों की ऐसी हालत देख उनको भोजन कराने का सिलसिला शुरू हो गया।

राजेश को अफसरों से आर्थिक मदद भी मिल रही है। राजेश कहते हैं कि उन्हें बहुत सुकून मिल रहा है। धाम में एक आवाज पर बंदर उनके पास दौड़कर आ जाते हैं।
राजेश को अफसरों से आर्थिक मदद भी मिल रही है। राजेश कहते हैं कि उन्हें बहुत सुकून मिल रहा है। धाम में एक आवाज पर बंदर उनके पास दौड़कर आ जाते हैं।

राजेश कहते हैं- इससे मन को बहुत सुकून मिला है

राजेश खुद के खर्च से रोजाना उनको लाई (मुर्रा) खिलाने लगे। बीच-बीच में बंदरों को तरबूज, टमाटर और अन्य चीजों का भी स्वाद चखाया। इसकी जानकारी पुलिस के अफसरों को लगी तो एडिशनल SP भी देखने के लिए पहुंच गए। इसके बाद SP के निर्देश पर मदद मिलनी शुरू हो गई। अब राजेश को अफसरों से आर्थिक मदद भी मिल रही है। राजेश कहते हैं कि उन्हें बहुत सुकून मिल रहा है। धाम में एक आवाज पर बंदर उनके पास दौड़कर आ जाते हैं।

कोरोना संक्रमण के दौरान मंदिर बंद हुआ तो बंदर भी भूख से परेशान हो गए। सारी-सारी रात चिल्लाते रहते।
कोरोना संक्रमण के दौरान मंदिर बंद हुआ तो बंदर भी भूख से परेशान हो गए। सारी-सारी रात चिल्लाते रहते।

सिपाही की पहल सराहनीय है, भोजन की व्यवस्था होगी

कुदरगढ़ धाम ट्रस्ट के सदस्य ओमकार पांडे कहते हैं कि सिपाही राजेश पटेल की ओर की गई यह पहल सराहनीय है। मंदिर बंद होने से वन्य जीवों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए अन्य समाज सेवियों को भी मदद के लिए आगे आना चाहिए। ओमकार कहते हैं कि ट्रस्टी होने के नाते वह खुद भी इस बात का प्रयास करेंगे कि ट्रस्ट की ओर से बंदरों के भोजन की व्यवस्था की जाए। जिससे उनको परेशानी का सामना न करना पड़े।

खबरें और भी हैं...